कश्मीर: अगवा किए गए तीन पुलिसकर्मियों की हत्या

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, फाइल चित्र
पढ़ने का समय: 3 मिनट

भारत प्रशासित कश्मीर के शोपियां से अगवा तीन पुलिसकर्मियों की चरमपंथियों ने शुक्रवार तड़के गोली मारकर हत्या कर दी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पुलिसकर्मियों को जिस गांव से अग़वा किया गया था, उनके शव वहां से करीब एक किलोमीटर से कुछ ज़्यादा दूरी पर स्थित एक बगीचे से बरामद किए गए.

पुलिस के मुताबिक शव वनगाम इलाके से मिले.

पुलिस अधिकारियों ने मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल निसार अहमद और दो स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) फ़िरदौस अहमद और कुलवंत सिंह के तौर पर की है.

अधिकारियों के मुताबिक निसार अहमद सशस्त्र पुलिस के साथ काम कर रहे थे. फिरदौस अहमद ने रेलवे में काम किया था और फिलहाल कांस्टेबल बनने की प्रक्रिया से गुजर रहे थे. कुलवंत सिंह कुलगाम पुलिस के साथ काम कर रहे थे.

पुलिसकर्मी के भाई को छोड़ा

चरमपंथियों ने एक पुलिस कांस्टेबल के भाई को भी अग़वा किया था लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया.

हिज़्बुल मुजाहिदीन संगठन के कथित ट्विटर हैंडल पर इस समूह ने पुलिसकर्मियों को अगवा करने और उनकी हत्या की जिम्मेदारी ली है.

इमेज स्रोत, @JMUKMRPOLICE TWITTER/BBC

पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया है कि बाटागंड गांव के लोगों ने चरमपंथियों का पीछा किया और उनसे गुजारिश की कि वो पुलिसकर्मियों को अग़वा नहीं करें लेकिन चरमपंथियों ने हवा में गोलियां चलाते हुए गांववालों को डराने का प्रयास किया.

उन्होंने बताया कि चरमपंथियों ने इलाके में स्थित एक नदी पार की और पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी.

इमेज स्रोत, Getty Images

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "चरमपंथियों की गोलियों से तीन और पुलिसकर्मियों ने जान गंवा दी. हम सभी तयशुदा तरीके से गुस्सा, शोक और निंदा करेंगे. दुर्भाग्य से इससे पीड़ित परिवारों को कोई दिलासा नहीं मिलेगा."

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

उन्होंने आगे लिखा, "पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के अपहरण में इजाफा होने से साफ है कि केंद्र सरकार की सख्ती की नीति काम नहीं कर रही है. आगे बढ़ने का इकलौता रास्ता संवाद, फिलहाल दूर का ख्वाब दिखता है."

इमेज स्रोत, MAJID JAHANGIR

इमेज कैप्शन, फाइल चित्र

इसके पहले चरमपंथियों ने 30 अगस्त को दक्षिणी कश्मीर में अलग-अलग जगहों से पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों को अगवा किया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था.

कम से कम आठ ऐसे लोगों का अपहरण किया गया था जिनके रिश्तेदार जम्मू कश्मीर पुलिस में काम करते हैं.

हिज़्बुल मुजाहिदीन के कमांडर रियाज़ नाइकू ने एक वीडियो जारी कर उन्हें अगवा करने की जिम्मेदारी ली थी और पुलिस की हिरासत में रखे गए चरमपंथियों के तमाम रिश्तेदारों को छोड़ने की मांग की थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)