सऊदी एयर बेस पर दो टुकड़ों में टूटे अमेरिकी विमान की तस्वीर की सच्चाई क्या है

यह तस्वीर सबसे पहले एक फ़ेसबुक पेज पर साझा की गई थी

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इमेज कैप्शन, यह तस्वीर सबसे पहले एक फ़ेसबुक पेज पर साझा की गई थी
    • Author, एम्मा पेनगेली, शायान सरदारिज़ादे और जेक हॉर्टन
    • पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

वेरिफ़ाइड तस्वीरों से पता चलता है कि सऊदी अरब के एक एयर बेस पर अमेरिकी कमांड और कंट्रोल विमान नष्ट हो गया है.

ये तस्वीरें सबसे पहले एक फ़ेसबुक पेज पर साझा की गई थीं, जो अमेरिकी सेना से जुड़ी खबरें पोस्ट करता है. तस्वीरों में ई-3 सेंट्री विमान दो हिस्सों में टूटा हुआ दिखाई दे रहा है.

बीबीसी ने पुष्टि की है कि ये तस्वीरें रियाद से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की हैं. तस्वीरों में दिख रहे पिलर, स्टोरेज यूनिट और पक्के हिस्सों पर बने निशान सैटेलाइट इमेज से मेल खाते हैं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभी तक इस घटना पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. बीबीसी ने इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी है.

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शुक्रवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरानी हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर है.

वहीं, द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि कम से कम दो अमेरिकी रीफ्यूलिंग विमान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

रविवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि एक शाहेद ड्रोन ने ई-3 विमान को निशाना बनाया.

विमान के बारे में और क्या पता चला

नष्ट हुआ विमान इस फ़ाइल फ़ोटो में दिख रहे विमान के जैसा था

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बीबीसी वेरिफ़ाई ने 11 मार्च की सैटेलाइट तस्वीर में भी इसी स्थान पर एक ई-3 विमान देखा है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह वही विमान है या नहीं.

वेरिफ़ाइड तस्वीरों में से एक में विमान का टेल नंबर भी दिखाई देता है. इसके आधार पर फ़्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ़्लाइटरडार24 की जांच की गई, जिसमें पता चला कि 18 मार्च को यह विमान एयर बेस के पास उड़ान भर रहा था.

शुक्रवार को ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर में एयर बेस के एप्रन क्षेत्र में आग दिखाई देती है, जो ई-3 विमान से क़रीब 1600 मीटर पूरब में है.

यह साफ़ नहीं है कि यह उसी हमले का हिस्सा है या नहीं, जिसमें इस विमान को नुकसान पहुंचा.

बीते 17 फ़रवरी को बीबीसी वेरिफ़ाई ने फ़्लाइटरडार24 डेटा की पड़ताल के आधार पर पुष्टि की थी कि दो ई-3 सेंट्री अवाक्स विमान ब्रिटेन के मिल्डेनहाल एयरफ़ोर्स स्टेशन पर पहुंचे थे.

अवाक्स क्या है और इसका महत्व क्या है?

अवाक्स

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बोइंग ई-3 अवाक्स (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) एक बोइंग 707 विमान पर आधारित है और इसके पिछले हिस्से में घूमने वाली रडार डिस्क लगी होती है, जो इसे अलग पहचान देती है.

यह रडार लंबी दूरी तक संभावित लक्ष्यों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने में सक्षम होता है, जिससे जंग के दौरान ख़तरे की समय से पहले जानकारी मिलती है.

अमेरिकी वायुसेना की वेबसाइट के अनुसार, यह विमान एयर ऑपरेशन के कमांडरों को जानकारी देता है, जिससे वे हवाई युद्ध को नियंत्रित कर सकें.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अवाक्स आधुनिक युद्धों के दौरान, ज़मीन और हवा में सर्विलांस सिस्टम (वायु रक्षा कार्यों) के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता हैं, जिसे आमतौर पर एयर 'सर्विलांस सिस्टम' कहते हैं.

इसकी मदद से हवाई हमले किए जाते हैं या हमलों को रोकने की कार्रवाई की जाती है.

इसे हवा में उड़ता हुआ एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम कहा जाता है, इनका उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहां 'ग्राउंड सर्विलांस' संभव नहीं होता है.

इस विमान ने पहली बार 1977 में सेवा शुरू की थी और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह 2035 तक अमेरिकी वायुसेना में सक्रिय रह सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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