होर्मुज़ के बाद क्या अब रेड सी से भी तेल की आवाजाही पर पड़ने वाला है असर?

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ऊर्जा और अन्य ज़रूरी सामान की सप्लाई का एक अहम मार्ग 'रेड सी' है और इस रास्ते से दुनिया का लगभग 15% समुद्री कारोबार होता है.
यमन के हूती गुट के ईरान युद्ध में अमेरिका और इसराइल के ख़िलाफ़ उतर जाने से इस रास्ते से होने वाले व्यापार पर भी ख़तरे की आशंका है, जो पहले भी हूती लड़ाकों के निशाने पर रहा है.
अगर ऐसा होता है तो दुनिया भर के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट की ईरानी नाकेबंदी ने तेल और गैस के दाम बढ़ा दिए हैं और कई देशों के आगे संकट खड़ा हो चुका है.
होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का क़रीब 20% होकर गुज़रता रहा है, जो अभी काफ़ी हद तक बंद है और इसकी कुछ भरपाई रेड सी के रास्ते हो रही है.
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सेबेस्टियन अशर
मध्य पूर्व विश्लेषक
ईरान से जुड़ाव और उसका समर्थन करने के बावजूद, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के शुरुआती चार हफ़्तों तक हूती लड़ाकों ने हमले नहीं किए थे.
लेकिन अब इस हथियारबंद गुट ने पहली बार इसराइल की ओर मिसाइलें दाग़ी हैं.
ईरान समर्थित यह विद्रोही समूह इसराइल को अपना दुश्मन मानता है. इसका राजधानी सना और यमन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर नियंत्रण है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार नहीं है.
हूती गुट का कहना है कि वे "इसराइल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों" को निशाना बना रहे थे.

यह सच है कि मिसाइल हमले के ज़रिए हूती लड़ाकों से इसराइल को जितना ख़तरा है, वह ईरान से होने वाले ख़तरे के मुक़ाबले कहीं कम है.
7 अक्तूबर 2023 को इसराइल पर हमास के हमलों के बाद, जब ग़ज़ा में युद्ध छिड़ा, तो इस गुट ने हमास के समर्थन में कई बार इसराइल पर हमले किए.
लेकिन उन हमलों से इसराइल को असल में कोई ख़ास नुकसान नहीं पहुँचा.
हूती लड़ाकों से इसराइल को कहीं ज़्यादा बड़ा ख़तरा यमन के समुद्री तट के पास है.
हूती गुट से कितना बड़ा ख़तरा

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हमास को समर्थन के तौर पर इस समूह ने रेड सी के दक्षिणी छोर पर, यमन और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के बीच स्थित बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को निशाना बनाया.
उनके इस क़दम से उस अहम व्यापारिक समुद्री मार्ग पर ख़तरा पैदा हो गया था.
अगर वे दोबारा ऐसा करते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक और बड़ा झटका होगा.
ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लगभग बंद कर रखा है. अब हूती लड़ाकों की वजह से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद ज़रूरी दुनिया के दो मुख्य रणनीतिक जलमार्ग भी पूरी तरह से बंद हो सकते हैं.
हूती अपने खाड़ी अरब पड़ोसी देशों, जैसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया है.
जब हूतियों ने पहले इस तरह की कार्रवाई की थी, तो उन्हें अमेरिका और इसराइल की तरफ़ से ज़बरदस्त हवाई हमलों का सामना करना पड़ा था. इन हमलों का मक़सद उनके नेतृत्व और सैन्य क्षमता को नष्ट करना था.
लेकिन ऐसा लगता है कि हूती उन हमलों से उबर गए हैं. अब सवाल यह है कि वे किस हद तक आगे जाने के लिए तैयार है.
जब उन्होंने हमास और फ़लस्तीनियों के समर्थन में हमले किए थे, तो उन्हें अपने देश और अपने क्षेत्र के भीतर कुछ सराहना मिली थी.
लेकिन ईरान के लिए ऐसा करना एक बिल्कुल अलग बात हो सकती है.
इसमें एक मुद्दा ख़ुद यमन का भी है, जहाँ सालों की उथल-पुथल और युद्ध के बाद, पिछले कुछ समय से काफ़ी हद तक शांति बनी हुई है.
अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में हूती लड़ाकों की सैन्य भागीदारी बढ़ने से, यमन के अपने आंतरिक संघर्ष में एक बार फिर से हिंसा भड़क सकती है.
इसमें कोई शक नहीं है कि अगर हूती अपने हमले जारी रखते हैं, उन्हें और तेज़ करते हैं तो यह इस युद्ध के ज़्यादा बढ़ने और फैलने का संकेत होगा.
शनिवार को बाद में हूती गुट ने इसराइल के ख़िलाफ़ मिसाइल और ड्रोन हमलों की दूसरी खेप लॉन्च करने का दावा किया.
रेड सी के समुद्री मार्ग की अहमियत
पॉलीन कोला
बीबीसी न्यूज़
इसराइल और यमन के बीच दूरी काफ़ी ज़्यादा है, और इसराइल पहले भी हूती मिसाइलों को रोकने में सफल रहा है.
लेकिन इस हथियारबंद गुट ने पहले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में जहाज़ों पर हमले किए हैं. इस रास्ते का इस्तेमाल हिंद महासागर से रेड सी और आख़िर में स्वेज़ नहर तक पहुँचने के लिए किया जाता है.
स्वेज़ नहर एशिया और यूरोप के बीच सबसे तेज़ समुद्री मार्ग है और यह तेल और लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के ढुलाई के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है.
नवंबर 2023 से 2025 की शुरुआत तक हूती गुट ने रेड सी में जहाज़ों पर क़रीब 200 हमले किए, जिससे 30 से ज़्यादा जहाज़ों को नुक़सान पहुँचा और कम से कम एक जहाज़ को अग़वा कर लिया गया.
इन हमलों के कारण बड़ी-बड़ी शिपिंग कंपनियों को भी रेड सी का इस्तेमाल बंद करना पड़ा. इस समुद्री मार्ग से होकर आमतौर पर दुनिया का क़रीब 15% समुद्री व्यापार होता है.
होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान की नाकेबंदी के बाद रेड सी का रास्ता काफ़ी अहम हो गया है, ऐसे में इस समुद्री मार्ग का संकट दुनिया के सामने अर्थव्यवस्था की नई परेशानी खड़ी कर सकता है.
हूती गुट के हमलों के बाद जहाज़ों को दक्षिणी अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए एक बहुत लंबा रास्ता अपनाना पड़ा.
इन हमलों के बाद, जनवरी 2024 और मार्च 2025 में, अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए.
कौन हैं हूती विद्रोही
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया 'ज़ैदी' समुदाय का एक हथियारबंद समूह है.
इस समुदाय ने 1990 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए इस समूह का गठन किया था.
उनका नाम उनके अभियान के संस्थापक हुसैन अल हूती के नाम पर पड़ा है. वे ख़ुद को 'अंसार अल्लाह' यानी ईश्वर के साथी भी कहते हैं.
साल 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक़ पर हुए हमले में हूती विद्रोहियों ने नारा दिया था, ''ईश्वर महान है. अमेरिका का ख़ात्मा हो, इसराइल का ख़ात्मा हो. यहूदियों का विनाश हो और इस्लाम की विजय हो.''
उन्होंने ख़ुद को हमास और हिज़्बुल्लाह के साथ मिलकर इसराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ ईरान के नेतृत्व वाली 'प्रतिरोध की धुरी' का हिस्सा बताया था.
हूती विद्रोही लेबनान के सशस्त्र शिया समूह हिज़्बुल्लाह के मॉडल से प्रेरणा लेते हैं.
हूती ख़ुद को ईरान का सहयोगी भी बताते हैं क्योंकि उनका साझा दुश्मन सऊदी अरब है.
शक जताया जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान हथियार भी दे रहा है.
अमेरिका और सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने हूती विद्रोहियों को बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस किया था, जिनका इस्तेमाल 2017 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हमले के लिए किया गया था. इन मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया था.
सऊदी अरब ने ईरान पर हूती विद्रोहियों को क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन देने का भी आरोप लगाया है, जिन्हें 2019 में सऊदी अरब के तेल कारखानों पर हमले के लिए इस्तेमाल किया गया था.
हूती विद्रोही सऊदी अरब पर कम रेंज वाली हज़ारों मिसाइल दाग चुके हैं और उन्होंने यूएई को भी निशाना बनाया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































