मोदी-शाह के किले को ढहा पाएंगे केजरीवाल?
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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आम आदमी पार्टी ने पंजाब और गोवा के चुनाव ख़त्म होने के बाद बिना कोई पल गंवाए अपने नए मिशन पर काम शुरू कर दिया है.
ये है आम आदमी पार्टी का 'मिशन गुजरात.'
इस मिशन के इंचार्ज गोपाल राय ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को गुजरात के विकास का मॉडल बेचा था. पूरे देश में एक भ्रम पैदा किया है. उसकी हक़ीक़त को हम देश के लोगों के सामने लाएंगे. वहां के लोग भी वास्तविक तौर पर विकास चाहते हैं."
नरेंद्र मोदी 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के विकास कार्यों का फ़ायदा उन्हें मिला. भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह भी गुजरात से ही हैं.
गोपाल राय दावा करते हैं, "पूरे देश को गुजरात के नाम पर छला जा रहा है. आज महात्मा गांधी का गुजरात, अमित शाह के आतंक राज का गुजरात बन गया है. उससे राज्य को मुक्त कराना है, आम आदमी पार्टी ने इस चैलेंज को स्वीकार किया है."
22 साल से बीजेपी का शासन
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या आम आदमी पार्टी गुजरात में बीते 1995 से लगातार सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी के दबदबे को चुनौती दे पाएगी?
गोपाल राय के मुताबिक आम आदमी पार्टी अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है.
उन्होंने बताया, "दिसंबर से ही हमने वहां अपनी तैयारी शुरू कर दी थी. बूथ लेवल पर काम कर रहे हैं. हमने पूरे राज्य में 6000 वालंटियर को ट्रेनिंग दी है. ये लोग पूरे राज्य में बूथ यात्रा निकाल रहे हैं. 26 मार्च तक हमारी कोशिश राज्य के 45 हज़ार बूथों पर अपनी लीडरशिप खड़ा करने की है."
गुजराती नव समाचार के संपादक और राज्य के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमठ बताते हैं, "आम आदमी पार्टी का राज्य में संगठन नहीं है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का मज़बूत संगठन है. ऐसे में देखना होगा कि आम आदमी पार्टी किस तरह से अपना संगठन बनाती है."
आम आदमी पार्टी के मुताबिक गुजरात का आम आदमी अब बदलाव चाहता है और पार्टी को लोगों का समर्थन भी मिल रहा है.
2017 के अंत में चुनाव
गोपाल राय के मुताबिक, "गुजरात का दलित जब अपनी बात उठाता है तो उना कांड होता है, जब पाटीदार लोग अपनी बात उठाते हैं तो उनके आंदोलन पर गोलियां चलाई जाती हैं. आम जनता ये सब देख रही है."
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उधर, भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में आम आदमी पार्टी की चुनौती को देखते हुए 11 फरवरी से राज्य में अपना चुनावी अभियान शुरू कर चुकी है. राज्य में पार्टी ने तमाम संगठनों के नेताओं को लोगों तक पहुंचने का निर्देश दिया गया है.
बीजेपी के राज्य प्रवक्ता भरत पांड्या ने बीबीसी से बताया, "11 फरवरी को दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर हमारे कार्यकर्ताओं ने राज्य के करीब 47 हज़ार बूथों में दिन भर का कार्यक्रम कर के लोगों से संवाद करने का काम किया है. "
बीजेपी भी तैयारी में जुटी
पिछले सप्ताह राज्य के पार्टी अध्यक्ष जीतू वाघाणी के नेतृत्व में बीजेपी ने आदिवासी विकास यात्रा भी निकाली है, जो राज्य के 15 जिलों से होते हुए 18 फरवरी को ख़त्म होने वाली है. बनासकांठा के अंबाजी में इसके समापन कार्यक्रम में पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के आने वाले दिनों में गुजरात के दौरों की संख्या बढ़ने के बारे में भी कयास लगाए जा रहे हैं. जाहिर है गुजरात का चुनाव भी पार्टी नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर ही लड़ना चाहेगी.
इस बारे में भरत पांड्या कहते हैं, "प्रधानमंत्री और अमित भाई, दोनों गुजरात से हैं. ख़ास कार्यक्रम नहीं बनाते हैं, फिर भी उनका आना हो जाता है. ढाई साल में प्रधानमंत्री नौ बार आ चुके हैं. अमित भाई तो गुजरात विधानसभा के सदस्य भी हैं, तो उनका आना तो होता ही रहता है."
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18 फरवरी को अमित शाह के कार्यक्रम में उत्तर गुजरात के छह ज़िलों के सभी बूथों के कार्यकर्ता का महासम्मेलन भी बुलाया गया है. ज़ाहिर है भारतीय जनता पार्टी भी अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं रखना चाहती.
मोदी बनाम केजरीवाल
वहीं दूसरी आम आदमी पार्टी के 'मिशन गुजरात' का मुख्य चेहरा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ही होंगे. फिलहाल बेंगलुरु में स्वास्थ्य लाभ कर रहे केजरीवाल जल्दी ही गुजरात में चुनाव प्रचार शुरू करेंगे.
अजय उमठ के मुताबिक, "गुजरात में आम आदमी पार्टी किसे अपना चेहरा बनाती है, इस पर काफ़ी कुछ निर्भर होने वाला है. अगर पार्टी से दमदार चेहरे जुड़ते हैं तो उसकी स्थिति आने वाले दिनों में बेहतर हो सकती है."
इसके बारे में गोपाल राय कहते हैं, "केजरीवाल पार्टी का मुख्य चेहरा हैं. वे तो रहेंगे ही, लेकिन पार्टी इस लड़ाई में सेंट्रल लीडरशिप के तमाम नेताओं को लगाने जा रही है. नेशनल वालंटियर को भी बारी-बारी से गुजरात भेजा जा रहा है."
गुजरात में नवंबर-दिसंबर, 2017 में चुनाव हो सकते हैं. इस लिहाज से देखें तो आम आदमी पार्टी अपने संगठन और संसाधन का इस्तेमाल अगले दस महीनों तक गुजरात पर करने जा रही है लेकिन उसके लिए गुजरात की चुनौती को पार पाना आसान नहीं होगा.
ये चुनौती कितनी अहम है, इसका अंदाज़ा भरत पांड्या के इस बयान से होता है. "गुजरात में हमेशा दो पार्टी सिस्टम रहा है. तीसरी कोई पार्टी कामयाब नहीं हुई है. आम आदमी पार्टी की नौटंकी का गुजरात के लोगों पर असर नहीं है. लोकसभा में उन्होंने सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, सबकी जमानत जब्त हुई थी. उपचुनाव में भी यही हाल रहा था."
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अजय उमट के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी बीते दो दशक से ज़्यादा समय से शासन में है तो एंटी इनकम्बैंसी तो है और यह शहरी क्षेत्र में मुखर रूप में दिखता भी है और यही आम आदमी पार्टी के लिए उम्मीद की वजह हो सकती है.
इसके अलावा दलितों पर अत्याचार और पाटीदारों के आंदोलन को भी आम आदमी पार्टी अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगी.
वैसे आम आदमी पार्टी का ध्यान पंजाब और गोवा के चुनाव परिणामों पर भी लगा है. 11 मार्च को इन राज्यों के नतीजे आने वाले हैं. पार्टी को दोनों ही राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.
दूसरे राज्यों में मुश्किलें
लेकिन गुजरात की तैयारियों पर अरविंद केजरीवाल कोई कमी नहीं रखना चाहते लिहाजा उन्होंने बीमार होने के बाद भी, बेंगलुरु रवाना होने से पहले करीब तीन घंटे की अहम बैठक कर मिशन गुजरात की योजनाओं को अंतिम रूप दिया है.
बहरहाल, आम आदमी पार्टी की आलोचना इस बात की लिए भी होती रही है कि पार्टी उत्तर भारत के राज्यों, मसलन बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में क्यों नहीं उतरने का साहस दिखा पाई है?
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इसके जवाब में गोपाल राय कहते हैं, "पहली बार जब दिल्ली में हमारी सरकार बनी तो हमने पूरे देश में लोकसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार खड़े किए. संगठन और संसाधन के अभाव के चलते हमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. हम लोगों ने रणनीति बनाई कि स्टेप बाय स्टेप आगे बढ़ेंगे."
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