'मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है' आईवीएफ़ क्लिनिकों ने ब्रिटिश परिवारों को दिए ग़लत स्पर्म

    • Author, एना कॉलिन्सन
    • पदनाम, फ़ाइल ऑन इन्वेस्टिगेट्स
    • Author, जो एडनिट
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ इन्वेस्टिगेशंस
  • पढ़ने का समय: 12 मिनट

लॉरा कहती हैं, "जेम्स के जन्म के थोड़ी ही देर बाद मुझे लगने लगा था कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है."

लॉरा और उनकी पार्टनर बेथ के दो बच्चे हैं, जेम्स और उनकी बड़ी बेटी केट. दोनों का जन्म उत्तरी साइप्रस की एक क्लिनिक में आईवीएफ़ इलाज के ज़रिए हुआ था.

दोनों महिलाओं ने अपने-अपने अंडाणुओं का इस्तेमाल किया और एक ही अनजान, स्वस्थ स्पर्म डोनर को बहुत सोच समझकर चुना. उन्होंने उस क्लिनिक को, जिसने उनके लिए स्पर्म मंगवाया था, साफ़ तौर पर बताया था कि दोनों बच्चों के लिए एक ही डोनर इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि उनके बच्चे जैविक रूप से आपस में जुड़े हों.

लेकिन जब जेम्स का जन्म हुआ, तो दोनों ने देखा कि उसकी 'ख़ूबसूरत' भूरी आंखें उसकी जैविक मां बेथ और उस स्पर्म डोनर से बिल्कुल अलग थीं, जिसे उन्होंने चुना था.

इससे उनके मन में शक पैदा हो गया: "क्या हमारे क्लिनिक से कोई ग़लती हो गई?"

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क़रीब एक दशक तक चिंता में रहने के बाद, बेथ और लॉरा ने तय किया कि उनके बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाना चाहिए.

नतीजों से पता चला कि दोनों में से कोई भी बच्चा उस स्पर्म डोनर से जुड़ा नहीं था, जिसे उन्होंने चुना था. इतना ही नहीं, सबूतों से यह भी पता चला कि दोनों बच्चे आपस में भी जैविक रूप से जुड़े नहीं हैं.

बेथ कहती हैं, "सबसे डरावनी बात यह एहसास था कि कहीं बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है, और इसका बच्चों की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा."

ढीले क़ानून और बड़े दावों का जाल

बीबीसी न्यूज़ ने ऐसे कुल सात बच्चों के परिवारों से बात की है, जिन्हें लगता है कि आईवीएफ़ इलाज के दौरान ग़लत स्पर्म या एग डोनर इस्तेमाल किया गया. इनमें से ज़्यादातर परिवारों ने व्यावसायिक डीएनए टेस्ट कराए हैं, जिनसे उनकी आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं.

ये सभी मामले उत्तरी साइप्रस के क्लिनिकों से जुड़े हैं- यह एक ऐसा इलाक़ा है जहां यूरोपीय संघ के क़ानून लागू नहीं होते और जिसे क़ानूनी तौर पर सिर्फ़ तुर्की ही मान्यता देता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तरी साइप्रस विदेश में प्रजनन ट्रीटमेंट कराने वाले ब्रिटिश लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक बन गया है. यहां क्लिनिकों पर लागू होने वाले नियम कानून ढीले हैं और वे कम कीमत और बड़े पैमाने पर सफ़लता का वादा करते हैं.

ये क्लिनिक बहुत बड़ी संख्या में दुनिया भर से आए अनजान एग और स्पर्म डोनर्स के उनसे जुड़े होने का दावा करते हैं. इसकी वजह से वे ख़ासतौर पर प्रजनन से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों, एलजीबीटी समुदाय के लोगों और अकेले वयस्कों के लिए आकर्षक बन जाते हैं- ख़ासकर तब, जबकि उन्हें अपने देश में इतने विकल्प नहीं मिल पाते.

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं, जिनमें उम्मीदें लगाए बैठे माता-पिता अपने सकारात्मक अनुभव साझा करते दिखते हैं.

उत्तरी साइप्रस के क्लिनिक ऐसे उपचार भी करते हैं जो ब्रिटेन में अवैध हैं. मिसाल की तौर पर गैर चिकित्सकीय कारणों से बच्चे के लिंग का चयन. इस इलाके का स्वास्थ्य मंत्रालय प्रजनन क्लिनिकों की निगरानी करता है, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद उसने बीबीसी की जांच के परिणामों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

'हमें लगा था कि हमने डेनमार्क से स्पर्म मंगवाया है'

इस जांच में शामिल सभी परिवारों का भरोसा जीतने में कई महीने लग गए. हमने बेथ, लॉरा, केट और जेम्स के साथ क़रीबी तौर पर काम किया ताकि यह तय किया जा सके कि वे अपनी कहानी साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

बेथ और लॉरा ने हमें बताया कि उन्होंने 2011 में परिवार शुरू करने का फ़ैसला किया था.

उन्होंने उत्तरी साइप्रस के डोगुस आईवीएफ़ सेंटर को चुना. उस समय वहां की पेशेंट कोऑर्डिनेटर जूली हॉडसन ने उन्हें बताया था कि यह क्लिनिक डेनमार्क में स्थित दुनिया के सबसे बड़ी स्पर्म बैंक, क्रायोस इंटरनेशनल, से फ़्रीज़ किया हुआ स्पर्म मंगवा सकता है.

उनका कहना है कि वे अनजान डोनरों की उस बड़ी रेंज से काफ़ी प्रभावित हुई थीं, जिनके बारे में कहा गया था कि उनकी 'व्यापक स्वास्थ्य जांच' और मनोवैज्ञानिक परीक्षण किए गए हैं.

दोनों महिलाओं को एक डोनर की प्रोफ़ाइल ख़ास तौर पर पसंद आई, जिसे 'फ़िन' कहा गया था. फ़िन एक डेनिश व्यक्ति थे, जिन्होंने ख़ुद को फिट और स्वस्थ बताया था, जो बहुत कम शराब पीते थे और उन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया था.

उन्होंने एक हाथ से लिखा नोट भी देखा था जिसमें फ़िन ने कहा था कि स्पर्म डोनेट करने के पीछे उसकी प्रेरणा 'दूसरों की ज़िंदगी में जीवन और खुशियां लाना' है.

बेथ और लॉरा को उम्मीद थी कि उनके पैदा होने वाले बच्चे जब बड़े हो रहे होंगे, तब डोनर की यह विस्तृत प्रोफ़ाइल उन्हें सुकून देगी.

बेथ कहती हैं, "हमें लगा कि यह बेहद ज़रूरी है कि हमारे बच्चों को पता हो कि उनका डोनर कौन था, क्योंकि वही तो उनका आधा हिस्सा है."

एक विस्तृत पारिवारिक विवरण से पता चलता था कि फ़िन और उसके डेनमार्क में रहने वाले रिश्तेदारों की शारीरिक बनावट भी इस ब्रिटिश जोड़े से मिलती जुलती थी- हल्की आंखें और भूरे बाल.

लॉरा याद करती हैं, "हमने अपनी पेशेंट कोऑर्डिनेटर जूली से पूछा कि फ़िन का स्पर्म ऑर्डर करने के लिए हमें क्या करना होगा. और उन्होंने कहा, 'डॉक्टर फ़िरदेव्स इसे आपके लिए ऑर्डर कर देंगी.' बस इतना ही."

दंपति का कहना है कि डोगुस में उनका आईवीएफ़ ट्रीटमेंट डॉक्टर फ़िरदेव्स उगुज़ टिप ने किया था. वे उन्हें और उनकी टीम को 'अच्छा और दोस्ताना' बताती हैं.

नौ महीने बाद, लॉरा ने उनके पहले बच्चे केट को जन्म दिया.

जब दंपति ने दूसरा बच्चा चाहा, तो वे उसी आईवीएफ़ टीम के पास दोबारा गए और पूछा कि क्या वे फिर से डोनर फ़िन का स्पर्म इस्तेमाल कर सकते हैं. हॉडसन ने ईमेल के ज़रिये पुष्टि की कि फ़िरदेव्स स्पर्म दोबारा मंगवा देंगी.

इस बार, बेथ ने जेम्स को जन्म दिया.

उत्तरी साइप्रस में इस दंपति के प्रजनन ट्रीटमेंट पर कुल मिलाकर करीब 16,000 पाउंड का खर्च आया. इसमें दवाओं, होटल और फ्लाइट पर हुआ ख़र्चा शामिल है.

इस खर्चे में फ़िन के स्पर्म के लिए दिए गए 2,000 पाउंड शामिल थे.

बेथ और लॉरा कहती हैं कि उन्होंने शुरू से ही अपने बच्चों से उस व्यक्ति के बारे में खुलकर बात की, जिसे वे डोनर मानती थीं. लॉरा कहती हैं, "दोनों ही ख़ुद को 'आधा डेनिश' बताते थे."

लेकिन जेम्स की गहरी आंखें, गहरे बाल और जैतूनी रंग की त्वचा देखकर उन्हें शक होने लगा कि उसका डोनर शायद फ़िन नहीं था. और कई साल तक सोच विचार करने के बाद, बेथ और लॉरा ने तय किया कि दोनों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाए.

नतीजों से पता चला कि दोनों में से किसी भी बच्चे का जन्म फ़िन के स्पर्म से नहीं हुआ था. इससे यह भी संकेत मिला कि दोनों बच्चे अलग-अलग स्पर्म डोनरों से पैदा हुए थे और वे आपस में जैविक रूप से भाई बहन भी नहीं थे.

इन टेस्ट नतीजों ने उन्हें 'बहुत ग़ुस्सा' आया और ढेर सारे ऐसे सवाल उठे जिनके जवाब नहीं थे... डोनर कौन थे, और क्या उनकी सेहत को लेकर कोई जांच की गई थी या नहीं?

बेथ कहती हैं, "हम उस स्थिति से आ गए, जहां हमारे पास डोनर फ़िन की एक अच्छी सी प्रोफ़ाइल थी और हमें लगता था कि हम परिवार और स्वास्थ्य का इतिहास जानते हैं- और अब हमारे पास कुछ भी नहीं था."

बेथ और लॉरा ने फ़िरदेव्स और हॉडसन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों में से किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया.

बीबीसी ने यह पता लगाने में कई महीने लगाए कि बेथ और लॉरा के साथ आखिर हुआ क्या था.

अपनी जांच के दौरान, हमें दो और ब्रिटिश परिवार मिले, जिनका इलाज फ़िरदेव्स ने किया था और उन्हें भी शक था कि उनके आईवीएफ़ इलाज के दौरान ग़लत डोनर इस्तेमाल किए गए थे.

उन परिवारों ने भी व्यावसायिक डीएनए टेस्ट कराए थे, जिनसे संकेत मिलता है कि उनके शक सही थे.

बेथ और लॉरा यह सवाल उठा रही हैं कि क्या उनकी क्लिनिक ने वास्तव में डोनर फ़िन का स्पर्म मंगवाया भी था या नहीं.

जब हमने फ़िरदेव्स से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि डोगुस में स्पर्म ऑर्डर करने की ज़िम्मेदारी उनकी नहीं थी और डोनर फ़िन से जुड़ी किसी भी मांग की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी.

उन्होंने बेथ और लॉरा के व्यावसायिक डीएनए टेस्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि यह 'पूरी निश्चितता' के साथ नहीं कहा जा सकता कि ग़लत डोनर का इस्तेमाल हुआ था.

फ़िरदेव्स ने बीबीसी को यह भी बताया कि 2011 से 2014 के बीच, जब बेथ और लॉरा वहां मरीज़ थीं, उन्होंने 'आईवीएफ़ इलाज किया ही नहीं', जबकि उसी अवधि में डोगुस की अपनी वेबसाइट पर उनके द्वारा किए जाने वाले प्रोसीज़र्स का विस्तृत विवरण मौजूद था.

फ़िरदेव्स ने बीबीसी को यह भी बताया कि जिस दौरान (2011 से 2014 के बीच) वेथ और लॉरा उनके क्लिनिक के संपर्क में थी तब उन्होंने 'आईवीएफ़ इलाज किया ही नहीं.'

डोगुस क्लिनिक ने भी हमारी टिप्पणी मांगने की अपील पर कोई जवाब नहीं दिया.

2015 तक फ़िरदेव्स और हॉडसन दोनों डोगुस छोड़ चुकी थीं और उत्तरी साइप्रस के ही एक दूसरे क्लिनिक में साथ काम कर रही थीं.

हॉडसन ने बीबीसी को नहीं बताया कि उन्होंने स्पर्म का ऑर्डर फ़िरदेव्स तक पहुंचाया था या नहीं.

बेथ, लॉरा और बच्चों ने अब और भी डीएनए टेस्ट कराए हैं, जो मान्यता प्राप्त हैं और ब्रिटेन की अदालतों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इनसे पुष्टि हुई है कि जेम्स और केट आपस में जैविक रूप से जुड़े नहीं हैं और दोनों का जन्म एक स्पर्म डोनर से नहीं हुआ है.

एक प्रमुख फ़ॉरेंसिक जेनेटिक्स विशेषज्ञ, जिसने परिवार के सभी टेस्ट का विश्लेषण किया है, ने हमें बताया कि यह संभावना कम है कि दोनों में से कोई भी बच्चा जैविक रूप से डोनर फ़िन से जुड़ा हो.

हमने डेनमार्क के स्पर्म बैंक क्रायोस इंटरनेशनल से भी बात की. बेथ, लॉरा और हमारी जांच में शामिल एक अन्य परिवार का मानना था कि स्पर्म इसी बैंक से मंगवाया गया था.

कंपनी के सीईओ ओले शू कहते हैं, "हमारे पास सुरक्षा की कई प्रक्रियाएं हैं, लेकिन कभी भी 100 फ़ीसदी की गारंटी नहीं दी जा सकती. आख़िरकार यह इंसानों का काम है."

हालांकि, वे यह भी जोड़ते हैं कि क्रायोस के 45 साल के इतिहास में ऐसी किसी ग़लती का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

यूरोप भर के कई प्रजनन विशेषज्ञों ने बीबीसी को बताया कि आईवीएफ़ प्रक्रिया के दौरान ग़लती से ग़लत डोनर का इस्तेमाल हो जाना बहुत ही दुर्लभ होता है.

हालांकि, हमारे विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह की इतनी बड़ी ग़लती एक ही मेडिकल टीम के साथ एक से ज़्यादा बार होती है, तो यह 'लापरवाही' या यहां तक कि 'धोखाधड़ी' की ओर भी इशारा कर सकती है.

नतीजों को देखने के बाद ब्रिटिश फ़र्टिलिटी सोसाइटी के डॉक्टर आइपोक्रेटिस सारिस कहते हैं, "यह मरीज़ों के लिए बहुत भयावह स्थिति है. ब्रिटेन में मैंने ऐसा कोई मामला कभी नहीं सुना. किसी भी आईवीएफ़ यूनिट के लिए सबसे बड़ा डर यही होता है कि कहीं एग, स्पर्म या भ्रूण गड़बड़ा न जाएं."

उत्तरी साइप्रस के अपने प्रजनन कानून हैं, लेकिन ब्रिटेन के उलट वहां कोई स्वतंत्र प्रजनन नियामक नहीं है, जो क्लिनिकों की निगरानी करे, मानकों को लागू करे और ज़रूरत पड़ने पर उनके लाइसेंस रद्द कर सके.

वहीं रहने वाली वकील और सामाजिक कार्यकर्ता मीन अतली कहती हैं, "जो क्लिनिक क़ानून का पालन करते हैं, वे इसलिए करते हैं क्योंकि उनके मालिकों के अन्तःकरण उनसे ऐसा करवाते हैं. सरकार की ओर से उन पर इसके लिए दबाव नहीं डाला जाता."

नियमन की प्रक्रिया महंगी होती है, और यही वजह है कि ब्रिटेन जैसे देशों में इलाज भी ज़्यादा महंगा हो जाता है. ब्रिटिश फ़र्टिलिटी सोसाइटी के सारिस कहते हैं कि यह एक बड़ा कारण हो सकता है, जिसकी वजह से उत्तरी साइप्रस प्रजनन ट्रीटमेंट के लिए इतनी लोकप्रिय जगह बन गया है.

हमने उन लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता सुनी, जिन्हें यह पता चले कि उनके डोनर वही नहीं थे, जैसा वे समझते रहे.

यूके की चैरिटी डोनर कंसेप्शन नेटवर्क की नीना बार्न्सले कहती हैं कि ऐसी जानकारी का उन पर 'गहरा असर' पड़ सकता है.

'मैं अपने बच्चे से झूठ नहीं बोलना चाहती'

बीबीसी ने दो और ब्रिटिश परिवारों से भी बात की है, जिनका इलाज बेथ और लॉरा के मुक़ाबले हाल के वर्षों में फ़िरदेव्स ने किया था, और उन्हें भी लगता है कि उन्हें ग़लत डोनर दिए गए.

वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते, लेकिन वे मिरेकल आईवीएफ़ सेंटर के मरीज़ थे, जिसे फ़िरदेव्स ने 2019 में स्थापित किया था.

दोनों परिवारों को अपने बच्चों के लिए एग डोनर की ज़रूरत थी, और उन्हें शक हुआ कि जो एग्स उन्हें दिए गए थे, वे नहीं थे जिन्हें उन्होंने चुना था. इसके बाद कराए गए डीएनए टेस्ट से उनकी आशंकाएं सही साबित होती दिख रही हैं.

हम जिस महिला को कैथरीन कहकर बुला रहे हैं, वह कहती हैं, "मैं नहीं चाहती कि लोग यह समझें कि मुझे ऐसा बच्चा चाहिए जो दिखने में बिल्कुल मेरे जैसा हो, मुद्दा वह नहीं है."

"मैं अपने बच्चे से यह झूठ नहीं बोलना चाहती कि वे कहां से आए हैं."

जब हमने फ़िरदेव्स को बताया कि इन दोनों परिवारों को लगा कि उन्हें गुमराह किया गया, तो उन्होंने कहा कि एग डोनरों का चुनाव पूरी तरह से मिरेकल आईवीएफ़ सेंटर ने किया था.

उन्होंने यह भी कहा कि उनका क्लिनिक मरीज़ों को ऐसे एग डोनर प्रोफ़ाइल नहीं देता, जिनमें किसी 'ख़ास व्यक्ति' का विवरण हो, और न ही वह किसी डोनर की नस्लीय पृष्ठभूमि की कोई गारंटी देती है.

फ़िरदेव्स के मुताबिक, यह सारी जानकारी सहमति फ़ॉर्म में साफ़-साफ़ दर्ज थी, जिस पर इलाज से पहले सभी मरीज़ों ने हस्ताक्षर किए थे, और यह सब 'साफ़ तौर पर बताया गया था'.

हालांकि, जिन दो परिवारों से हमने बात की, उनका कहना है कि उन्हें लगा था कि उन्होंने ख़ुद एक ख़ास डोनर चुना है, और यह बात उन्हें कभी स्पष्ट नहीं की गई थी कि अंतिम फैसला क्लिनिक ही करेगा.

बीबीसी ने वे 'एग डोनर प्रोफ़ाइल' भी देखे हैं, जो मिरेकल आईवीएफ़ सेंटर ने कैथरीन और एक अन्य परिवार को दिए थे.

कैथरीन कहती हैं कि वह अपने बच्चे से बिना किसी शर्त के प्यार करती हैं, लेकिन अगर उन्हें पहले से पूरी जानकारी होती कि उनका चुना हुआ डोनर शायद इस्तेमाल ही न किया जाए, तो वह आईवीएफ़ इलाज नहीं करवातीं.

फ़िरदेव्स ने हमें बताया कि मिरेकल आईवीएफ़ में उनके द्वारा किए गए सभी इलाज क़ानून के मुताबिक थे, और मरीज़ों की गोपनीयता की वजह से वह हमारे सभी सवालों का जवाब नहीं दे सकतीं.

'हम अब भी एक परिवार हैं'

बेथ और लॉरा को अपने बच्चों से यह बताए हुए अब दो साल हो चुके हैं कि संभव है फ़िन उनका डोनर न रहा हो.

जेम्स अभी भी इस सच्चाई को समझने और स्वीकार करने की कोशिश कर रहा है.

वह कहते हैं, "आप किसी को कुछ बताकर अचानक यह नहीं कह सकते कि, ऐसा नहीं है. यह ग़लत है. पहचान सबसे अहम चीज़ होती है. यही तय करती है कि आप एक इंसान के तौर पर कौन हैं."

बच्चों को अब पता है कि वे जैविक रूप से आपस में जुड़े नहीं हैं, लेकिन इससे उनके बीच का प्यार कम नहीं हुआ है.

केट कहती हैं, "हम सब साथ बड़े हुए हैं और हमारी मांओं ने ही हमें पाला है. खून का रिश्ता न भी हो, फिर भी हम एक परिवार हैं."

बेथ और लॉरा कहती हैं, "हमारे दो शानदार बच्चे हैं. आख़िरकार, सब ठीक हो जाएगा."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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