You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
'नए राष्ट्रपति' की ओर से युद्धविराम के ट्रंप के दावे पर आया ईरान का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि 'ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति' ने युद्धविराम के लिए कहा है. वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप का दावा "झूठा और बेबुनियाद" है.
ईरानी सरकारी टीवी के मुताबिक़, यह बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने दिया है.
ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में युद्धविराम की अपील का दावा किया था. हालांकि ट्रंप ने उस शीर्ष अधिकारी का नाम नहीं लिखा था.
उन्होंने उस शख़्स को "अपने पूर्व नेताओं की तुलना में कम कट्टर और ज़्यादा समझदार" बताया है.
इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, "हम इस पर तभी विचार करेंगे जब स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ खुला, सुरक्षित और साफ़ होगा. तब तक हम ईरान को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं या जैसा लोग कहते हैं, उसे पाषाण युग में वापस भेज रहे हैं."
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
इसी बीच ईरान की राजधानी तेहरान और इसराइल के कई हिस्सों में धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं.
बीबीसी फ़ारसी की सीनियर रिपोर्टरस ग़ोन्चेह हबीबीआज़ाद ने बताया है कि उन्होंने तेहरान के पश्चिम में दो सूत्रों ने भारी गोलाबारी के बारे में बताया है.
ईरान के न्यूज़ मीडिया ने भी नए धमाकों की जानकारी दी है.
दूसरी ओर यरूशलम से बीबीसी संवाददाता जोएल गुंटर ने बताया है कि यरूशलम और तेल अवीव समेत इसराइल के कई हिस्सों में बड़े धमाकों और सायरन की आवाज़ें सुनई गई हैं.
ट्रंप का इशारा किसकी तरफ़ था?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि "ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति" ने उनसे युद्धविराम की मांग की है.
यह बिलकुल साफ़ नहीं है कि वह किसकी बात कर रहे हैं.
जब से अमेरिका और इसराइल ने 28 फ़रवरी को ईरान पर हवाई हमले शुरू किए हैं, तब से कई वरिष्ठ ईरानी नेता मारे जा चुके हैं, जिनमें देश के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई भी शामिल हैं.
उनकी जगह 8 मार्च को उनके बेटे मोजतबा ख़ामेनेई ने ली. उन्होंने तब से कई लिखित बयान जारी किए हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. खुद ट्रंप ने भी कहा है कि उन्हें नहीं पता कि वह ज़िंदा हैं या नहीं.
ईरान में कोई नया राष्ट्रपति नहीं है. मसूद पेज़ेश्कियान जो 2024 में चुने गए थे. ईरानी मीडिया के मुताबिक़ कल ही वो सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं.
उन्होंने मंगलवार को ही कहा था कि युद्ध ख़त्म करने के लिए ईरान के पास "ज़रूरी इच्छाशक्ति" है.
ईरान ने ट्रंप के इस दावे को ख़ारिज किया है कि वह युद्ध ख़त्म करने के लिए बातचीत कर रहा है. उसने कहा है कि अमेरिका के साथ सिर्फ़ कुछ संदेश बिचौलियों के ज़रिए साझा किए गए हैं.
आईआरजीसी ने दी चुनौती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को कह रही हैं. उन्होंने इसके लिए सैन्य बल के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया है.
वहीं ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट "इस देश के दुश्मनों" के लिए बंद ही रहेगा.
सरकारी टीवी पर आईआरजीसी ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट उसकी नौसेना के "मज़बूत और पूरी तरह नियंत्रण" में है.
वहीं ब्रितानी विदेश मंत्री येवेट कूपर गुरुवार को क़रीब 35 देशों की एक वर्चुअल बैठक की मेज़बानी करेंगी, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए व्यवहारिक कूटनीतिक उपायों पर चर्चा की जाएगी.
ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद से ड्रोन, मिसाइल और संभवतः बारूदी सुरंगों जैसी धमकियों के ज़रिए इस स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है. इसके कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ गई हैं.
इससे पहले डाउनिंग स्ट्रीट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि बढ़ती महंगाई से निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा तनाव कम करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खुलवाना है.
हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले महीने 'आसान' नहीं होंगे.
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि मध्य पूर्व में युद्ध दो या तीन हफ़्ते में ही ख़त्म हो जाएगा.
इसके अलावा ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा था कि ईरान में "युद्ध ख़त्म करने की ज़रूरी इच्छाशक्ति" है.
ईरान और अमेरिका की ओर से आए इन बयानों के बाद तेल की क़ीमतें गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल (75 पाउंड) से नीचे आ गईं.
इस बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया "एक बहुत बड़ी बाधा" की ओर बढ़ रही है. और इस वजह से अप्रैल में यूरोप में जेट ईंधन और डीज़ल की भारी कमी होने की आशंका है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.