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सटीक बैठा पोंटिंग का दांव, कॉनॉली ने डेब्यू मैच में ही पंजाब किंग्स को जिताया
इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल 2026 में अभी चार ही मुक़ाबले हुए हैं और इन सबमें एक ख़ास पैटर्न देखा जा रहा है-जो टीम लक्ष्य का पीछा कर रही है, वही जीत रही है.
मंगलवार को चंडीगढ़ के पास मुल्लांपुर में भी वही हुआ-पंजाब किंग्स ने गुजरात टाइटंस को तीन विकेट से हरा दिया.
शुभमन गिल की कप्तानी में खेल रही गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट पर 162 रन बनाए.
बैटिंग के लिए अच्छी लग रही इस पिच पर पंजाब भी अच्छी बल्लेबाज़ी कर रही थी, लेकिन 100 रन पार करने के बाद एकाएक टीम लड़खड़ाने लगी. ऐसे में टीम को लक्ष्य तक पहुँचाने का जिम्मा उठाया उस क्रिकेटर ने जिस पर टीम के कोच रिकी पोंटिंग ने दांव लगाया था.
पूरा नाम है कूपर पैट्रिक लियोनार्ड कॉनॉली. ख़ास बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया के इस क्रिकेटर के लिए आईपीएल का ये डेब्यू मुक़ाबला था.
हालांकि मैच से पहले पोंटिंग ने कहा भी था, "मैं समझता हूं कि कूपर कॉनॉली जैसा खिलाड़ी अगर टीम में है तो यह शीर्ष और मध्य क्रम में फ्लैक्सिबिलिटी देता है और वह बाएं हाथ का क्रिकेटर भी है."
पोंटिंग ने ही कॉनॉली के टैलेंट को पहचाना और डेब्यू मैच के लिए उन्हें नंबर 3 पर बैटिंग के लिए भेजा गया.
ये एक बोल्ड डिसीज़न था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के लिए वो आम तौर पर नंबर सात पर बल्लेबाज़ी के लिए आते हैं. हाल ही में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने नंबर 7 पर ही बैटिंग की थी.
लड़खड़ाती पारी को संभाला
जीत के लिए 163 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स का स्कोर एक समय 12 ओवर में 2 विकेट के नुक़सान पर 110 रन था.
यानी उसे 8 ओवर में जीत के लिए सिर्फ़ 53 रन चाहिए था और उसके हाथ में 8 विकेट थे.
तब क्रीज़ पर कॉनॉली के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर थे. लेकिन 13वें ओवर की पहली ही गेंद पर अय्यर को प्रसिद्ध कृष्णा ने वॉशिंगटन सुंदर के हाथों कैच करा दिया. अय्यर ने 11 गेंदों पर 18 रन बनाए.
उसके बाद तो विकेट बहुत जल्दी-जल्दी गिरे और एक समय पंजाब किंग्स का स्कोर 6 विकेट पर 118 रन हो गया. उस पर हार का ख़तरा मंडराने लगा. लेकिन कॉनॉली जमे रहे.
उन्होंने एक छोर संभाले भी रखा और विकेटों के गिरने का असर रनरेट पर भी नहीं होने दिया और अंत में 44 गेंदों पर 72 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी. उन्होंने पांच छक्के और पांच चौके लगाए.
प्लेयर ऑफ़ द मैच अवॉर्ड मिलने के बाद कॉनॉली ने कहा, "मैं वर्ल्ड क्लास क्रिकेटरों के साथ खेलने के मौक़े को एन्जॉय करना चाहता था. लेकिन अपनी टीम की जीत में योगदान देकर तो मैं बहुत ख़ुश हूं. आईपीएल शुरू होने से पहले मैंने कुछ वक़्त परिवार और दोस्तों के साथ बिताया ताकि अपने आपको रीसेट कर सकूं.
रिकी पॉन्टिंग के बारे में उन्होंने कहा, "उनके साथ काम करना बहुत मज़ेदार है. हम बहुत रिलैक्स्ड हैं."
कौन हैं कूपर कॉनॉली
22 साल के कूपर कॉनॉली के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर सब कुछ काफ़ी तेज़ी से हुआ.
सितंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच सिर्फ़ पांच महीनों में उन्होंने तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी20 में इंटरनेशनल डेब्यू कर लिया.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ गॉल में जब उन्हें अपने करियर का पहला टेस्ट खेलना का मौक़ा मिला तो यह उनका सिर्फ़ चौथा फर्स्ट क्लास मैच था.
कॉनॉली बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं और बाएं हाथ के स्पिनर भी. ऑस्ट्रेलिया में उन्हें बहुत पहले ही उभरते और बेहद प्रतिभाशाली क्रिकेटरों में शुमार किया जाने लगा था. साल 2022 में अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी की थी.
हालांकि कॉनॉली को असली पहचान मिली 2022-23 में बिग बैश लीग यानी बीबीएल फ़ाइनल में. कॉनॉली ने तब अपने सिर्फ़ दूसरे टी-20 मैच में बिना दबाव में आए शानदार प्रदर्शन कर अपनी टीम पर्थ स्कॉर्चर्स को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई.
बड़े मौकों पर अच्छा प्रदर्शन की कॉनली की क्षमता 2023-24 में शेफ़ील्ड शील्ड फ़ाइनल में भी दिखी थी. कॉनॉली तब अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच ही खेल रहे थे और उन्होंने 90 रनों की शानदार और असरदार पारी खेली थी.
बहुत अधिक अनुभव नहीं होने के बावजूद चयनकर्ताओं ने कॉनॉली पर भरोसा जताया और उन्हें 2024 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के वनडे और टी-20 इंटरनेशनल दौरे के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में चुना गया.
तब उन्होंने दोनों ही फॉर्मेट में डेब्यू किया था. ब्रिस्टल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने पहले वनडे में उन्हें बैटिंग का मौका नहीं मिला और गेंदबाज़ी में भी वो ख़ास असर नहीं छोड़ पाए थे. उन्होंने 4 ओवरों में 31 रन दिए थे और उन्हें कोई सफलता भी नहीं मिली थी.
इसके बाद 2024-25 सीजन की शुरुआत में वो इंडिया-ए के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया-ए की तरफ़ से खेले थे.
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ऑप्टस स्टेडियम में खेले गए एक वनडे मैच के दौरान उनके अंगूठे में चोट लग गई थी, जिसके बाद वह टी-20 सिरीज़ से बाहर हो गए थे, लेकिन वापसी के बाद उन्होंने बीबीएल में शानदार प्रदर्शन किया और नंबर 3 और 4 पर बल्लेबाज़ी करते हुए 50 से ज़्यादा की औसत से रन बनाए वो भी शानदार स्ट्राइक रेट के साथ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.