ईरान युद्ध कब ख़त्म होगा, ट्रंप बार-बार क्यों बदल रहे हैं समयसीमा?

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इमेज कैप्शन, इराक़ के इर्बिल में एक संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद उठता धुआं. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमलों के साथ शुरू हुई जंग मध्य पूर्व के कई देशों में फैल गई है
    • Author, एना फेगुई
    • पदनाम, वॉशिंगटन
    • Author, डेनियल बुश
    • पदनाम, वॉशिंगटन संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

व्हाइट हाउस में एक मंच से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल युद्ध की अवधि को लेकर अपना ताज़ा आकलन पेश किया.

युद्ध शुरू करने के बाद अपने पहले टेलीविजन संबोधन में बुधवार रात ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में अपने सैन्य लक्ष्यों को 'जल्द...बहुत जल्द' हासिल करने की राह पर है.

ट्रंप ने अमेरिकियों को याद दिलाया कि यह संघर्ष अब तक दूसरे विश्व युद्ध और वियतनाम युद्ध जैसे लंबे युद्धों से छोटा रहा है, और फिर उन्होंने एक एक नई समय सीमा दी.

उन्होंने कहा, "अगले दो से तीन हफ्तों में हम उन्हें पाषाण युग में पहुंचा देंगे, जहां उन्हें होना चाहिए."

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यह पहली बार नहीं था जब ट्रंप या उनके प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों ने किसी डेडलाइन का ज़िक्र किया हो.

28 फरवरी को जब ट्रंप ने इस अभियान की शुरुआत की घोषणा की, तब उन्होंने कहा था कि यह "हमारे लक्ष्य हासिल होने तक" जारी रहेगा.

तब से राष्ट्रपति कभी कहते रहे हैं कि अमेरिका पहले ही युद्ध जीत चुका है, और कभी यह कि 'सैन्य अभियान कुछ हफ्तों तक जारी रहेगा'.

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'ट्रंप प्रशासन का तरीका अलग है'

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप कभी कहते रहे हैं कि अमेरिका पहले ही युद्ध जीत चुका है, और कभी यह कि 'सैन्य अभियान कुछ हफ्तों तक जारी रहेगा'

बीबीसी से बात करने वाले विश्लेषकों ने कहा कि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए यह सामान्य है कि वह जनता का समर्थन पाने के लिए युद्ध की एक समयसीमा बताए, और बाद में उसमें बदलाव करे.

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हालांकि एक विशेषज्ञ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का तरीका अलग रहा है.

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया कि इस तरह की बदलती समय सीमा से रणनीतिक फायदा हो सकता है.

बुधवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, "अपने दुश्मन को यह मत बताइए कि आप क्या करने वाले हैं या नहीं करने वाले हैं, और यह भी मत बताइए कि आप कब रुकेंगे."

हेगसेथ ने कहा, "(ट्रंप) ने चार से छह हफ्ते, छह से आठ हफ्ते, तीन हफ्ते कहा है. यह कोई भी संख्या हो सकती है, लेकिन हम कभी सटीक समय नहीं बताएंगे, क्योंकि हमारा लक्ष्य उन उद्देश्यों को पूरा करना है और हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं."

जैसे-जैसे संघर्ष जारी रहा, ट्रंप प्रशासन के अन्य लोगों ने भी युद्ध की अवधि को लेकर अपने अनुमान दिए, जो कई बार राष्ट्रपति के बयान से अलग लगे.

आठ मार्च को हेगसेथ ने सीबीएस न्यूज़ के कार्यक्रम '60 मिनट्स' में कहा कि अब तक जो कार्रवाई हुई है, वह 'सिर्फ शुरुआत' है. 24 घंटे से भी कम समय बाद रक्षा विभाग ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमने अभी लड़ाई शुरू ही की है.'

लेकिन उसी दिन फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान में अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में 'काफ़ी प्रगति' कर ली है. उन्होंने जोड़ा, "कुछ लोग कह सकते हैं कि यह लगभग पूरा हो चुका है."

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस पर अपनी टिप्पणी दी. उन्होंने मंगलवार को फॉक्स न्यूज़ से कहा, "हमें अंत नज़र आ रहा है. यह आज नहीं, कल नहीं, लेकिन यह आ रहा है."

इस तरह के सवालों का सामना करने वाला ट्रंप प्रशासन पहला अमेरिकी प्रशासन नहीं है.

कभी-कभी राष्ट्रपति समयसीमा को अस्पष्ट रखते हैं और कभी अधिक स्पष्ट बताते हैं. लेकिन बहुत कम युद्ध ऐसे रहे हैं जो राष्ट्रपति के अनुमान के अनुसार खत्म हुए हों.

'सभी राष्ट्रपति डेडलाइन को कम आंकते हैं'

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इमेज कैप्शन, 'राष्ट्रपति अक्सर युद्ध के दौरान जनता को डेडलाइन के बारे में बताते हैं और लगभग सभी राष्ट्रपति इसे कम आंकते हैं'

लॉस एंजेलिस स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एरिक मिन संघर्ष समाधान और कूटनीति का अध्ययन करते हैं. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता है, समयसीमा बदलती रहती है.

उन्होंने कहा, "यह तय करना मुश्किल होता है कि कोई युद्ध कितने समय तक चलेगा."

1967 में राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने वियतनाम युद्ध के अंत को लेकर कहा था कि "टनल के अंत में रोशनी" दिखाई दे रही है. उनका यह बयान उस समय दिया गया था जब देश में युद्ध का विरोध बढ़ रहा था.

यह कोशिश सफल नहीं हुई. युद्ध आठ साल और चला और देश में इसकी अलोकप्रियता ने जॉनसन के दोबारा चुनाव न लड़ने के फैसले में भूमिका निभाई.

कई दशक बाद 1999 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने संकेत दिया था कि यूगोस्लाविया के ख़िलाफ़ नेटो की बमबारी कम समय की हो सकती है. लेकिन हवाई हमले दो महीने से अधिक चले.

फिर इराक युद्ध के दौरान राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश का वह चर्चित "मिशन पूरा हुआ" वाला भाषण दिया था. ये भाषण उन्होंने युद्ध शुरू होने के दो महीने बाद एक विमानवाहक पोत पर दिया था. अमेरिकी सेना 2011 तक इराक से नहीं लौटी.

हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के इतिहासकार थॉमस पैटरसन ने इस बारे में कहा, "राष्ट्रपति अक्सर युद्ध के दौरान जनता को डेडलाइन के बारे में बताते हैं और लगभग सभी राष्ट्रपति इसे कम आंकते हैं."

बीबीसी से बात करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार ईरान को लेकर ट्रंप का मामला अलग रहा है, क्योंकि राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों ने कई बार समयसीमा और युद्ध के कारणों को बदला है.

मिन ने कहा, "पूरे प्रशासन में इस तरह की असंगति काफी अलग है. मुझे इसका कोई ऐतिहासिक उदाहरण याद नहीं आता."

व्हाइट हाउस ने ऐसे किसी दावे से इनकार किया है. कैरोलिन लेविट ने पिछले महीने कहा था कि "राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी टीम ने लगातार स्पष्ट उद्देश्यों को सामने रखा है."

बुधवार को ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन काफी अहम माना जा रहा था, क्योंकि यह उम्मीद थी कि वह युद्ध पर कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं.

वॉशिंगटन में अटकलें थीं कि ट्रंप ईरान में ज़मीनी सैनिक भेजने का ऐलान कर सकते हैं, या फिर युद्ध को कम करने की बात कह सकते हैं.

लेकिन इसके बजाय ट्रंप ने एक नई समयसीमा का ज़िक्र किया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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