राजस्थानः गुलाबी हाथी की तस्वीर पर विवाद, क्या फ़ोटोशूट है मौत से जुड़ी वजह?

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए जयपुर से
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
जयपुर के आमेर इलाक़े में एक बुज़ुर्ग हथिनी 'चंचल' की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें उसे गुलाबी रंग से रंगा गया है.
सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया है.
विदेशी महिला फ़ोटोग्राफ़र जूलिया बुरुलेवा के सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई तस्वीर नवंबर 2025 के एक फ़ोटोशूट की बताई जा रही है.
बीते चार फ़रवरी 2026 को चंचल की मौत हो चुकी है. तस्वीर सामने आने के बाद आरोप लग रहे हैं कि रंग के इस्तेमाल से हाथी को संक्रमण हुआ और उसकी मौत हुई.
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हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और स्थानीय लोगों के दावे इन आरोपों से अलग तस्वीर पेश करते हैं.
पशु आधिकार संगठन पेटा का कहना है कि इस घटना ने 'बंदी हाथियों की स्थिति को लेकर चिंता पैदा' कर दी है.
पेटा से जुड़ी खुशबू गुप्ता ने हाथियों की सवारी और अन्य कामों के लिए उनके इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की मांग की है.
क्या है विवाद

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विदेशी फ़ोटोग्राफ़र और फ़ोटोशूट करने वाली महिला जूलिया बुरुलेवा ने 24 मार्च को एक तस्वीर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया.
उन्होंने पन्ना मीणा के कुंड की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "मैंने जयपुर में छह हफ्ते बिताए. गुलाबी रंग के कॉस्ट्यूम जयपुर से ही लिए गए हैं. लोग इसे पिंक सिटी कहते हैं. इसलिए मैंने अपने सभी जयपुर शूट्स में इसी गुलाबी रंग की थीम को लिया है. कॉन्सेप्ट, स्टाइल, प्रोडक्शन, शूटिंग और एडिटिंग सब मैंने खुद किया है."
इसके बाद उन्होंने चार दिन पहले फिर हवा महल के सामने एक रेस्तरां की छत पर एक गुलाबी रंग से रंगी हुई एक महिला की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "मैंने जयपुर में छह हफ्ते बिताए और इस पिंक सिटी सीरीज़ को तैयार किया. यह मेरी इंडिया में एक्सपेडिशन का हिस्सा है."
इसके बाद उन्होंने गुलाबी रंग से रंगे हाथी और उस पर बैठी एक गुलाबी रंग में रंगी मॉडल की तस्वीर भी शेयर की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हाथी को रंगने और उसकी मौत को लेकर विवाद छिड़ गया.
विवाद बढ़ने पर जूलिया बुरुलेवा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "इस प्रोजेक्ट में गुलाबी हाथी को लेकर काफ़ी ग़लत जानकारी फैलाई जा रही है. मुझे नहीं पता यह सब किसने शुरू किया, लेकिन मुझे जो बताया गया है उसके अनुसार हाथी की हाल ही में मौत उम्र अधिक होने के कारण हुई है, जो दुखद है."
"हालांकि, यह फ़ोटोशूट चार महीने से भी पहले हुआ था और इसका उसकी मौत से कोई संबंध नहीं है. कृपया ग़लत जानकारी साझा करने से पहले अपने स्रोतों की जांच जरूर करें."
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने क्या बताया

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चंचल का पोस्टमॉर्टम तीन डॉक्टरों की टीम ने हाथी गांव के अस्पताल में ही किया था. टीम में शामिल डॉक्टर अरविंद माथुर ने बीबीसी से बातचीत में साफ़ कहा कि चंचल की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई.
अरविंद माथुर कहते हैं, "चंचल सबसे बुज़ुर्ग हथिनी थी. उसकी उम्र करीब सत्तर साल थी. ज़्यादा उम्र के कारण शरीर में कई तरह के बदलाव हो चुके थे. मल्टी ऑर्गन फ़ेलियर, रेस्पायरेटरी और कार्डियक फ़ेलियर की वजह से उसकी मौत हुई है."
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या रंग के कारण किसी तरह का संक्रमण हुआ था, तो उन्होंने इस संभावना से इनकार किया.
डॉक्टर अरविंद माथुर ने कहा, "नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. रंग के कारण मौत होना सही नहीं है."
इस मामले पर वन विभाग की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. डीएफ़ओ विजय पाल सिंह ने फ़ोन पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "हम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा."
वहीं, विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमें इस मामले पर बात करने से मना किया गया है. अभी तक जांच के लिए कोई औपचारिक आदेश भी नहीं दिए गए हैं."
हालांकि, हाथी गांव समिति का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए बुलाया था.
प्रत्यक्षदर्शी ने क्या कहा

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हाथी गांव से करीब दो किलोमीटर दूर आमेर रोड पर पीली तलाई के पास मथुरा पोल गेट है. यही वह जगह है जहां यह फ़ोटोशूट हुआ था.
गेट के ठीक पास रहने वाले 28 वर्षीय दिनेश कुमार मीणा दावा करते हैं कि वे उस दिन मौके पर मौजूद थे.
वे बताते हैं, "मेरे सामने ही हाथी और मॉडल को गुलाबी रंग लगाया गया था. रंग लगाने से लेकर फ़ोटोशूट ख़त्म होने तक करीब दो घंटे का समय लगा था."
दिनेश के मुताबिक़, इस दौरान हाथी को पूरी तरह गुलाबी रंग में रंगा गया था. जो बाद में तस्वीरों में दिखाई दे रहा है.
वे बताते हैं, "नवंबर में हुए इस फ़ोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर बीते चार दिन पहले ही देखी हैं."
हाथी गांव समिति का पक्ष

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हाथी गांव समिति के अध्यक्ष बल्लू ख़ान इस पूरे विवाद को सोशल मीडिया की उपज मानते हैं. उनका कहना है कि, यह फ़ोटोशूट अभी का नहीं बल्कि करीब एक साल पुराना है.
वह आगे कहते हैं कि, कुछ दिन पहले ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं, जिसके बाद हंगामा हुआ है. यह ऑर्गेनिक गुलाल था जिसमें कोई केमिकल रंग नहीं था. पानी में घोलकर हाथी और मॉडल को रंगा लगाया गया था.
वह दावा करते हैं कि यह गुलाल भी फ़ोटोशूट करने वाली विदेशी महिला ही लेकर आई थीं.
बल्लू ख़ान कहते हैं कि, यह लगभग 20 मिनट का फ़ोटोशूट था और तुरंत बाद हाथी को पानी से साफ़ कर दिया गया था.
वह आगे बताते हैं कि चंचल की उम्र अधिक होने के कारण उसे पिछले पांच साल से किसी भी तरह की राइड में इस्तेमाल नहीं किया जाता था.
वह सिर्फ़ वॉक पर जाती थी और उस दौरान भी विदेशी फ़ोटोग्राफर ने ढाई हजार रुपए देकर यह फ़ोटोशूट किया.
हाथी मालिक क्या बोले

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मृतक हाथी चंचल के मालिक सादिक़ खान इस पूरे मामले को ग़लतफ़हमी बताते हैं. उनके मुताबिक चंचल उनके परिवार का हिस्सा थी और उसकी मौत से उन्हें बहुत दुख पहुंचा है.
सादिक़ ख़ान के पास सिर्फ़ यही एक हाथी था, जिसकी भी मौत हो गई है. वह अन्य काम करके परिवार पाल रहे हैं.
वह बताते हैं, "मेरे पिता अजीम मुन्ना ख़ान ने करीब 50 साल पहले चंचल को साढ़े बारह हज़ार रुपए में ख़रीदा था. तब वह बीस साल की थी."
सादिक़ खान के अनुसार, बुजुर्ग होने के कारण पिछले पांच साल से हमने उसे राइड पर ले जाना बंद कर दिया था. वह सिर्फ़ आराम करती थी और कभी-कभी वॉक पर जाती थी.
वह कहते हैं, "यह होली वाला कच्चा ऑर्गेनिक रंग था. इससे कोई नुकसान नहीं होता. शूट के तुरंत बाद हमने उसे नहला कर साफ़ कर दिया था."
सादिक़ ख़ान यह भी बताते हैं कि वह फ़ोटोग्राफर गुलाबी नगरी से जुड़ी एक गुलाबी थीम पर फ़ोटोशूट कर रहीं थीं. वो मॉडल्स के साथ बिड़ला मंदिर, जंतर-मंतर और हवा महल पर भी इसी थीम पर फ़ोटोशूट कर रही थीं.
कैसा है हाथी गांव

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जयपुर दिल्ली हाईवे पर आमेर में सीधे हाथ की ओर क़रीब एक किलोमीटर अंदर ही है हाथी गांव.
अध्यक्ष बल्लू ख़ान बताते हैं कि देश का एकमात्र यह हाथी गांव 140 बीघा ज़मीन पर बसा हुआ है. इसमें तीन मेल, 73 फीमेल समेत कुल 76 हाथी हैं.
हाथी मालिक और महावतों के परिवार के लोगों को मिला कर गांव में करीब तीन हज़ार लोग रहते हैं. हाथियों के रहने के लिए अलग-अलग थान बनाए हुए हैं. सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षा गार्ड भी मौजूद हैं.
गांव में हाथियों के नहाने के लिए तीन तलाब हैं. हाथियों के लिए एक सरकारी अस्पताल है. हाथी मालिक और महावतों के बच्चों की पढ़ाई के लिए एक सरकारी स्कूल भी है.
हाथियों के खाने के लिए हर एक थान के पास ही स्टॉक भी रखा होता है. जिसमें गन्ने समेत कई तरह के खाने की सामग्री रखी जाती है.
बल्लू ख़ान के मुताबिक़, हाथी गांव में हर छह महीने में एक बाद हाथियों की मेडिकल जांच के लिए पशुपालन विभाग कैंप भी लगवाता है, जिसमें वन विभाग के डॉक्टर भी आते हैं.
हाथियों के शव दफ़नाने के लिए भी गांव में ही एक अलग जगह है. इसी जगह चंचल को भी दफ़नाया गया है.
साद़िक ख़ान बताते हैं, "आज एक हाथी की क़ीमत करीब साठ से सत्तर लाख रुपए है. लेकिन, इतना पैसा देने के बावजूद भी हाथी मिलना बहुत मुश्किल है."
बल्लू ख़ान कहते हैं कि एक हाथी के खाने का दिनभर में करीब चार से पांच हज़ार रुपए ख़र्च आता है.
क्या हाथियों के लिए सरकार की ओर से कुछ अनुदान भी मिलता है, इस सवाल पर अध्यक्ष बल्ली ख़ान कहते हैं, "सरकार की ओर से सहायता नहीं दी जाती है."
आमेर किले पर होने वाली राईड और हाथी गांव में आने वाले पर्यटकों से होने वाली आमदनी से ही हाथियों का ख़र्चा चलता है.
पशु अधिकार कार्यकर्ता क्या कहते हैं

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पेटा इंडिया की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (पॉलिसी विभाग) खुशबू गुप्ता बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "फ़ोटोशूट के लिए गुलाबी रंग में रंगे जाने के बाद हथिनी चंचल की मौत की ख़बर भारत के उन बंदी हाथियों के लिए चिंताजनक स्थिति का संकेत है जो शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं."
उन्होंने आगे कहा है, "जिन हाथियों का इस्तेमाल सवारी, शादियों और अन्य प्रदर्शनों के लिए किया जाता है उन्हें काम न होने पर आमतौर पर जंजीरों में जकड़कर रखा जाता है. और हथियारों के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है."
खुशबू गुप्ता के अनुसार, "यह परिस्थितियां तीव्र तनाव का कारण बनती हैं और ख़तरनाक घटनाओं को जन्म देती हैं. जैसे परेशान हाथियों द्वारा लोगों पर हमला किया जाना. यह हाथी अक्सर दृष्टिबाधित होते हैं, कंक्रीट पर रहने और काम करने के लिए मजबूर होने के कारण पैरों की दर्दनाक समस्याओं से जूझते हैं. अक्सर उनमें मानसिक तनाव और दुर्गति के लक्षण दिखते हैं. जैसे कि लगातार झूमना और सिर हिलाना, आदि."
उनके मुताबिक़, "मनुष्यों के निकट संपर्क में रहने के लिए मजबूर ये हताश हाथी अप्रत्याशित रूप से आक्रमक हो सकते हैं. राजस्थान में सवारी और अन्य प्रदर्शनों में शामिल हाथियों द्वारा हमले की घटनाएं नियमित रूप से होती रहती हैं."
"पेटा इंडिया ने लंबे समय से जयपुर और अन्य स्थानों पर हाथी की सवारी और हाथियों के अन्य उपयोगों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और उनके स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों और रोबोटिक हाथियों को लाने की सलाह दी है."
उन्होंने बताया कि केरल पर्यटन विभाग ने एक मैकेनिकल हाथी सफ़ारी की शुरुआत की है.
खुशबू गुप्ता के अनुसार, "इंडोनेशिया ने हाथी की सवारी पहले ही बंद कर दी है. भारत को भी इसका अनुसरण करते हुए, शुरुआत राजस्थान से करनी चाहिए जो कि पर्यटन की सवारी के लिए प्रताड़ित किए जाने वाले बंदी हाथियों की सबसे बड़ी संख्या वाला राज्य है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
































