ईरान के यूरेनियम पर कब्ज़ा करना अमेरिका के लिए क्यों हो सकता है ख़तरनाक
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- Author, डैनियल बुश
- पदनाम, वॉशिंगटन संवाददाता
- Author, बर्न्ड डेबुसमैन जूनियर
- पदनाम, व्हाइट हाउस संवाददाता
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
अमेरिकी सैनिकों का किसी गुप्त, भूमिगत परमाणु फ़ैसिलिटी पर धावा बोलकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को कब्ज़े में लेना दूर की कौड़ी लग सकती है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप अपने मुख्य उद्देश्य को हासिल करने के लिए इसपर विचार कर रहे हैं, यानी ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना.
बीबीसी से बात करने वाले सैन्य विशेषज्ञों और पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ऐसी कार्रवाई बेहद चुनौतीपूर्ण और ख़तरों से भरी होगी.
उनका कहना है कि इसके लिए ज़मीनी सैनिकों की तैनाती करनी पड़ेगी और इसे पूरा करने में कई दिन या हफ़्तों भी लग सकते हैं.
मध्य पूर्व के पूर्व डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ़ डिफ़ेंस मिक मुलरॉय ने कहा, "यूरेनियम भंडार को हटाना इतिहास के 'सबसे जटिल विशेष अभियानों' में से एक होगा."
यह विकल्प उन कई सैन्य कार्रवाइयों में से एक है, जो ट्रंप ईरान में कर सकते हैं.
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अन्य विकल्पों में खार्ग द्वीप पर नियंत्रण करना शामिल है, ताकि ईरान पर होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलने का दबाव बनाया जा सके. ट्रंप प्रशासन नए सैन्य अभियानों की धमकी का इस्तेमाल कर ईरान को बातचीत की मेज़ पर लाने की कोशिश भी कर सकता है.
मंगलवार को बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज़ के साथ एक टेलीफ़ोन इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाए या नष्ट किए बिना युद्ध में जीत का एलान संभव है?
हालांकि उन्होंने पिछले जून में अमेरिका-इसराइल हमलों से हुए नुक़सान का हवाला देते हुए इस भंडार के महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की.
ट्रंप ने कहा, "वह इतनी गहराई में दफ़न है कि किसी के लिए भी उसे हासिल करना बहुत मुश्किल होगा. वह नीचे गहराई में है. तो वह काफ़ी सुरक्षित है. लेकिन, आप जानते हैं, हम एक फ़ैसला करेंगे."
उनकी यह टिप्पणी उस रिपोर्ट के बाद आई जिसमें 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने कहा था कि अमेरिका इसे निकालने के लिए एक ऑपरेशन पर विचार कर रहा है. व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप ने अभी अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है.
जोखिम भरा ऑपरेशन
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के भंडार को निशाना बनाने वाला ऑपरेशन कई बड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करेगा.
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जंग की शुरुआत में ईरान के पास 60% तक संवर्धित लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम था. इसको अपेक्षाकृत तेज़ी से 90% के स्तर तक संवर्धित किया जा सकता है, जोकि हथियार-स्तर के यूरेनियम के लिए ज़रूरी होता है.
ईरान के पास लगभग 1,000 किलोग्राम यूरेनियम भी है, जिसे 20% तक संवर्धित किया गया है और 8,500 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम है जिसे 3.6% तक संवर्धित किया गया है, जो मेडिकल रिसर्च के लिए स्वीकार्य स्तर है.
ज़्यादा उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के इस्फ़हान में मौजूद होने की संभावना है. यह फ़ैसिलिटी ईरान की उन तीन भूमिगत परमाणु साइट्स में से एक है, जिन्हें पिछले साल अमेरिका-इसराइल हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था.
हालांकि यह साफ़ नहीं है कि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का कितना हिस्सा अन्य जगहों पर रखा गया है.
ओबामा और ट्रंप प्रशासन में पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी रहे जेसन कैंपबेल ने कहा कि अगर अमेरिका को भंडार की सटीक जगह का पता हो तो इसे कब्ज़ा करने का सैन्य ऑपरेशन आसान हो सकता है.
कैंपबेल ने कहा, "आदर्श स्थिति यह है कि आपको ठीक-ठीक पता हो कि यह कहां है. अगर इसे चार अलग-अलग जगहों पर बांट दिया गया है, तो आप एक बिल्कुल अलग स्तर की जटिलता की बात कर रहे हैं."
इस्फ़हान के अलावा, उच्च स्तर वाला संवर्धित कुछ यूरेनियम, फ़ोर्दो और नतांज़ में भी हो सकता है, जो अन्य दो संवर्धन सुविधाएं हैं और जिन्हें पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर में निशाना बनाया गया था.
यूरेनियम भंडार के बारे में क्या पता है?
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अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निदेशक राफ़ेल ग्रॉसी ने पिछले महीने कहा था कि ईरान का ज़्यादातर उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम इस्फ़हान में रखा गया है, जबकि कुछ अतिरिक्त सामग्री नतांज़ में है.
लेकिन ग्रॉसी ने कहा कि 2025 में अमेरिका-इसराइल हवाई अभियान के बाद ईरान ने निरीक्षकों को निकाल दिया था और उसके बाद से इन साइट्स का दौरा नहीं हो पाया है, इसलिए और जानकारी नहीं है.
ग्रॉसी ने संवाददाताओं से कहा, "कई ऐसे सवाल हैं जिन पर हम तभी रोशनी डाल पाएंगे जब हम वापस जा सकेंगे."
यह मानते हुए कि अमेरिका को यह पता है कि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम कहां है, वहां तक पहुंच पाना अपने आप में एक अलग तरह की चुनौती है.
ऐसे संकेत हैं कि इस साल अमेरिका-इसराइल हमलों से पहले ईरान ने अपनी एक परमाणु फ़ैसिलिटी के पास मौजूद भूमिगत परिसर को मज़बूत कर लिया था.
उदाहरण के लिए इस्फ़हान में, फ़रवरी की सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिला कि उसके टनल कॉम्प्लेक्स के सभी प्रवेश द्वार मिट्टी से बंद कर दिए गए थे, जिससे किसी भी ऑपरेशन को और मुश्किल बनाया जा सकता है.
युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका और इसराइल केवल हवाई हमलों के ज़रिए ईरान की नौसेना को काफ़ी हद तक तबाह करने, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमज़ोर करने और उसके औद्योगिक ढांचे को नुक़सान पहुंचाने में सफल रहे हैं.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन अन्य सैन्य लक्ष्यों के उलट, ईरान के संवर्धित यूरेनियम को कब्ज़ा करना ज़मीनी बलों के बिना संभव नहीं होगा.
अमेरिका क्या कर सकता है?
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अमेरिका 82वीं एयरबोर्न डिविज़न का इस्तेमाल कर सकता है, जिन्हें मध्य पूर्व में तैनात किया गया है, ताकि इस्फ़हान और नतांज़ के आसपास के इलाकों को सुरक्षित किया जा सके.
इसके बाद परमाणु सामग्री को संभालने का प्रशिक्षण लिए विशेष अभियान बल को संवर्धित यूरेनियम को निकालने के लिए भेजा जाएगा. यूरेनियम गैस के रूप में होता है और माना जाता है कि इसे बड़े धातु के कंटेनरों में रखा गया है.
सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि इस्फ़हान और नतांज़ के प्रवेश द्वार अमेरिकी हवाई हमलों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं.
अमेरिकी बलों को मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनरी की ज़रूरत पड़ सकती है, ताकि यूरेनियम का पता लगाया जा सके, जिसके गहरे भूमिगत सुरंगों में होने की संभावना है. और इस दौरान ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है.
कैंपबेल ने कहा, "आपको पहले उस जगह की खुदाई करनी होगी और पता लगाना होगा और यह सब ऐसे माहौल में होगा जहां लगभग लगातार ख़तरा बना रहेगा."
यह एक खुला सवाल है कि ईरान क्या कर सकता है या देश की मुख्य परमाणु फ़ैसिलिटीज़ को निशाना बना रहे अमेरिका के ज़मीनी सैनिकों के लिए वह कितना बड़ा ख़तरा बन सकता है.
स्कोक्रॉफ़्ट मिडिल ईस्ट सिक्योरिटी इनिशिएटिव से जुड़े पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी एलेक्स प्लिट्सस ने कहा कि अमेरिका और इसराइल 'ईरानी रक्षा क्षमताओं को इस तरह की कार्रवाई के लिए कमज़ोर कर रहे हैं, अगर इसकी ज़रूरत पड़ी.'
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यह अभी भी 'बहुत अधिक जोखिम' वाला ऑपरेशन होगा.
अमेरिकी ज़मीनी सैनिक इस्फ़हान में अलग-थलग पड़ सकते हैं, जो ईरान के तीसरे सबसे बड़े शहर से लगभग 482 किलोमीटर अंदर स्थित है.
एलेक्स ने कहा, "दूरी को देखते हुए मेडिकल इवैक्यूएशन मुश्किल हो जाता है. इससे अमेरिकी सैनिकों को एंटी-एयरक्राफ़्ट फ़ायर का भी ख़तरा होगा और जब वे परमाणु सुविधा पर होंगे तब भी हमलों का ख़तरा बना रहेगा."
'कुछ भी हो सकता है'
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऑपरेशन कई तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन इसमें संभवतः किसी एयरफ़ील्ड या लैंडिंग ज़ोन पर कब्ज़ा करना शामिल होगा, जहां से अमेरिकी बल ऑपरेशन चला सकें. इसके बाद संवर्धित यूरेनियम को हासिल कर, उसे ईरान से बाहर ले जा सकें.
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि एयरफ़ील्ड और अन्य ढांचे को सुरक्षित करने का प्रशिक्षण प्राप्त 82वीं एयरबोर्न डिविज़न को, अन्य अमेरिकी बलों के साथ मिलाकर इस मिशन के लिए एक ऑपरेटिंग बेस तैयार करने में इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक बार यूरेनियम ज़ब्त हो जाने के बाद, अमेरिका के सामने यह सवाल होगा कि उसे देश से बाहर ले जाया जाए या वहीं पर उसका स्तर कम किया जाए.
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने युद्ध की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर ले जाने के बजाय वहीं पर उसका स्तर कम करने पर विचार कर सकता है.
लेकिन वॉशिंगटन डीसी स्थित एक थिंक टैंक, ज्यूइश इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेशनल सिक्योरिटी ऑफ़ अमेरिका में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विशेषज्ञ जोनाथन रुहे ने कहा कि यह एक बड़ा, जटिल और समय लेने वाला ऑपरेशन होगा.
उन्होंने कहा कि यूरेनियम को ज़ब्त कर ईरान से बाहर ले जाना तेज़ी से होगा और इससे अमेरिका को इस सामग्री का स्तर अपने देश में कम करने का मौका मिलेगा. उन्होंने जोड़ा कि चाहे इसे किसी भी तरह से किया जाए, यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा होगा.
रुहे ने कहा, "आपके पास लगभग आधा टन ऐसी सामग्री है जो असल में हथियार-स्तर के यूरेनियम के बराबर है, जिसे आपको बाहर निकालना है."
"और ऐसी लाखों चीज़ें हैं जो ग़लत मोड़ ले सकती हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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