रूस-यूक्रेन युद्ध : बंकरों में पनपे यूक्रेनी जोड़े के प्रेम और उसके त्रासद अंत की कहानी
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- Author, दियाना कुरिश्को
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़,यूुक्रेनी
"उसने टिन फॉइल से अंगूठी बना कर पेश की और कहा कि मुझसे शादी करोगी."
वलेरिया सबोतिना ने पुरानी यादों को खंगाला.
सबोतिना ने कहा, "वो मेरा प्यार था. हमारी अंगूठियां सही थीं."
सबोतिना और उनके पार्टनर एंद्रेई सबोतिन यूक्रेनी सेना में कैप्टन थे और युद्ध छिड़ने से ठीक पहले मारियोपोल में शादी की योजना बना रहे थे.
इस मौके पर उन्होंने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को बड़ी पार्टी देने का सपना संजोये रखा था.
लेकिन इसके बाद ही रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया.
रूसी सेना इस रणनीतिक बंदरगाह शहर में घुस आई और देखते ही देखते ही इसे पूरी तरह घेर लिया.
मरियोपोल पर लगातार रूसी बमबारी होती रही. गलियां आग से घिरी थीं. न खाना था न पानी. न बिजली थी और न वहां से निकलने का कोई रास्ता.
शहर पर ये घेरा तीन महीने तक रहा. समझा जाता है कि इसमें हजारों नागरिक मारे गए.
इस बीच, मारियोपोल के लोग अजोवस्ताल स्टील प्लांट में छिपने में लगे थे.
यहां 30 से अधिक बम शेल्टर बने थे. ये सभी सोवियत संघ के जमाने में बने थे ताकि किसी परमाणु युद्ध की स्थिति में लोगों को यहां पनाह मिल सके..
यहीं पर वलेरिया की शादी हुई और यहीं दो दिन के भीतर उनके पति की मौत हो गई. उनकी दुनिया बदल गई.
अकाल के कगार पर
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यूक्रेन पर जब रूस का हमला हुआ तो वलेरिया कविताएं लिखा करती थीं.
उसके बाद वो यूक्रेनियन नेशनल गार्ड के एक हिस्से के तौर पर काम करने वाली अज़ोव ब्रिगेड की प्रेस ऑफिसर बन गईं.
अज़ोव की धुर दक्षिणपंथी विचारधारा से कथित संबंधों को लेकर आलोचना होती रही है. हालांकि इसने इस तरह के संबंधों से इनकार किया है.
मारियोपोल में रूसी हमला तेज़ होते ही यूक्रेनी सेना को पीछे हटते हुए बंकरों में लौटना पड़ा. उनके साथ नागरिक भी वहां पनाह ले रहे थे.
बंकरों में घुसने का रास्ता किसी बड़े छेद की तरह था. वलेरिया याद करते हुए कहती हैं कि इसके अंदर कई ढह चुकी सीढ़ियों से गुजर कर जाना पड़ता था.
उन्होंने बताया, "अंदर के रास्तों और सुरंगों से होकर नीचे ज़मीन पर पहुंचना होता था जब तक कि कंक्रीट क्यूब नजर न आने लगें. ये एक तरह का सेफ़ रूम था."
बंकरों में लोगों ने अस्थायी किचन बना रखे थे जहां बचे हुए खानों से चीजों को निकाल कर फिर से पकाया जाता था.
जब उन्हें आटा मिलता था तो इसे गूंथ कर केक बनाया जाता था.
वो बताती हैं, "हम उन्हें ब्रेड कहते थे लेकिन लेकिन वे गूंथे आटे के टुकड़े होते थे. किसी तरह हम इन्हें खाकर ज़िंदा बचे रहे. ये बिलकुल अकाल के नज़दीक पहुंचने का मामला था."
"हम चूहों की तरह हो गए थे. अलग-अलग जगह से चीजें जुगाड़ कर लाते रहते थे और काम चलाते थे. हम चिथड़ों या कपड़ों पर सोया करते थे."
वो बताती हैं, "कुछ जगहों पर बिल्कुल घुप्प अंधेरा होता था. लेकिन आंखें इनकी अभ्यस्त हो गई थीं और आपको सब सामान्य लगता था. लेकिन निश्चित तौर पर हमारी ज़िंदगी में कुछ भी सामान्य नहीं था."
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15 अप्रैल, 2022 को आसमान से एक बड़ा बम गिरा और वलेरिया घायल हो गईं.
वो कहती हैं, "मैंने खुद को लाशों के बीच पाया. उस ढेर में सिर्फ मैं ज़िंदा बची थी. ये चमत्कार था. लेकिन ये एक भयावह त्रासदी भी थी."
उनके मस्तिष्क में गहरी चोट लगी थी और उन्हें अज़ोवस्ताल के अंडरग्राउंड अस्पताल में आठ दिनों तक भर्ती रहना पड़ा.
वहां सैकड़ों सैनिकों के बीच उनका भी इलाज हुआ. जहां उनका इलाज हो रहा था वहां हर तरफ कटे हुए मानव अंग बिखरे हुए थे.
उन्होंने बताया, "डॉक्टर भी लाचार थे क्योंकि उनके पास काफी कम दवाइयां थीं. हर तरफ़ ख़ून की गंध थी. हर तरफ़ कुछ सड़ने की बदबू आ रही थी."
वलेरिया के पार्टन एंद्रेई अज़ोवस्ताल में तैनात था. लेकिन वलेरिया के घायल होने के बाद उन्होंने वहीं बंकर में सगाई और शादी करने का प्रस्ताव रखा.
5 मई को इस जोड़े ने ज़रूरी दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए और इसकी स्कैन कॉपी एंद्रेई के माता-पिता को भेज दी ताकि वो इसे रजिस्ट्री ऑफ़िस में भेज सकें और शादी की प्रक्रिया पूरी हो जाए.
फिर बंकर में शादी की सभी रस्में की गईं. शादी के जोड़े के तौर पर मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनी गई. टिन फॉयल से बनी अंगूठियां पहन कर शादी की गई.
एंद्रेई ने वलेरिया से वादा किया कि वो युद्ध ख़त्म होते ही उनके लिए असली वेडिंग रिंग खरीदेंगे.
लेकिन 7 मई को उस इलाके में एक युद्ध मिशन पर जाते वक़्त एंद्रेई की फ़ायरिंग में मौत हो गई.
वलेरिया कहती हैं, "लोग जब ये सुनते हैं कि उनका कोई क़रीबी मारा गया तो अपने अंदर सिहरन सा महसूस करते हैं लेकिन मुझे ऐसा कुछ नहीं लगा."
"दरअसल, जिस दिन एंद्रेई मारा गया उस दिन इसकी ख़बर मिलने से पहले तक मैं अच्छे मूड में थी. मेरी शादी हुई थी और मैं प्यार में थी."
लेकिन जब वलेरिया को ये पता चला कि उनके पति की मौत हो गई है तो वो रोई नहीं. उन्हें इसे अपने अंदर ज़ज्ब किए रखा.
वो कहती हैं, "अज़ोवस्ताल में एक दिन जैसे एक साल जैसा लग रहा था. पहले मैं दुल्हन थी. अगले दिन पत्नी बन गई थी और उसके अगले दिन…… मुझे तो अब ये शब्द बोलते हुए डर ही लगता है."
युद्ध बंदी
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मई की शुरुआत में हजारों यूक्रेनी लोग अजोवस्ताल स्टील प्लांट में शरण लिए हुए थे.
ये लोग वहां 80 दिनों तक बगैर भोजन और दवा के काम चलाते रहे. उन्हें वहां से तुरंत निकाले जाने की ज़रूरत थी.
सबसे पहले वहां से नागरिकों को निकाले जाने की अनुमति मिली. सैनिकों को रूसी सेना ने बंदी बना लिया.
उम्मीद थी कि युद्ध बंदियों की अदला-बदली में उन्हें छोड़ दिया जाएगा.
लेकिन दो साल हो गए हजारों यूक्रेनी सैनिक अभी रूस की सेना के बंदी बने हुए हैं.
इनमें अज़ोव ब्रिगेड के 900 सदस्य हैं. इनमें से कई यूक्रेन के लोगों के लिए राष्ट्रीय नायक हैं.
उनके परिवार के लोग यूक्रेनी अधिकारियों के सामने उनकी रिहाई के लिए प्रदर्शन करते रहते हैं. लेकिन युद्ध बंदियों की अदला-बदली की प्रक्रिया जटिल है.
रूस ने जब से यूक्रेन पर हमला किया है तब से लगभग 3000 यूक्रेनी युद्ध बंदियों को रिहा किया गया है.
समझा जाता है कि रूस की जेलों में अभी भी दस हजार यूक्रेनी युद्ध बंदी हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एक जांच के मुताबिक़, यूक्रेनी युद्ध बंदियों के साथ लगातार मारपीट हो रही है.
उन्हें बिजली का करंट लगाया जा रहा है. उनके साथ रेप और यौन हिंसा हो रही है. उन्हें मारा जा रहा है.
वलेरिया 11 महीनों तक रूसी सेना की क़ैद में थीं. उन्हें भी प्रताड़ित किया गया और उनके साथ भी हिंसा हुई.
हाल में उन्होंने रूसी जेल में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए एक किताब प्रकाशित की है.
उनके पति एंद्रेई का शव अभी भी अज़ोवस्ताल स्टील प्लांट में पड़ा है.
उन्होंने कहा, "रूसियों ने हर वो चीज ख़त्म कर दी जिससे मैं प्यार करती थी.- मेरा शहर, मेरे दोस्त और मेरा पति"
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