टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद अक्षर पटेल ने 'खालीपन' क्यों महसूस किया

    • Author, हरप्रीत कौर लांबा
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

बहुत खुश हैं या खालीपन है? बेहद उस्साहित हैं या राहत महसूस कर रहे हैं?

अक्सर किसी खिलाड़ी की भावनाओं को समझना मुश्किल होता है. वो तब और ज्यादा मुश्किल हो जाता है जब प्लान बनाने, कड़ी मेहनत करने, उसे अमल में लाने और सफलता हासिल करने का सर्कल पूरा हो जाता है.

अपने टारगेट को हासिल करना बहुत ज्यादा खुशी और उत्साह देता है. लेकिन साथ ही ये थकावट और कभी-कभी एक तरह का खालीपन भी लाता है.

खेलों के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं. भारत के ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा ने स्वीकारा कि 2008 के बीजिंग ओलंपिक में अपनी शानदार उपलब्धि के बाद "उन्हें खोया हुआ महसूस हुआ और उन्होंने एक बड़े खालीपन का अनुभव किया."

टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल के लंबे इंतजार के बाद ब्रॉन्ज मेडल जीता. जीत के बाद भारतीय टीम के गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने बताया, "अचानक आए भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना मुश्किल था."

इस लिस्ट में शामिल होने वाले सबसे नए खिलाड़ी भारतीय टी-20 टीम के उप कप्तान अक्षर पटेल हैं. उन्होंने बताया कि 8 मार्च, 2026 को अहमदाबाद में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्हें, "अपने भीतर एक खालीपन महसूस हुआ."

एक बातचीत में अक्षर पटेल ने कहा, "समझ नहीं आ रहा था क्या करें."

"मैंने, हार्दिक (पंड्या), जस्सी भाई (जसप्रीत बुमराह), हम सबने कई दिन तक अपने क्रिकेट किट को हाथ भी नहीं लगाया और बस पूरी तरह से ब्रेक ले लिया. वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में आपकी बहुत ज़्यादा एनर्जी खर्च होती है. महीनों तक हमने बहुत ज़ोरदार तैयारी की. दिन-रात एक करके मेहनत की. लेकिन जब यह सब आखिरकार खत्म हुआ तो आप पूरी तरह से थका हुआ महसूस करते हैं."

भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले ऑलराउंडर ने कहा, "वर्ल्ड कप के बाद मैं क्रिकेट से दूर रहा. पिछला महीना परिवार, आराम और अपने एक साल के बेटे हक्ष के साथ समय बिताने के लिए था. इससे मुझे खुद को रीसेट करने में मदद मिली और मेरी हंगर भी बढ़ गई."

अक्षर पटेल: 'भारत के जोंटी रोड्स'

मुंबई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारत को सेमीफ़ाइनल में जीत का एक सबसे यादगार पल अक्षर की शानदार फील्डिंग थी.

सबसे पहले उन्होंने इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक को पीछे की ओर दौड़ते हुए एक जबरदस्त कैच लपककर पवेलियन भेजा.

उसके बाद शिवम दुबे के साथ मिलकर विल जैक्स को आउट करने के लिए एक बेहतरीन कैच पकड़ने की कोशिश की.

अक्षर पटेल की इन कोशिशों की बहुत तारीफ़ हुई. भारत के फील्डिंग कोच टी दिलीप ने उनके इस असाधारण प्रदर्शन के लिए उन्हें 'भारत का जोंटी रोड्स' तक कह दिया था.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उन पलों के बारे में सोचने का मौका मिला, तो अक्षर ने कहा, "वर्ल्ड कप के दौरान मैंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी. बाद में, जब मैंने उन क्लिप्स को देखा और मेरे दोस्तों ने कई रील्स शेयर कीं, तो मेरे मुंह से बस यही निकला, 'वाह! यह तो काफ़ी मुश्किल था.' उस समय मैं बस अपनी प्रोसेस को फॉलो कर रहा था और ज़्यादा कुछ सोच नहीं रहा था."

अक्षर पटेल ने फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ भी भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने 27 रन खर्च कर तीन विकेट लिए. उनकी गेंदबाज़ी के दम पर भारत टी-20 वर्ल्ड कप को डिफेंड करने वाला पहला देश बना.

इस दौरान स्टैंड्स में बेटे की मौजूदगी ने गुजरात के इस ऑलराउंडर के लिए उन पलों को और यादगार बना दिया.

अक्षर पटेल ने कहा, "यह एक गर्व का पल था."

"यह हमेशा मेरी यादों में रहेगा. मैं सालों से अपने होम ग्राउंड पर अपने परिवार के सामने मैच खेलने का इंतजार कर रहा था. और यह वर्ल्ड कप का फ़ाइनल मैच निकला. मेरा बेटा भी वहां मौजूद था और यह बात मेरे दिल के बहुत करीब है."

टी-20 क्रिकेट में भारत का दबदबा

भारत का 2024 और 2026 वर्ल्ड कप में जीत हासिल करना टी-20 क्रिकेट में उसके दबदबे को दिखाता है.

एग्रेसिव थिंकिंग से लेकर हर कदम पर ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार खिलाड़ियों तक. टीम के पास लगभग सब कुछ है जो उसे सफल बनाता है.

अक्षर का मानना ​​है कि टीम की फ्लेक्सिबिलिटी ही सफलता की वजह है.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारतीय टीम की सफलता का कारण उसकी फ्लेक्सिबिलिटी है. एक टीम के तौर पर हम हालात के हिसाब से खुद को जल्दी ढाल लेते हैं. आज के जमाने में हम सिर्फ एक ही तरह से नहीं खेल सकते, हमें परिस्थितियों और अपनी भूमिकाओं के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है. हम यह काम बहुत अच्छे से कर रहे हैं."

लीडरशिप ग्रुप का हिस्सा होने के नाते अक्षर पटेल ने बीते कुछ सालों में आगे बढ़कर टीम को खुद से ऊपर रखा है.

अक्षर ने कहा, "अगर आपने मुझे इन सालों में खेलते देखा है, तो मैं हमेशा से एक जैसा ही खिलाड़ी रहा हूं. मैं हमेशा यही सोचता हूं कि टीम को किस चीज की ज़रूरत है. शायद इसीलिए मुझे एक ऐसे खिलाड़ी के तौर पर देखा जाता है जो 'क्राइसिस मैन' की भूमिका में बिल्कुल फिट बैठता है."

'कप्तान के तौर पर अब मैं बहुत साफ़ हूं'

चूंकि अब सारा फोकस आईपीएल की ओर हो चुका है, अक्षर पटेल दिल्ली कैपिटल्स को पहला खिताब दिलाना चाहते हैं.

अक्षर पटेल को पिछले सीजन में दिल्ली कैपिटल्स का कप्तान नियुक्त किया गया था.

उन्होंने बताया, "कप्तान के तौर पर अब चीजों के साथ मैं ज्यादा जुड़ा हुआ हूं. पहले एक प्लेयर के तौर पर मेरा फोकस अपनी भूमिका पर रहता था और मैं अपनी दुनिया में जी रहा था. लेकिन अब मुझे सोचना पड़ता है कि हर किसी से उसका बेस्ट कैसे निकलवाया जा सकता है."

2019 में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा बनने से पहले वो मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब (जो अब पंजाब किंग्स है) से जुड़े रहे हैं.

अक्षर पटेल कहते हैं, "अब इस बात को लेकर ज्यादा स्पष्टता है कि हम एक टीम के तौर पर कैसे खेलना चाहते हैं. पहले साल में आप बहुत कुछ सीखते हैं, अपने खिलाड़ियों के बारे में, स्थितियों के बारे में और एक लीडर के तौर पर खुद के बारे में."

"अब मैं ज्यादा स्थिर महसूस करता हूं. मैं खिलाड़ियों को बेहतर समझता हूं. यह समझता हूं कि इस टीम के लिए क्या काम करता है और हम किस तरह का माहौल बनाना चाहते हैं."

उन्होंने बताया, "हमारा ध्यान पॉजिटिव, एग्रेसिव रहने और सबसे जरूरी बात, भरोसा बनाने पर है. जब खिलाड़ियों को वह समर्थन और भरोसा महसूस होता है, तो वे अपने आप ज़िम्मेदारी लेते हैं और बेहतर प्रदर्शन करते हैं. एक कप्तान के तौर पर इस बारे में मैं बहुत स्पष्ट हूं."

कागज़ पर एक मजबूत टीम होने के बावजूद दिल्ली बीते 18 सालों में एक भी आईपीएल खिताब नहीं जीत पाई है. अक्षर इस सच्चाई से अनजान नहीं हैं. लेकिन उन्होंने आगे की ओर देखने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा, "सच कहूं तो हम बैठकर बार-बार पिछली बातों के बारे में बात नहीं करते. हर कोई जानता है कि कुछ मौकों पर हम जीत के बहुत करीब पहुँचे थे. एक खिलाड़ी के तौर पर आपको इस बात का एहसास होता है."

"हमारी बातचीत हमेशा इस बात पर होती है कि हम आगे और बेहतर क्या कर सकते हैं. हम उन पुरानी बातों को नए सीजन में ढोकर लाने के बजाय, पॉजिटिव रहने और एक टीम के तौर पर खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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