You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अमेरिका दुश्मन की गिरफ़्त से कैसे निकालता है अपने सैनिक?
- Author, सिमी जोलासो
- पदनाम, नॉर्थ अमेरिका संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि ईरान में गिराए गए एफ़-15 विमान के लापता अफ़सर को सुरक्षित बचा लिया गया है.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते रहे हैं कि उनकी सेना ने ईरान की आर्मी को कमज़ोर कर दिया है.
लेकिन दूसरी ओर, ईरान ने इसके उलट अमेरिका का एफ़-15 ईगल विमान गिराया है. यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान की हवाई सुरक्षा इतनी कमज़ोर पड़ चुकी है कि वह अमेरिकी विमानों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर सकता.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान पर 'हवाई बढ़त' हासिल कर ली है.
लेकिन शुक्रवार को गिराए गए एफ़-15 ईगल विमान से साफ़ होता है कि ईरान अभी भी अपनी हवाई सीमा की रक्षा करने में सक्षम है, भले ही सीमित स्तर पर.
अमेरिकी अधिकारियों ने बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस को बताया कि विमान का पायलट सुरक्षित बचा लिया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने अब जानकारी दी है कि लापता वेपन सिस्टम्स अफ़सर को भी बचा लिया गया है.
ट्रंप ने अमेरिकी ऑपरेशन के बारे में क्या बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जानकारी देते हुए बताया, "मेरे आदेश पर उसे वापस लाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जो दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस थे."
उन्होंने लिखा, "यूएस मिलिट्री ने इतिहास की सबसे साहसी खोज और बचाव कार्रवाई में से एक को अंजाम दिया. यह हमारे शानदार क्रू मेंबर अफ़सर के लिए था, जो एक बहुत सम्मानित कर्नल भी हैं. मुझे खुशी है कि अब वे सुरक्षित हैं."
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अफ़सर को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वो ठीक हो जाएंगे.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर आईआरजीसी ने इस खोज अभियान में सैनिकों और स्थानीय लोगों को भी जोड़ लिया था. सैन्य अफ़सर को ज़िंदा पकड़ने पर लगभग 66,000 डॉलर का इनाम रखा गया था.
बीबीसी फ़ारसी सेवा की सीनियर रिपोर्टर ग़ोंचेह हबीबीजाद के मुताबिक़, खुज़ेस्तान प्रांत से एक अपुष्ट वीडियो सामने आया था. इसमें कुछ लोग हथियारों और इस्लामिक रिपब्लिक के झंडे के साथ नज़र आ रहे थे. इनमें से एक व्यक्ति कहता हुआ दिख रहा है, "ख़ुदा ने चाहा तो हम उसे ढूंढ लेंगे."
यदि लापता अफ़सर ईरान के हाथ लग जाता तो युद्ध पर इसके बड़े प्रभाव होते.
अमेरिका ने पहले ऐसे छुड़ाए थे अपने बंदी
दरअसल, साल 1979 में ईरान ने अमेरिकी राजनयिकों को 444 दिन तक बंधक बनाकर रखा था.
बंधकों को छुड़ाने के एवज में अमेरिका ने तब ईरान पर से कुछ प्रतिबंध हटाए थे. साथ ही 8 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति को अनफ़्रीज़ किया था. यह घटना अमेरिका पर एक गहरी राजनीतिक चोट छोड़ गई थी.
इसके बाद भी ऐसे कई वाक़ये हुए, जब अमेरिका ने अपने लोगों को छुड़ाने के लिए कई बड़े-बड़े क़दम उठाए. कई बार तो अमेरिकी कैदियों की रिहाई के लिए किए गए फ़ैसलों पर विवाद भी हुआ.
साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार ने अपने सैनिक बोवे बर्गडाहल को छुड़ाने के लिए पांच तालिबान कैदियों को छोड़ा था. बर्गडाल को तालिबान ने 2009 में अफ़ग़ानिस्तान में पकड़ लिया था.
हालांकि, आलोचक कहते हैं कि इस तरह के सौदे भविष्य में अमेरिका पर भारी पड़ सकते हैं. इससे विरोधी बंधक बनाकर अपने नेगोसिएशन पावर बढ़ा सकते हैं.
अमेरिकी सैनिकों पर बढ़ रहा ख़तरा
वॉशिंगटन में सांसदों ने ऑफिसर को सकुशल लौटने की उम्मीद जताई थी, लेकिन इस दौरान मतभेद भी सामने आए. रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने कहा, "अब समय आ गया है कि हम सैनिकों को घर लाएं."
जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने कहा, "किसी भी पकड़े गए सैनिक के साथ अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़ व्यवहार किया जाए."
अमेरिकी सैनिकों के लिए इस लड़ाई में ख़तरा बढ़ रहा है, ख़ासकर जब ज़मीनी हमले की चर्चा हो रही है.
अमेरिका में अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा रखने वाले लोग भी अब 'लंबी खिंचती हुई जंग' में नहीं पड़ना चाहते. न ही वे और अमेरिकी सैनिकों की जान गंवाने के पक्ष में हैं.
अमेरिका का दावा- आईआरजीसी कमांडर के रिश्तेदारों को गिरफ़्तार किया
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के मारे गए कमांडर क़ासिम सुलेमानी के रिश्तेदारों को गिरफ़्तार किया गया है. साथ ही उनकी अमेरिका में रहने की स्थायी अनुमति भी रद्द कर दी गई है.
लेकिन सुलेमानी की बेटी ने इन दावों को झूठा बताया है. उनका कहना है कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनका उनके पिता से कोई लेना-देना नहीं है.
क़ासिम सुलेमानी ईरान के सबसे ताक़तवर सैन्य कमांडर थे, जिन्हें 2020 में इराक में अमेरिकी हवाई हमले में मार दिया गया था. तब भी डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे, हमले का आदेश उन्होंने ही दिया था.
ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का समय दिया
ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान को 48 घंटे का वक़्त दिया है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास 'समझौता करने या होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने' के लिए 48 घंटे का समय है, वरना 'क़हर बरपेगा'.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "याद रखिए जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था. समय ख़त्म हो रहा है. उन पर क़हर टूटने में बस 48 घंटे बाक़ी हैं."
27 मार्च को ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह अगले 10 दिनों के लिए ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर किसी भी तरह के हमले को रोक रहे हैं.
अमेरिका हमले तेज़ करने के लिए कह रहा है, खाड़ी में उसके सैनिकों का जमावड़ा लग रहा है, ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके कि अभी और अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है.
इन सब संकेतों से स्पष्ट है कि हालात बिगड़ रहे हैं और लड़ाई का दायरा बढ़ता जा रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित