एशिया कप: मोहम्मद रिज़वान नहीं, ये खिलाड़ी है पाकिस्तान की जीत का असल हीरो

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    • Author, प्रदीप कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान ने एशिया कप के पहले मुक़ाबले में हार का बदला ले लिया. पाकिस्तान को जीत के लिए 182 रन बनाने थे और यह चुनौती पाकिस्तान के लिए एक समय बहुत आसान नज़र आ रही थी.

इसकी एक वजह यही थी कि मोहम्मद रिज़वान नामक तूफ़ान विकेट पर जमा हुआ था. मोहम्मद रिज़वान को भारतीय क्रिकेट प्रेमी लंबे समय तक शायद ही भूल पाएंगे.

दुबई के इसी मैदान पर एक साल पहले वर्ल्ड टी-20 के मुक़ाबले से पहले वे अस्पताल में भर्ती थे और मैच में उतर कर उन्होंने ऐसा कमाल दिखाया था कि भारत वो मुक़ाबला दस विकेट से हार गया था.

एशिया कप के इस मुक़ाबले में भी वे विकेटकीपिंग के दौरान ऐसा लगा कि वे चोट से परेशान हुए हैं लेकिन बल्लेबाज़ी करने के दौरान उन पर इन सबका कोई असर नहीं दिखा. मैच की पहली गेंद पर चौका जड़कर उन्होंने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए.

बाबर के आउट होने के बाद अगले ही ओवर में हार्दिक पांड्या को दो चौके उन्होंने जमाए. फिर अर्शदीप के ओवर में रिजवान स्पेशल शाट्स के ज़रिए स्क्वायर लेग पर छक्का.

रिज़वान की ख़ासियत बन चुका है ये शाट्स, जिनमें वे अपनी पसलियों के क़रीब लाकर फुल शाट्स खेलते हैं. इस शाट्स का नाम ही पसलियों वाला ही शाट्स पड़ गया है.

रिज़वान जब तक विकेट पर रहे तब तक पाकिस्तान का पलड़ा मज़बूत रहा लेकिन सामने विशाल लक्ष्य की चुनौती थी. वे जब 51 गेंदों पर 71 रन बनाकर आउट हुए तब पाकिस्तान को 19 गेंदों पर 35 रन बनाने थे.

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इसलिए तारीफ़ करनी होगी पुछल्ले बल्लेबाज़ों आसिफ़ अली और खुशदिल शाह की, जिन्होंने दबाव के पलों में भी पाकिस्तान को संभाले रखा.

कोहली ने बताया मैच विनर

लेकिन इस मैच का असली हीरो कौन था, इसके बारे में प्रेस कांफ्रेंस में विराट कोहली ने बताया, "रिज़वान क्रीज़ पर थे. लेकिन मोहम्मद नवाज़ ने जो किया वो मैच के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. पाकिस्तान ने उसको पहले भेजा, शायद वे अपनी बल्लेबाज़ी को थोड़ी लंबी करना चाहते होंगे, और उसने आकर मैच जिताने वाली पारी खेल दी."

दरअसल, कोहली जिस मोहम्मद नवाज़ की तारीफ़ कर रहे हैं, वह इस मैच के असली मैच विनर साबित हुए. उन्होंने पहले बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाज़ी करते हुए चार ओवरों में महज 25 रन ख़र्चे. इस लिहाज से देखें तो वे पूरे मैच के सबसे क़िफायती गेंदबाज़ साबित हुए.

भारतीय पारी के दौरान उन्होंने ख़तरनाक दिख रहे सूर्यकुमार यादव का विकेट भी झटका. इससे पहले दोनों मुक़ाबलों में नवाज़ ने तीन-तीन विकेट चटकाए थे.

लेकिन असली धमाल उन्होंने बल्लेबाज़ी में दिखाया. जब वे खेलने उतरे तब उनकी टीम को 11 ओवरों में 119 रनों की ज़रूरत थी और यह चुनौती बेहद मुश्किल लग रही थी.

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लेकिन नवाज़ ने महज 20 गेंदों पर छह चौके और दो छक्कों की मदद से 42 रन कूट दिए. उन्होंने हार्दिक पांड्या की गेंदों पर दो चौके और एक छक्का लगाया जबकि चाहल की गेंदों पर लगातार दो चौके जमाए. ये उनके टी-20 करियर का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर भी है.

मैच के बाद उन्हें शानदार आलराउंड खेल के लिए मैन ऑफ़ द मैच आंका गया.

28 साल के मोहम्मन नवाज़ ने मैन ऑफ़ द मैच का अवार्ड लेने के बाद कहा, "जब मैं बल्लेबाज़ी करने उतरा तब टीम को प्रति ओवर 10 से ज़्यादा रन बनाने थे. मैंने तय कर लिया था कि गेंद मेरे ज़ोन में आयी तो मैं हिट करूंगा. मेरे दिमाग़ में यह एकदम क्लियर था. इसको लेकर मैंने कोई अतिरिक्त ज़ोर नहीं लगाया."

वैसे ख़ास बात यह है कि नवाज़ ये करिश्मा नहीं दिखा पाते, अगर पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म ने उन्हें बैटिंग ऑर्डर में ऊपर भेजने का फ़ैसला नहीं किया होता.

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मैच ख़त्म होने के बाद बाबर आज़म ने कहा, "नवाज़ को मैंने ऊपर भेजा था. उस वक्त मुझे यही लगा था कि दो लेग स्पिनरों के सामने ये ठीक रहेगा."

नवाज़ ने कप्तान के भरोसे को पूरी तरह से सही साबित कर दिखाया. हालांकि वे टीम को जीत दिलाने तक नहीं टिके लेकिन जब भुवनेश्वर कुमार की चालाकी से धीमी गेंद को उठाकर मारने की कोशिश में बाउंड्री लाइन पर उनका कैच लपका गया तब तक वे पाकिस्तान को जीत के करीब पहुंचा चुके थे.

बाएं हाथ से स्पिन और बांए हाथ से ही बल्लेबाज़ी करने वाले नवाज़ अंडर-15, अंडर-19 के रास्ते पाकिस्तान की क्रिकेट टीम तक पहुंचे हैं. अब तक वे पांच टेस्ट मैच, 22 वनडे और 33 टी-20 मैच खेल चुके हैं.

रावलपिंडी में जन्में नवाज़ के बचपन से हीरो शोएब अख़्तर रहे हैं. रावलपिंडी एक्सप्रेस नाम से मशहूर शोएब ने जब अपना इंटरनेशनल क्रिकेट करियर शुरु किया था तब नवाज़ महज तीन साल के ही थे. लिहाजा अपने इलाके के हीरो का उन पर गहरा असर पड़ा. एक यूट्यूब इंटरव्यू में मोहम्मद नवाज़ ने बताया है कि उन पर अज़हर महमूद का भी असर रहा.

इन दो तेज़ गेंदबाज़ों के असर के चलते नवाज़ तेज़ गेंदबाज़ी ही करने लगे थे. लेकिन अंडर-14 क्रिकेट के दौरान उनकी टीम का एक स्पिनर चोटिल हो गया और कोच ने उनसे स्पिन गेंदबाज़ी करने को कहा. हालांकि कोच ने उनसे तेज़ गेंदबाज़ी छोड़ने को नहीं कहा. लेकिन बैटिंग पर ध्यान देने के चलते वे इतने थक जाते थे कि कुछ समय बाद स्पिन गेंदबाज़ी करने लगे.

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