बिशन सिंह बेदी: फिर हो भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

'भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट नही खेली जा रही है, तो क्या इससे आतंकवाद कम हो गया है. यह क्रिकेटरों का काम नही है कि वो बॉर्डर की सुरक्षा करें, यह सरकार का काम है, लेकिन सिर्फ क्रिकेट और फिल्म इंडस्ट्री को कह दिया कि पाकिस्तान से संबध ना रखें. यह सही नही है, यह क्रिकेटर्स का कसूर नही है. सरकार को सोचना चाहिए.'

यह कहना है भारत के पूर्व कप्तान और अपने ज़माने के दिग्गज लैग स्पिनर बिशन सिंह बेदी का.

दरअसल वह पिछले दिनों दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला मैदान में अपने ही नाम के एक स्टैंड के नामकरण के अवसर पर एक समारोह में आमंत्रित थे.

यह बिशन सिंह बेदी ही थे जिनकी कप्तानी में साल 1978-79 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था.

इससे पहले साल 1960-61 में भारत में पाकिस्तान के ख़िलाफ टेस्ट सिरीज़ खेली गई थी.

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अब रह-रह कर बिशन सिंह बेदी जैसे खिलाड़ियों के दिल की आवाज़ ज़ुबां पर आ ही जाती है, कि क्रिकेट के मैदान में भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी आमने-सामने हों.

लेकिन कैसे हो. अब एक उम्मीद की किरण दिखाई देती है जब अगले साल नौ टेस्ट टीमें, टेस्ट चैंपियनशिप खेलेंगी.

इसमें तीन टेस्ट सिरीज़ विदेशी ज़मीन पर और तीन अपनी ज़मीन पर खेली जाएंगी. इसे लेकर आईसीसी की एक बैठक सात दिसंबर से सिंगापुर में आयोजित होनी है. इसमें बीसीसीआई भी भविष्य के क्रिकेट कार्यक्रम को लेकर आईसीसी से चर्चा करेगी.

आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप में भारत के ख़िलाफ छह टीमें खेलेंगी. अगर इनमें पाकिस्तान की टीम नही हुई तो ना तो भारत के अंक कटेंगे और ना ही भारत पर पेनल्टी लगेगी. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तो मुक़ाबलें तब ही होंगे जब सरकार मंजूरी देगी.

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इस पूरे मामले को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है इंडो-पाक क्रिकेट कब दोबारा शुरू हो इसका फ़ैसला बीसीसीआई या पीसीबी यानि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड नही करेंगे.

इसके लिए सरकार की अनुमति ज़रूरी है. इसमें खिलाड़ी भी कुछ नही कर सकते.

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विजय लोकपल्ली आगे मानते है कि फौज का अपना रोल है, खिलाड़ियों का अपना रोल है, लेकिन सरकार का भी रोल है.

लोकपल्ली कहते हैं, "अगर सरकार नही चाहती कि दोनो टीमें नही खेले तो वह खेल भी नही सकती."

लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का ही खेल है और अगर कहीं टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच ही खेला जाना तय हो जाए तो फिर क्या होगा.

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भारत-पाक क्रिकेट का आनंद

क्या कोई जानता था कि इसी साल चैंपियनस ट्रॉफी के शुरूआती दौर में भारत से बुरी तरह हारने के बाद पाकिस्तान ज़बरदस्त खेल दिखाते हुए फाइनल तक पहुंचेगा और भारत को मात देकर चैंपियन बनेगा.

शायद इसी तरह के परिणाम क्रिकेट को क्रिकेट बनाते है.

भविष्य की पहेली को लेकर विजय लोकपल्ली कहते है कि फाइनल स्टेज पर आने के बाद अगर टीमों को पता चलता है कि वह एक दूसरे से नही खेल सकते, तब तो बहुत बुरा होगा कि टूर्नामेंट समाप्त होने को आ गया लेकिन यह टीमें आपस में फाइनल नही खेल सकती.

असल में यह मुद्दा तब ही समाप्त होगा जब सरकार अनुमति देगी.

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तीसरे देश में मैच में भी पेच

विजय लोकपल्ली यह भी कहते है कि सरकार किसी तीसरे देश या तटस्थ देश में इनके मुक़ाबलों को स्वीकार नही करेगी जब तक वह आईसीसी का टूर्नामेंट ना हो.

वैसे भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले हो ऐसा मानने वालों में पूर्व आलराउंडर मदन लाल भी है.

उनका कहना है कि एक तो अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में अधिकतर टीमें बेहद कमज़ोर हो चुकी है और चार-पांच अच्छी टीमें है जो उंगुली पर गिनी जा सकती है.

मदन लाल कहते है कि यह सही है कि मामला राजनितिक है और सरकार को ही तय करना है.

अब सिंगापुर में आईसीसी की मीटिंग में बीसीसीआई भले ही दबाव ना डाले कि पाकिस्तान से मुक़ाबलें न हो लेकिन पाकिस्तान ज़रूर दबाव बनाएगा कि टेस्ट सिरीज़ भारत के साथ हो.

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मदन लाल मानते है कि अब देखना है कि बीसीसीआई के पदाधिकारी सरकार की किस नीति को लेकर सिंगापुर जाते है.

दोनो देशों के बीच दोतरफा सिरीज़ पहले भी हुई है और रद्द भी हुई है.

लेकिन एशिया कप, विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी या आईसीसी के दूसरे टुर्नामेंट में तो भारत पाकिस्तान के साथ खेलता ही है.

मदन लाल अपनी बात समाप्त करते हुए कहते है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिरीज़ होनी चाहिए क्योंकि इसका रोमांच भी एशेज़ जैसा ही है लेकिन अंत में यह सब कुछ सरकार पर ही निर्भर है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर भारत और पाकिस्तान एक दूसरे के ख़िलाफ़ न तो अपने देश में और न ही तीसरे देश में खेलेंगे... तो इस ज़मी पर खेलेंगे कहां?

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