श्रीलंकाई दर्शकों ने 1996 का सेमीफ़ाइनल याद दिला दिया
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भारत और श्रीलंका के बीच रविवार को पल्लेकल में खेले गए मुकाबले को श्रीलंकाई दर्शकों के गुस्से का सामना करना पड़ा.
भारतीय पारी के 44वें ओवर में जब भारतीय टीम जीत से महज 8 रन दूर थी, तभी श्रीलंकाई दर्शकों ने गुस्से में मैदान पर बोतलें व कागजों में आग लगाकर फेंकना शुरु कर दिया. इस वजह से मैच 35 मिनट तक रुका रहा.
इस घटना ने 21 साल पहले भारत और श्रीलंका के बीच हुए मैच की यादें ताज़ा कर दीं. क्या हुआ था उस मुकाबले में डालते हैं एक नज़र...
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तारीख: 13 मार्च 1996, जगह: कोलकाता का ईडन गार्डन मैदान, मैच: विश्व कप सेमीफाइनल
करो या मरो के इस मुकाबले में भारतीय कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था.
श्रीलंका ने अरविंद डिसिल्वा (66) और रोशन महानामा (58) के अर्धशतकों की मदद से 251/8 रनों का स्कोर खड़ा किया.
भारत के मजबूत बैटिंग ऑडर को देखते हुए मैदान में मौजूद 1 लाख दर्शक आश्वस्त थे कि जीत भारतीय टीम के हिस्से ही जाएगी.
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बिखरी भारतीय पारी
सचिन तेंदुलकर और नवजोत सिंह सिद्धू की ओपनिंग जोड़ी मैदान में उतरी. अभी भारतीय पारी में 8 रन ही जुड़े थे कि सिद्धू चंमिडा वास के शिकार बन गए.
सचिन तेंदुलकर ने संजय मांजरेकर के साथ पारी को संभालना शुरू किया. धीरे-धीरे लगने लगा की टीम इंडिया की पारी अब ट्रैक पर आ रही है, तभी 98 रनों के कुल योग पर तेंदुलकर(65) को जयसूर्या ने आउट कर दिया.
मैदान में सन्नाटा सा छा गया था. यह सन्नाटा भारतीय पारी में भी घुस गया, टीम इंडिया की पारी ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी.
कप्तान अज़हरुद्दीन और अजय जडेजा तो खाता तक नहीं खोल सके. मांजरेकर 25 रन बनाकर आउट हुए.
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दर्शकों का गुस्सा
34वें ओवर की पहली गेंद पर मुथैया मुरलीधरन ने जैसे ही आशीष कपूर को शून्य पर पवेलियन भेजा. भारतीय दर्शकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया.
उस समय भारत का स्कोर 120/8 रन था. जीत भारत से 132 रन दूर थी जबकि उसके हाथ में सिर्फ 2 विकेट बचे थे. दर्शक समझ चुके थे अब यहां से भारत की हार लगभग तय है.
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दर्शकों ने मैदान पर बोतलें फेंकना शुरू कर दिया. बोतलों के साथ-साथ वे पत्थर भी फेंकने लगे.
स्टेडियम के कुछ हिस्सों में आग भी लगा दी गई. खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें ड्रेसिंग रूम में लौटना पड़ा.
10 रन बनाकर खेल रहे विनोद कांबली मैदान से लौटते वक्त रोने लगे.
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भारतीय क्रिकेट का काला दिन
मैच रैफरी क्लाइव लॉयड काफी देर तक दर्शकों के हुड़दंग के खत्म होने का इंतजार करते रहे. पुलिस भी दर्शकों को शांत कराने की कोशिशें करती रही.
लेकिन जब लॉयड को लगा कि इन हालात में मैच पूरा नहीं हो सकता तो उन्होंने अंततः श्रीलंका को मैच का विजेता घोषित कर दिया.
यह दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक काले दिन के रूप में जाना गया. मैदान में मौजूद सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ पिच के ज्यादा टर्न पर भी सवाल खड़े किए गए. सवालों के कटघरे में भारतीय कप्तान अज़हरुद्दीन भी आए.
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मैच जीतकर फाइनल में पहुंचने वाली श्रीलंकाई टीम के लिए यह विश्वकप ऐतिहासिक साबित हुआ.
फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया को हराकर श्रीलंका विश्व विजेता बनने में कामयाब रहा.
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