कहासुनी: 'तीन साल में टूटी आस...और चलो मोदी के साथ'
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16 मई, 2017 को केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए. इस मौके पर मीडिया में बीजेपी के तीन सालों का लेखा-जोखा चलता रहा और लोग भी अपनी राय देते रहे.
बीजेपी समर्थकों ने ट्विटर पर #3SaalBemisal ट्रेंड चलाया और फ़ेसबुक पर भी मोदी सरकार के कामकाज की खूब चर्चा हुई.
बीबीसी हिंदी ने लोगों की राय जानने के लिए अपने फ़ेसबुक और ट्विटर पेज पर लोगों से पूछा कि क्या इन तीन सालों में मोदी सरकार से उनकी उम्मीदें पूरी हुई हैं? सवाल पर लोगों की ज़बरदस्त प्रतिक्रियाएं आईं. उनमें से कुछ का ज़िक्र हम यहां कर रहे हैं.
कैलाश मेहरा ने लिखा,''तीन साल मेँ टूटी आस...और चलो मोदी के साथ, ना रोज़गार ना विकास, बस महँगाई और बकवास, सबके साथ समान विनाश...बस भाषण और मन की बात.''
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अग्रवाल गणेश ने लिखा,''मोदी सरकार का सबसे बड़ा काम आज़ादी के बाद बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ. मानवता को बचाने में मोदी सरकार की पहल काबिलेतारीफ़ है.''
ज़ाकिर खान ने कहा,''इन तीन सालों में विश्व भ्रमण कर लिया है. बस अंटार्कटिक रह गया है. अब देखो वहां कब जाते हैं. ग्रेट जॉब सर, अपने पीएम को मेरा सलाम.''
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रविकांत दुबे ने लिखा,''जो लोग नहीं बोल रहे हैं वो सिर्फ़ ये जवाब दें कि मोदी जी नहीं तो कौन? मैं ना बीजेपी सपोर्टर हूं और ना मोदी सपोर्टर. बस इतना जानता हूं कि आज उपलब्ध विकल्पों में मोदी जी बेस्ट हैं. उन्होंने इन तीन सालों में देश की तरक्की के लिए दिन-रात मेहनत की.''
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मनोज कुमार ने कहा,''15 लाख में 5 लाख आपके...बाकी दे दो प्लीज़. हमको पता है कि गांव का प्रधान भी कोई काम करवाने के लिए कमीशन लेता है, लेकिन आप पांच लाख रुपयों को पार्टी फ़ंड में डाल देना. बाकी 10 लाख काफ़ी हैं...नोटबंदी के टाइम पर जो कुछ इधर-उधर करवाया, वो भी आपका ही...पर 10 लाख तो...?''
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राहुल कुमार ने कहा,''मैं खुश हूं कि सिर्फ़ 2 साल बचे हैं. इससे ज़्यादा खुशी मैं बयान नहीं कर सकता.''
विनोद ने कहा,''हमारी उम्मीदें छोड़िए साहब. जो वायदे मेनिफ़ेस्टो में किए थे, उनका क्या हुआ? इसका विश्लेषण स्वयं करें. कुछ नहीं हुआ बल्कि विपरीत हुआ.''
विनेश के चौधरी ने कहा,''वादे बड़े थे, हमने समर्थन किया. सोचा कुछ नया होगा. दो साल और सही, हो सकता है कोई और वजह मिल जाए फिर से लाने की. भाजपा का समर्थक हूं, मोदी सरकार का नहीं.''
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