जलवायु परिवर्तन: अमीर देशों से भरपाई की माँग

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बीस ऐसे देशों के मंत्री और विशेषज्ञ रविवार को ढाका में मिल रहे हैं जिन्हें डर है कि वहाँ जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा होने वाला है.
दो दिन के इस सम्मेलन में अमीर देशों से अपील की जाएगी कि वो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ज़्यादा आर्थिक और तकनीकी मदद दें.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. वे उन सब देशों की माँगें सुनेंगे जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हैं. कुछ हफ़्ते बाद ही डरबन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन भी होने वाला है.
यूँ तो पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन के परिणाम देखे जा सकते हैं. लेकिन बांग्लादेश, भूटान और मालदीव जैसे देशों का तर्क है कि आने वाले दशकों में उन पर परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा और उन्हें तुरंत सहायता की ज़रूरत है.
मिसाल के तौर पर विशेषज्ञ कहते हैं कि समुद्र का जल स्तर अगर एक मीटर बढ़ता है तो बांग्लादेश का 15 फ़ीसदी हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ जाएगा और लाखों लोग शरणार्थी बन जाएँगे.
'भरपाई चाहिए'
इन देशों का कहना है कि कार्बन उत्सर्जन के लिए सबसे ज़्यादा विकसित देश ज़िम्मेदार हैं और जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम भुगतने वाले ग़रीब देशों की अमीर देशों को मदद करनी चाहिए.
साथ ही ये भी माँग है कि अमीर देश ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बने विशेष फ़ंड के गठन का काम जल्द आगे बढ़ाएँ.
इस धनकोष का मकसद उन देशों के लिए पैसा इकट्ठा करना है जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.
ढाका सम्मेलन में ये बात भी उठाई जाएगी कि ग़रीब देशों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध करवाए ताकि ईंधन के पुरान स्रोत्रों पर निर्भरता कम हो सके.
उम्मीद जताई जा रही है कि एक साथ मिलकर उठाई आवाज़ से इन देशों की चिंताओं और बातों को बल मिलेगा.
































