कोरोना वैक्सीनेशन: आख़िर आपका नंबर कब आएगा?

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कोविड-19 वैक्सीन को लेकर कई सवाल तैर रहे हैं. एक अहम सवाल टीका वितरण को लेकर है.
लोग पूछ रहे हैं कि आख़िर मुझे कब वैक्सीन मिलेगी? कुछ मुट्ठी भर देशों ने एक निश्चित लक्ष्य तय कर लिया है लेकिन बाक़ी दुनिया में इसे लेकर कोई बहुत साफ़ तस्वीर नहीं दिखती. तो फ़िलहाल जो हालात हैं उसका जायजा ले लेते हैं?
इसमें कोई शक नहीं कोविड-19 के ख़िलाफ़ टीकाकरण ज़िंदगी और मौत का सवाल बन चुका है.
लेकिन वैक्सीनेशन की यह कवायद आसान नहीं है. इससे कई चीज़ें जुड़ी हैं. इस पूरी जद्दोजहद में जटिल वैज्ञानिक प्रक्रियाएं, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और तमाम सरकारों के विरोधाभासी बयान जैसे मामले जुड़े हैं. बड़े पैमाने पर ब्यूरोक्रेसी शामिल है और नियम-क़ानूनों का भारी दबाव भी है. लिहाजा साफ़ तौर यह तय करना बड़ा मुश्किल है पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन कब और कैसे शुरू होगी.
ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट
स्रोत: अवर वर्ल्ड इन डेटा
ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट
पूर्ण टीकाकरण वाले लोगों का प्रतिशत
| विश्व |
61
|
12,12,05,24,547 |
| चीन |
87
|
3,40,36,43,000 |
| भारत |
66
|
1,97,89,18,170 |
| अमरीका |
67
|
59,62,33,489 |
| ब्राजील |
79
|
45,69,03,089 |
| इंडोनेशिया |
61
|
41,75,22,347 |
| जापान |
81
|
28,57,56,540 |
| बांग्लादेश |
72
|
27,87,85,812 |
| पाकिस्तान |
57
|
27,33,65,003 |
| वियतनाम |
83
|
23,35,34,502 |
| मैक्सिको |
61
|
20,91,79,257 |
| जर्मनी |
76
|
18,29,26,984 |
| रसियन फेडरेशन |
51
|
16,89,92,435 |
| फिलीपिंस |
64
|
15,38,52,751 |
| ईरान |
68
|
14,99,57,751 |
| ब्रिटेन |
73
|
14,93,97,250 |
| तुर्की |
62
|
14,78,39,557 |
| फ्रांस |
78
|
14,61,97,822 |
| थाईलैंड |
76
|
13,90,99,244 |
| इटली |
79
|
13,83,19,018 |
| दक्षिण कोरिया |
87
|
12,60,15,059 |
| अर्जेंटीना |
82
|
10,60,75,760 |
| स्पेन |
87
|
9,51,53,556 |
| मिस्र |
36
|
9,14,47,330 |
| कनाडा |
83
|
8,62,56,122 |
| कोलंबिया |
71
|
8,57,67,160 |
| पेरू |
83
|
7,78,92,776 |
| मलेशिया |
83
|
7,12,72,417 |
| सऊदी अरब |
71
|
6,67,00,629 |
| बर्मा |
49
|
6,22,59,560 |
| चिली |
92
|
5,96,05,701 |
| चाइनीज ताइपे |
82
|
5,82,15,158 |
| ऑस्ट्रेलिया |
84
|
5,79,27,802 |
| उजबेकिस्तान |
46
|
5,57,82,994 |
| मोरक्को |
63
|
5,48,46,507 |
| पोलैंड |
60
|
5,46,05,119 |
| नाइजीरिया |
10
|
5,06,19,238 |
| इथियोपिया |
32
|
4,96,87,694 |
| नेपाल |
69
|
4,68,88,075 |
| कंबोडिया |
85
|
4,09,56,960 |
| श्रीलंका |
68
|
3,95,86,599 |
| क्यूबा |
88
|
3,87,25,766 |
| वेनेजुएला |
50
|
3,78,60,994 |
| दक्षिण अफ्रीका |
32
|
3,68,61,626 |
| इक्वेडोर |
78
|
3,58,27,364 |
| नीदरलैंड्स |
70
|
3,33,26,378 |
| यूक्रेन |
35
|
3,16,68,577 |
| मोजाम्बिक |
44
|
3,16,16,078 |
| बेल्जियम |
79
|
2,56,72,563 |
| संयुक्त अरब अमीरात |
98
|
2,49,22,054 |
| पुर्तगाल |
87
|
2,46,16,852 |
| रवांडा |
65
|
2,27,15,578 |
| स्वीडन |
75
|
2,26,74,504 |
| यूगांडा |
24
|
2,17,56,456 |
| ग्रीस |
74
|
2,11,11,318 |
| कजाखस्तान |
49
|
2,09,18,681 |
| अंगोला |
21
|
2,03,97,115 |
| घाना |
23
|
1,86,43,437 |
| इराक |
18
|
1,86,36,865 |
| कीनिया |
17
|
1,85,35,975 |
| ऑस्ट्रिया |
73
|
1,84,18,001 |
| इसराइल |
66
|
1,81,90,799 |
| ग्वाटेमाला |
35
|
1,79,57,760 |
| हांगकांग |
86
|
1,77,31,631 |
| चेक गणराज्य |
64
|
1,76,76,269 |
| रोमानिया |
42
|
1,68,27,486 |
| हंगरी |
64
|
1,65,30,488 |
| डोमिनिकन रिपब्लिक |
55
|
1,57,84,815 |
| स्विट्जरलैंड |
69
|
1,57,59,752 |
| अल्जीरिया |
15
|
1,52,05,854 |
| होंडूरास |
53
|
1,44,44,316 |
| सिंगापुर |
92
|
1,42,25,122 |
| बोलिविया |
51
|
1,38,92,966 |
| ताजकिस्तान |
52
|
1,37,82,905 |
| अजरबैजान |
47
|
1,37,72,531 |
| डेनमार्क |
82
|
1,32,27,724 |
| बेलारूस |
67
|
1,32,06,203 |
| ट्यूनीशिया |
53
|
1,31,92,714 |
| आइवरी कोस्ट |
20
|
1,27,53,769 |
| फिनलैंड |
78
|
1,21,68,388 |
| जिम्बाब्वे |
31
|
1,20,06,503 |
| निकारागुआ |
82
|
1,14,41,278 |
| नॉर्वे |
74
|
1,14,13,904 |
| न्यूजीलैंड |
80
|
1,11,65,408 |
| कोस्टा रिका |
81
|
1,10,17,624 |
| आयरलैंड |
81
|
1,09,84,032 |
| अल सल्वाडोर |
66
|
1,09,58,940 |
| लाओ पीपुल्स डेम रिपब्लिक |
69
|
1,08,94,482 |
| जॉर्डन |
44
|
1,00,07,983 |
| पराग्वे |
48
|
89,52,310 |
| तंजानिया |
7
|
88,37,371 |
| उरुग्वे |
83
|
86,82,129 |
| सर्बिया |
48
|
85,34,688 |
| पनामा |
71
|
83,66,229 |
| सूडान |
10
|
81,79,010 |
| कुवैत |
77
|
81,20,613 |
| जाम्बिया |
24
|
71,99,179 |
| तुर्केमेनिस्तान |
48
|
71,40,000 |
| स्लोवाकिया |
51
|
70,76,057 |
| ओमान |
58
|
70,68,002 |
| कतर |
90
|
69,81,756 |
| अफ़ग़ानिस्तान |
13
|
64,45,359 |
| गिनी |
20
|
63,29,141 |
| लेबनान |
35
|
56,73,326 |
| मंगोलिया |
65
|
54,92,919 |
| क्रोएशिया |
55
|
52,58,768 |
| लिथुआनिया |
70
|
44,89,177 |
| बुल्गारिया |
30
|
44,13,874 |
| सीरिया |
10
|
42,32,490 |
| फलस्तीन |
34
|
37,34,270 |
| बेनिन |
22
|
36,81,560 |
| लीबिया |
17
|
35,79,762 |
| नीजेर |
10
|
35,30,154 |
| डीआर कांगो |
2
|
35,14,480 |
| सियरा लियोन |
23
|
34,93,386 |
| बहरीन |
70
|
34,55,214 |
| टोगो |
18
|
32,90,821 |
| किर्गिजस्तान |
20
|
31,54,348 |
| सोमालिया |
10
|
31,43,630 |
| स्लोवेनिया |
59
|
29,96,484 |
| बुर्किना फासो |
7
|
29,47,625 |
| अल्बानिया |
43
|
29,06,126 |
| जॉर्जिया |
32
|
29,02,085 |
| लातविया |
70
|
28,93,861 |
| मौरिटानिया |
28
|
28,72,677 |
| बोत्सवाना |
63
|
27,30,607 |
| लाइबेरिया |
41
|
27,16,330 |
| मॉरीशस |
74
|
25,59,789 |
| सेनेगल |
6
|
25,23,856 |
| माली |
6
|
24,06,986 |
| मेडागास्कर |
4
|
23,69,775 |
| चैड |
12
|
23,56,138 |
| मलावी |
8
|
21,66,402 |
| मोल्डोवा |
26
|
21,65,600 |
| अर्मीनिया |
33
|
21,50,112 |
| एस्टोनिया |
64
|
19,93,944 |
| बोस्निया और हर्जेगोविना |
26
|
19,24,950 |
| भूटान |
86
|
19,10,077 |
| एफवाईआर मेसिडोनिया |
40
|
18,50,145 |
| कमारू |
4
|
18,38,907 |
| कोसोवो |
46
|
18,30,809 |
| साइप्रस |
72
|
17,88,761 |
| टिमूर-लेस्टे |
52
|
16,38,158 |
| फिजी |
70
|
16,09,748 |
| त्रिनिडाड एंड टोबैगो |
51
|
15,74,574 |
| जमैका |
24
|
14,59,394 |
| मकाऊ |
89
|
14,41,062 |
| माल्टा |
91
|
13,17,628 |
| लक्जेमबर्ग |
73
|
13,04,777 |
| दक्षिण सूडान |
10
|
12,26,772 |
| सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक |
22
|
12,17,399 |
| ब्रुनई दारुसलाम |
97
|
11,73,118 |
| गुयाना |
58
|
10,11,150 |
| मालदीव |
71
|
9,45,036 |
| लेसोथो |
34
|
9,33,825 |
| यमन |
1
|
8,64,544 |
| कांगो |
12
|
8,31,318 |
| नामीबिया |
16
|
8,25,518 |
| गाम्बिया |
14
|
8,12,811 |
| आइसलैंड |
79
|
8,05,469 |
| केप वर्डे |
55
|
7,73,810 |
| मॉन्टेनिग्रो |
45
|
6,75,285 |
| कोमोरोस |
34
|
6,42,320 |
| पापुआ न्यू गिनी |
3
|
6,15,156 |
| गिनी-बिसाऊ |
17
|
5,72,954 |
| गैबन |
11
|
5,67,575 |
| स्वाजीलैंड |
29
|
5,35,393 |
| सूरीनाम |
40
|
5,05,699 |
| समोआ |
99
|
4,94,684 |
| बेलिज |
53
|
4,89,508 |
| इक्वेटोरियल गिनी |
14
|
4,84,554 |
| सोलोमन आइलैंड |
25
|
4,63,637 |
| हेटी |
1
|
3,42,724 |
| बहामा |
40
|
3,40,866 |
| बारबाडोस |
53
|
3,16,212 |
| वनुआतू |
40
|
3,09,433 |
| टोंगा |
91
|
2,42,634 |
| जर्सी |
80
|
2,36,026 |
| जिबूटी |
16
|
2,22,387 |
| सेलेल्स |
82
|
2,21,597 |
| साओ टोम एंड प्रिंसिप |
44
|
2,18,850 |
| आइल ऑफ़ मैन |
79
|
1,89,994 |
| गर्नज़ी |
81
|
1,57,161 |
| अंडौरा |
69
|
1,53,383 |
| किरिबाटी |
50
|
1,47,497 |
| केमैन आइलैंड्स |
90
|
1,45,906 |
| बरमूडा |
77
|
1,31,612 |
| एंटिगा एंड बरबूडा |
63
|
1,26,122 |
| सेंट लूसिया |
29
|
1,21,513 |
| जिब्राल्टर |
123
|
1,19,855 |
| फरोर आइलैंड्स |
83
|
1,03,894 |
| ग्रेनाडा |
34
|
89,147 |
| ग्रीनलैंड |
68
|
79,745 |
| सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडिन्स |
28
|
71,501 |
| लिचटेन्सटाइन |
69
|
70,780 |
| टर्क एंड कैकस आइलैंड्स |
76
|
69,803 |
| सैन मरीनो |
69
|
69,338 |
| डोमोनिका |
42
|
66,992 |
| मोनैको |
65
|
65,140 |
| सेंट किट्स एंड नेविस |
49
|
60,467 |
| ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स |
59
|
41,198 |
| कुक आइलैंड्स |
84
|
39,780 |
| एंग्विला |
67
|
23,926 |
| नौरू |
79
|
22,976 |
| बुरुंडी |
0.12
|
17,139 |
| तुवालू |
52
|
12,528 |
| सेंट हेलेना |
58
|
7,892 |
| मॉन्टसेराट |
38
|
4,422 |
| फॉकलैंड |
50
|
4,407 |
| नियू |
88
|
4,161 |
| टोकेलाउ |
71
|
1,936 |
| पिटकेयर्न |
100
|
94 |
| इरिट्रिया |
0
|
0 |
| उत्तर कोरिया |
0
|
0 |
| दक्षिण जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड |
0
|
0 |
| ब्रितानी हिंद महासागर क्षेत्र |
0
|
0 |
| वैटिकन |
0
|
0 |
पूरा इंटरैक्टिव देखने के लिए अपने ब्राउज़र को अपग्रेड करें
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है लेकिन प्रत्येक स्थान के लिए निर्धारित ताज़ा टीकों की संख्या को नहीं दर्शाती है. कुल टीकाकरण से तात्पर्य दी गई खुराक़ की संख्या से है और इसमें पूर्ण टीकाकरण के लिए आवश्यक खुराक़ के अलावा बूस्टर खुराक़ शामिल हो सकते हैं. पूर्ण टीकाकरण की परिभाषा देश और टीके के प्रकार से अलग अलग हो सकती है. समय के साथ इसमें बदलाव संभव है.
स्रोत: अवर वर्ल्ड इन डेटा
आखिरी अपडेट: 5 जुलाई 2022, 5:58 pm IST
इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट में ग्लोबल फॉरकास्टिंग की डायरेक्टर अगाथे डेमेरिस ने इस मामले में काफ़ी तफसील से कुछ रिसर्च किए हैं.
इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट ने कई चीज़ों पर ग़ौर किया है. इसने इस पहलू का आकलन किया कि दुनिया में वैक्सीन की उत्पादन क्षमता क्या है. लोगों को टीका लगाने के लिए किस तरह के हेल्थ इन्फ्ऱास्ट्रक्चर की ज़रूरत है. अलग-अलग देशों की आबादी क्या है और यह भी कि क्या वे वैक्सीन लगाने का खर्च उठा सकते हैं?
हालांकि इस रिसर्च के ज़्यादातर निष्कर्ष अमीर और ग़रीब देशों में अंतर की अनुमानित लाइनों पर ही हैं. जैसे ब्रिटेन और अमेरिका में इस वक़्त कोविड-19 वैक्सीन की सप्लाई काफ़ी अच्छी है. इन देशों में सप्लाई की स्थिति इसलिए अच्छी है क्योंकि इनके पास इन्हें विकसित करने में काफ़ी पैसा लगाने की क्षमता है. इसलिए वैक्सीनेशन के मामले में ये शीर्ष पर दिख रहे हैं. कुछ दूसरे अमीर देश जैसे कनाडा और यूरोपीय यूनियन के देश इनसे थोड़ा ही पीछे हैं.
कम आय वाले ज़्यादातर देशों में अभी तक वैक्सीनेशन शुरू भी नहीं हुई है. लेकिन कुछ देशों ने इस मामले में चौंकाया है. ख़ास मध्य आय वर्ग के देशों ने. पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन प्रोग्राम किस तरह से चल रहा है उसका एक जायजा आप यहां ले सकते है.
कई देशों के प्रदर्शन ने चौंकाया
पिछले साल कनाडा की इस बात की ख़ासी आलोचना हुई थी कि उसने अपनी आबादी के टीकाकरण के लिए ज़रूरत की तुलना में पाँच गुना ज़्यादा वैक्सीन ख़रीद ली है. लेकिन ऐसा लगता है कनाडा प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन डिलिवरी के लिए तैयार नहीं है.
कनाडा ने यूरोपीय देशों की फैक्टरियों में बनने वाली वैक्सीन में निवेश करने का फ़ैसला किया क्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि ट्रंप प्रशासन इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है. लेकिन यह दांव ग़लत साबित हुआ. यूरोपीय यूनियन की फ़ार्मा फैक्टरियां सप्लाई की दिक्क़तों का सामना कर रही हैं और अब अमेरिका नहीं ईयू वैक्सीन निर्यात पर प्रतिबंध की चेतावनी दे रहा है.
अगाथे डेमेरिस कहती हैं, "जब तक यूरोपीय मार्केट में पर्याप्त वैक्सीन नहीं होगी तब तक कनाडा की ओर से बड़ी मात्रा में वैक्सीन आयात करने की योजना धरी रह जाएगी."
हालाँकि कुछ ऐसे देश हैं, जो वैक्सीनेशन के मामले में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. इस रिपोर्ट को लिखते समय अपनी आबादी को वैक्सीन लगाने का मामले में सर्बिया दुनिया में आठवें नंबर पर पहुंच चुका था. इस मामले में यह यूरोपीय यूनियन के किसी भी देश से आगे था.

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सर्बिया की इस सफलता में कुछ हद तक तो उसके बेहतर वैक्सीनेशन प्रोग्राम का हाथ है लेकिन उसे वैक्सीन डिप्लोमेसी का भी फ़ायदा मिला है. ख़ास कर चीन और रूस के बीच चल रही प्रतिस्पर्द्धा का. दोनों अपनी-अपनी वैक्सीन भेज कर पूर्वी यूरोपीय देशों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं. सर्बिया उन चंद देशों में शामिल है, जहां रूसी वैक्सीन स्पूतनिक v और चीनी वैक्सीन साइनोफ़ार्म, दोनों उपलब्ध हैं.
कागज पर देखने पर ऐसा लगता है कि सर्बिया के पास सभी वैक्सीन मौजूद है. वह अपने लोगों को फाइजर, स्पूतनिक या साइनोफार्म वैक्सीन लगा सकता है. लेकिन हक़ीक़त कुछ और है. ज़्यादातर लोगों को वहां सिर्फ़ साइनोफार्म वैक्सीन ही लगाई जा रही है. लगता है चीन का यहां जो असर है वह लंबे समय तक रहने वाला है. जो देश साइनोफार्म की पहली और दूसरी डोज का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर बूस्टर डोज भी चीन से ही मंगा सकते हैं.
संयुक्त अरब अमीरात भी साइनोफार्म पर काफ़ी ज़्यादा निर्भर है. यहां जो वैक्सीन डोज दी जा रही है, उनमें 80 फ़ीसदी साइनोफार्म की ही है. संयुक्त अरब अमीरात में तो साइनोफार्म वैक्सीन बन भी रही है.
अगाथे डेमेरिस का कहना है कि चीन इन देशों में अपनी प्रोडक्शन फैसिलिटी और प्रशिक्षित कामगारों के साथ आ रहा है. लिहाजा इन देशों में चीन का असर लंबे वक्त तक रहने वाला है. अब अगर भविष्य में इन देशों को किसी भी चीज के लिए चीन को ना कहना होगा तो उनके लिए यह काफी मुश्किल होगा. उन्हें बड़ी चतुराई से इस तरह के मामलों को संभालना होगा. "
ग्लोबल वैक्सीन सुपर-पवार बनने का कोई फ़ायदा नहीं
हालांकि ग्लोबल वैक्सीन सुपर-पावर बनने का मतलब यह नहीं है कि आपने अपने देश में वैक्सीनेशन पूरी कर ली है अब दूसरों को वैक्सीन बाँट रहे हैं.
इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने वाले दो देश चीन और भारत 2022 के अंत तक भी अपने यहां पर्याप्त टीकाकरण नहीं कर पाएंगे. इसकी एक बड़ी वजह तो यह है कि दोनों के यहां बहुत बड़ी आबादी है और हेल्थ वर्करों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है.
अदार पूनावाला पर सारा दारोमदार
कोविड वैक्सीन बनाने में भारत की सफलता मुख्य तौर पर एक व्यक्ति पर टिकी है और वह हैं अदार पूनावाला. उनकी कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन मैन्युफैक्चर है.
पिछले साल के मध्य में उनके परिवार के ही लोगों को लग रहा था कि उनका दिमाग़ ख़राब हो गया है क्योंकि अदार अपना ख़ुद का करोड़ों डॉलर उन वैक्सीन पर लगा रहे थे, जिनके बारे में यह तय नहीं थे कि वे कारगर ही साबित होंगी.
लेकिन इस साल जनवरी में उन वैक्सीन की पहली खेप भारत सरकार को मिल गई. इन्हें ऑक्सफोर्ड और एस्ट्रेजेनेका ने विकसित किया था. अब अदार पूनावाला की कंपनी हर दिन इन वैक्सीन की 24 लाख डोज बना रही है. भारत में वैक्सीन सप्लाई करने वाली दो कंपनियों में से एक उन्हीं की कंपनी है. उनकी कंपनी ब्राज़ील, मोरक्को, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्ऱीका भी वैक्सीन सप्लाई कर रही है.
अदार पूनावाला कहते हैं, "मैंने सोचा था वैक्सीन बनाने के का दबाव और अफ़रातफ़री जल्द ख़त्म हो जाएगी. लेकिन अब लगता है कि असली चुनौती हर किसी को ख़ुश करने की है".
वह कहते हैं, "मैंने सोचा था कि वैक्सीन बनाने वाले कई मैन्युफैक्चरर होंगे और उनकी वजह से सप्लाई भरपूर रहेगी लेकिन दुर्भाग्य से 2021 की पहली तिमाही और शायद दूसरी तिमाही में भी हम सप्लाई में कोई ठोस इजाफ़ा नहीं कर सकेंगे.''
अदार पूनावाला कहते हैं, "प्रोडक्शन रातोरात नहीं बढ़ाया जा सकता. लोग सोचते हैं कि शायद सीरम इंस्टिट्यूट के हाथ कोई जादुई नुस्खा लग गया है. हाँ, अपने काम में हम अच्छे है. लेकिन हमारे हाथ में कोई जादू की छड़ी नहीं है."
हालांकि अदार पूनावाला इस मामले में आगे हैं क्योंकि उनकी कंपनी ने पिछले साल मार्च से ही वैक्सीन बनाने की अपनी क्षमताएं मज़बूत करनी शुरू कर दी थी. उन्होंने पिछले साल अगस्त से ही केमिकल और शीशियां जुटानी शुरू कर दी थीं.
विज्ञान के साथ कला भी है वैक्सीन बनाना
प्रॉडक्शन के दौरान वैक्सीन की मात्रा में काफ़ी घट-बढ़ हो सकती है. वैक्सीन प्रॉडक्शन के दौरान कई स्टेज पर गड़बड़ी हो सकती है
अगाथे डेमेरिस कहती हैं, "वैक्सीन बनाना जितना विज्ञान है उतना कला भी है."
जिन मैन्यूपैक्चरर्स ने अब अपना प्रोडक्शन शुरू किया है, उन्हें इनके उत्पादन में महीनों लग जाएंगे. अगर कोरोना वायरस की कोई नई किस्म आई तो उसके मुक़ाबले के लिए बूस्टर डोज बनाने में भी ज्यादा समय लगेगा.
कोवैक्स की पहल और डिलीवरी की दिक्क़त
पूनावाला कहते हैं कि वह सबसे पहले भारत में वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसके बाद वह अफ्ऱीका में इसकी सप्लाई सुनिश्चित करें. उनकी कंपनी यह काम एक ख़ास स्कीम के ज़रिये कर रही है, जिसका नाम है कोवैक्स फैसिलिटी. कोवैक्स डब्ल्यूएचओ, वैक्सीन अलायंस Gavi और सेंटर फॉर एकेडेमिक प्रीपेयर्डनेस यानी CEPI की संयुक्त पहल है. इसका मकसद दुनिया के हर देश को सस्ती वैक्सीन मुहैया कराना है.
जो देश वैक्सीन का खर्चा नहीं उठा सकते उन्हें एक खास फंड के ज़रिये मुफ़्त में वैक्सीन दी जाएगी. बाक़ी देशों से पैसे लिए जाएंगे. लेकिन ये देश एक ब्लॉक के तहत वैक्सीन ख़रीदने के लिए मोल-भाव करेंगे तो उन्हें वाजिब दाम पर यह मिल सकती है. ब्लॉक के ज़रिए वैक्सीन ख़रीदने की तुलना में अकेले वैक्सीन ख़रीदना ज्यादा महंगा पड़ेगा.
कोवैक्स फ़रवरी के आखिर में वैक्सीन डिलीवरी की योजना बना रहा है.
इस बीच कोवैक्सीन की इस पहल का महत्व यह कह कर कम करने की कोशिश जा रही है कि ज्यादातर देश अपने-अपने स्तर पर वैक्सीन खरीदने के लिए मोलभाव में लगे हैं.

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अदर पूनावाला कहते हैं कि अफ्ऱीकी देशों का लगभग हर राष्ट्राध्यक्ष उनसे संपर्क हैं. वे चाहते हैं कि हम अपने स्तर पर ही वैक्सीन ख़रीद लें. पिछले सप्ताह युगांडा सरकार ने ऐलान किया कि उसने सीरम इंस्टिट्यूट से एक करोड़ अस्सी लाख वैक्सीन, प्रति वैक्सीन 7 डॉलर के हिसाब से ख़रीदने का फ़ैसला किया है, जबकि कोवैक्स इस वैक्सीन को 4 डॉलर प्रति वैक्सीन के हिसाब से ख़रीद रहा है. लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि इस संबंध में युगांडा सरकार से बातचीत चल ही रही है. सौदा पक्का नहीं हुआ है.
पूनावाला डब्ल्यूएचओ की अनुमति मिलते ही एस्ट्रेजेनेका की 20 करोड़ वैक्सीन कोवैक्स को मुहैया कराएंगे. उन्होंने कोवैक्स को और 90 करोड़ डोज देने का वादा किया है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि यह सप्लाई कब तक पूरी होगी.
अदर पूनावाला कोवैक्स स्कीम के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि वह मानते हैं कि इसमें कई दिक्कतें हैं. दरअसल कोवैक्स कई अलग-अलग वैक्सीन निर्माताओं से डील कर रहा है. लेकिन हर कोई अलग कीमत और अलग डिलीवरी टाइमलाइन ऑफर कर रहा है.
अगाथे डेमेरिस और इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट को कोवैक्स की कोशिशों से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है. उनका मानना है योजना के मुताबिक चीजें सही भी रहीं तो इस साल किसी भी देश के 20 से 27 फीसदी आबादी को ही वैक्सीन देने का लक्ष्य हासिल हो सकेगा. डेमेरिस कहती हैं, " इससे थोड़ा बहुत ही फर्क पड़ेगा. यह कोई बड़ा गेंम चेंजर साबित नहीं होने जा रहा."

इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि कुछ देशों में तो 2023 तक भी कोविड टीकाकारण पूरा नहीं होने वाला. दरअसल कुछ देशों के लिए वैक्सीन प्राथमिकता नहीं भी हो सकती है. खास कर उन देशों में जहां युवा आबादी है और जिन्हें यह नहीं लगता कि उनके यहां बड़ी तादाद में लोग बीमार पड़ सकते हैं.
इस स्थिति में एक समस्या यह है कि यह वायरस अगर बढ़ा तो फैलेगा भी. बाद में वैक्सीन रोधी वायरस भी फैल सकता है. हालांकि यह कोई बुरी खबर नहीं है क्योंकि वैक्सीन पहले से तेज गति से बनाई जा रही हैं. फिर भी यह काम अभी भी बहुत बड़ा है. दुनिया में अभी 7.7 अरब लोगों को कोविड का टीका लगाया जाना है. इस बड़े पैमाने पर टीकाकरण की कोशिश अब से पहले कभी नहीं हुई है.
डेमेरिस का मानना है कि सरकारों को वैक्सीन के बारे में अपने लोगों के प्रति ईमानदार रहने की कोशिश करनी चाहिए. उन्हें लोगों को यह बताना चाहिए कि इस वक्त वैक्सीनेशन की क्या संभावना है.
"हालांकि किसी सरकार के लिए यह कहना काफी कठिन है कि हम कई सालों तक वैक्सीनेशन के बाद भी पूरी आबादी को कवर नहीं कर पाएंगे. कोई भी यह सुनना पसंद नहीं करेगा."
डेटा जर्नलिस्ट - बेकी डेल और नासोज स्टिलियोनो
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