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लाइव, ईरान युद्ध से जुड़े ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया

ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी है.

सारांश

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह

  1. ईरान युद्ध से जुड़े ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया

    ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी है.

    सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर, जो कि न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट नेता हैं, उन्होंने भाषण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से जुड़े फ़ैसले हमारे देश के इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत ग़लतियों में गिने जाएंगे."

    उनका कहना है कि ट्रंप "अपने उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताने में नाकामयाब रहे, वह सहयोगियों को दूर कर रहे हैं और अमेरिकी लोगों की रोज़मर्रा की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं."

    वहीं रिपब्लिकन नेता और साउथ कैरोलीना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के भाषण पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि ईरान के पास समझौता करने या और बमबारी का सामना करने का विकल्प है.

    ग्राहम ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे लक्ष्यों की रूपरेखा दी है जो समय के साथ इस शासन के टिके रहने की क्षमता को ख़त्म कर देंगे."

    यह बयान ट्रंप की उस चेतावनी के संदर्भ में है जिसमें उन्होंने ईरान के इलेक्ट्रिक ग्रिड पर हमले की बात कही थी.

    उन्होंने कहा, "अगर आप यह समझौता नहीं करते हैं, तो हम उन सभी चीज़ों को नष्ट कर देंगे जिनकी आपको ज़रूरत होगी. यह इस अभियान का निर्णायक क्षण था."

  2. ईरानी दूतावास ने क्यों कहा, 'भारतीय सुरक्षित हाथों में हैं'

    ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने बुधवार को कहा कि 'होर्मुज़ स्ट्रेट के भविष्य का फ़ैसला सिर्फ़ ईरान और ओमान तय करेंगे'.

    उनके इस बयान को दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित ईरानी दूतावासों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया है.

    भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी इसे साझा किया है और अपने एक अन्य पोस्ट में कहा, "हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं है."

    होर्मुज़ को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं. ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से इस रास्ते से भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों के जहाज़ों को ही गुजरने की अनुमति दी है.

    इस संकरे समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनियाभर में तेल की क़ीमतें बढ़ गई हैं. दुनियाभर का 20 फ़ीसदी ऊर्जा व्यापार इसी रास्ते से होता है.

  3. ट्रंप के संबोधन के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार के वायदा कारोबार में गिरावट

    ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन का बाज़ारों पर नकारात्मक असर हुआ है.

    एक ओर वैश्विक क्रूड की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाज़ार के वायदा कारोबार (फ़्यूचर्स) में गिरावट आई है.

    डाउ जोंस और एस एंड पी 500 फ़्यूचर्स क़रीब 0.7% नीचे हैं, जबकि नैस्डैक फ़्यूचर्स लगभग 1% गिरा है.

    शेयर बाज़ार में फ़्यूचर्स ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जो निवेशकों को भविष्य की किसी तारीख़ पर तय क़ीमत पर शेयर ख़रीदने या बेचने की अनुमति देते हैं.

    यह एक तरह का दांव होता है, जिसमें यह पता चलता है कि निवेशक बाज़ार की दिशा को किस ओर जाते हुए देखते हैं. ये भी माना जाता है कि फ्यूचर्स मार्केट शेयर बाज़ार की दिशा बताता है..

  4. डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन के फ़ौरन बाद तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में संबोधन के बाद वैश्विक तेल क़ीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उनका यह संबोधन ईरान में जारी युद्ध को लेकर था.

    बीबीसी संवाददाता पीटर हॉकिन्स के मुताबिक़, जब ट्रंप ने अपना संबोधन शुरू किया, उससे पहले बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की क़ीमत क़रीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर थी. लेकिन भाषण के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव आया.

    लेकिन अब संबोधन ख़त्म होने के बाद क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं और फ़िलहाल क़रीब 4% बढ़कर 105.38 डॉलर पर पहुंच गई है.

    ऐसा माना जा रहा था कि ट्रंप होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर कुछ एलान कर सकते हैं. लेकिन इससे जुड़ा कोई अपडेट नहीं आने पर तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

    होर्मुज़ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% ऊर्जा व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से होता है.

    28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह मार्ग लगभग बंद है, क्योंकि ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों के जवाब में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज़ों पर हमला करने की धमकी दी है.

  5. इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी

    इंडोनेशिया में गुरुवार सुबह 7.4 तीव्रता का एक तेज़ भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है.

    अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप की शुरुआती तीव्रता 7.8 दर्ज की गई थी. यह स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह 06:48 बजे मोलुक्का सागर में आया.

    भूकंप का केंद्र तेरनाते शहर से लगभग 120 किलोमीटर दूर था, जो एक छोटा लेकिन घनी आबादी वाला द्वीप है और जिसकी आबादी दो लाख से अधिक है.

    हवाई स्थित सुनामी वार्निंग सिस्टम ने कहा कि भूकंप के केंद्र से एक हज़ार किलोमीटर के दायरे में इंडोनेशिया, फ़िलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाक़ों में लहरें उठने की संभावना है.

  6. राष्ट्रपति ट्रंप का 'ईरान पर एक महत्वपूर्ण अपडेट' को लेकर कुछ ही देर में संबोधन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही समय में "ईरान पर एक महत्वपूर्ण अपडेट" के साथ जनता को संबोधित करने वाले हैं.

    माना जा रहा है कि वह इस संबोधन में अमेरिकी सैन्य सफलताओं को दोहराएंगे और जनता को आश्वस्त करेंगे कि ईरान में चल रहा अभियान आने वाले हफ़्तों में कम या समाप्त हो जाएगा.

    इस संबोधन से पहले, बुधवार को ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रम पर एक नज़र डालते हैं.

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि युद्ध के एक महीने बाद ईरान में 12,300 से ज़्यादा टारगेट्स पर हमला किया गया है. उसका कहना है कि इन हमलों में ईरानी जहाज़ों, सैन्य कमांड केंद्रों और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों को "नुक़सान पहुंचाया या नष्ट कर दिया" गया है.

    खाड़ी देशों पर ईरानी हमले जारी हैं. संयुक्त अरब अमीरात और क़तर ने मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब दिया है, जबकि ब्रिटिश सैनिकों का कहना है कि उन्होंने जॉर्डन, बहरीन और साइप्रस सहित कई देशों के हवाई क्षेत्र में ईरान के 10 ड्रोन गिराए हैं.

    ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्धविराम की मांग वाली ख़बरें "ग़लत और बेबुनियाद" हैं. ट्रंप के भाषण से पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकियों के नाम एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने इस युद्ध को अपने देश पर "क़ब्ज़ा और हमला" बताया.

    साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोप और खाड़ी के अरब पड़ोसी देशों के आम लोगों के प्रति ईरान की कोई दुर्भावना नहीं है.

    यूरोप में ट्रंप की उन टिप्पणियों के बाद चिंता बढ़ रही है, जिनमें उन्होंने संकेत दिया था कि अगर सहयोगी देश अमेरिकी सेना के साथ शामिल होने के उनके अनुरोध को नहीं मानते हैं तो अमेरिका नेटो सैन्य गठबंधन से बाहर हो सकता है.

  7. नमस्कार!

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा.

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