धधक रहे अमेरिका के जंगल, लाखों एकड़ ज़मीन हुई बेकार

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के जंगलों में आग

अमेरिकी राज्य ओरेगन के जंगलों में आग लगी हुई है. इसे देश की सबसे भयावह आग बताया जा रहा है. इस आग की चपेट में जंगल की तीन लाख एकड़ ज़मीन आ चुकी है.

आग की भयावहता को देखते हुए हज़ारों लोगों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है.

दो हज़ार से अधिक फ़ायरफ़ाइटर्स तथाकथित बूटलेग फ़ायर को शांत करने के काम में जुटे हुए हैं. ओरेगन के इतिहास में यह अब तक की सबसे भयानक आग में से एक है.

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छह जुलाई से लगी यह आग लगातार फैल रही है. इसके बढ़ने का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यह अभी तक लॉस एंजिल्स जितने बड़े क्षेत्र को झुलसा चुकी है

यह अमेरिका के अलग-अलग 13 राज्यों में 80 जगहों पर आग लगी है. हीटवेव और तेज़ हवाओं के कारण लगी आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है.

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बूटलेग फ़ायर, यह नाम पास के ही बूटलेग स्प्रिंग के नाम पर रखा गया है.

इस आग से सबसे अधिक उस इलाक़े के ग्रामीण प्रभावित हुए हैं. कम से कम 2,000 लोगों को अपना घरबार छोड़ना पड़ा है. आग की चपेट में आकर अब तक कम से कम 160 घर और इमारतें नष्ट हो चुकी हैं.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि आग की परिधि के एक चौथाई हिस्से पर काबू पा लिया गया है.

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फ़ायर इंसिडेंट कमांडर जो हेसेल ने सोमवार को एक बयान में कहा, "हम दिन- रात आग पर काबू पाने के लिए काम कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "यह आग एक चुनौती है और आने वाले समय में भी यह चुनौती रहेगी."

इस आग में अपना घर खो देने वाले बेली शहर के सैय्यद बे ने कहा कि वो दूर खड़े होकर देख रहे थे और आग उनके घर को अपने चपेट में लेती जा रही थी.

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पोर्टलैंड के दक्षिण-पूर्व में लगी आग अब तक हज़ारों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा चुकी है और गंभीर बात यह कि यह लगातार बढ़ रही है.

क्लैमथ फ़ॉल्स और रेडमंड सहित कई शहरों में लोगों के लिए निकासी केंद्र बनाए गए हैं.

नेशनल इंटरएजेंसी फ़ायर सेंटर के अनुसार, इस साल मुख्य रूप से पश्चिमी राज्यों में जंगल की आग पहले ही 1.2 मिलियन एकड़ से अधिक ज़मीन को अपनी चपेट में ले चुकी है.

अकेले कैलिफ़ोर्निया में पिछले साल की आग से तुलना करें तो इस बार यह पांच गुना अधिक विकराल है.

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कई वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से गर्म, शुष्क मौसम का ख़तरा बढ़ जाता है जिससे जंगल में आग लगने की आशंका भी बढ़ जाती है.

औद्योगिक दौर शुरू होने के बाद से धरती का तापमान लगभग 1.2 सेंटीग्रेट पहले ही बढ़ चुका है और अगर आगे भी तापमान बढ़ता रहा तो इसके कई ख़तरे सामने आ सकते हैं. वैज्ञानिकों की सलाह है कि इससे बचने के लिए ज़रूरी है कि दुनिया भर की सरकारें उत्सर्जन को कम करें.

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