असम-अरुणाचाल में बाढ़ की स्थिति गंभीर

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असम और इससे सटे सीमावर्ती अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र में आई बाढ़ से हालात काफी बिगड़ गए हैं.

असम राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रविवार की शाम छह बजे मिली रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 14 ज़िलों के 1206 गांव इस समय बाढ़ की चपेट में हैं. प्रशासन ने 81 राहत शिविर और 50 राहत केंद्र खोले हैं.

बाढ़ के पानी में डूबने से पिछले 24 घंटे के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई है. आपदा विभाग ने लखीमपुर में एक और मोरीगांव जिले में एक व्यक्ति के बाढ़ की वजह से मरने की पुष्टि की है.

जबकि तिनसुकिया ज़िले के मार्घेरिटा में बाढ़ के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई है. डिब्रूगढ़ जिले के चाबुवा के पास स्थित मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल का पैतृक गांव बिंधाकटा मुलुकगांव भी बाढ़ की चपेट में है.

बाढ़ से पूरे राज्य में पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए है. जबकि प्रदेश के आठ ज़िलों में प्रशासन की तरफ से खोले गए 70 राहत शिविरों में करीब 22 हजार बेघर लोगों ने शरण ले रखी है.

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को राहत और बचाव कार्य में तैनात किया गया है. संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है.

आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कई जगहों पर ब्रह्मपुत्र समेत धनसिरी, जिया भराली, बेकी और संकोश नदियां अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. जबकि इन नदियों में पानी के तेज बहाव के कारण कई जगह बांध टूट जाने से स्तिथि और बिगड़ गई.

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रिपोर्ट के मुताबिक काजीरंगा नेशनल पार्क बाढ़ का पानी घुसने से अभयारण्य के अधिकतर जानवर कार्बी पहाड़ी की तरफ पलायन कर गए है. असम में जोरहाट, गोलाघाट, बरपेटा, लखीमपुर और बंगाईगांव जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए है.

उधर अरुणाचल प्रदेश में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. जल संसाधन विभाग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नोआ–दिहिंग नदी से नामसाई जिले के अंतर्गत आने वाला पूरा लेकांग सर्किल डूब गया है.

प्रदेश में लोहित, कामलांग, टेंगापानी नदियां उफान पर हैं और ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए संबंधित जिलों के प्रशासन ने आपातकालीन योजनाएं बनाई हैं.

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