नीतीश कुमार जब बिहार विधानसभा स्पीकर से बोले- 'ज़रा संविधान देख लीजिए'
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"ज़रा संविधान देख लीजिए. आप संविधान देख लीजिए."
कई लोगों को नसीहत नज़र आ रही ये सलाह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा को दी.
नीतीश कुमार ने कहा, "सारे लोगों को एक बात जानना चाहिए, संविधान क्या कहता है? कॉन्स्टिट्यूशन निकालिए. आप इस तरह हाउस चलाइएगा? मुझे तकलीफ हुई है."
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्पीकर विजय कुमार सिन्हा के बीच विधानसभा में इस अंदाज़ में हुए सवाल-जवाब राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में चर्चा की वजह बन गए हैं. कई लोग इसे लेकर राज्य के सत्ताधारी गठबंधन की सेहत से जुड़े सवाल भी पूछ रहे हैं.
बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार है. स्पीकर विजय कुमार सिन्हा बीजेपी की टिकट पर लखीसराय से विधायक चुने गए हैं.
बिहार की विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने कहा है कि इस मामले से 'सदन और बिहार की मर्यादा तार-तार हो गई' है.
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क्या था मामला?
मुख्यमंत्री और स्पीकर के बीच 'बहस' के पीछे सत्ताधारी गठबंधन में शामिल बीजेपी के एक विधायक की ओर से बढ़ते अपराधों को लेकर उठाया गया सवाल था.
विधायक संजय सरावगी ने कहा, "नौ लोगों की हत्या कर दी गई. सरकार ने कहा कि आठ व्यक्ति की हत्या हुई है. तीन व्यक्तियों की हत्या अपराधियों द्वारा की गई और पांच व्यक्तियों की हत्या अन्य कारणों से हुई. मैं पूछना चाहता हूं माननीय मंत्री जी से शेष पांच की हत्या किस कारण से हुई. किसी ने तो हत्या की. तो वो कौन हत्यारा था. किस ने हत्या की. उस पर क्या कार्रवाई हुई."
विधायक सरावगी ने आगे कहा, "अध्यक्ष महोदय पुलिस की जो छवि गिर रही है, वो चिंता का विषय है."
उन्होंने इन तमाम मामलों के साथ स्पीकर के क्षेत्र लखीसराय से जुड़े मामले को भी उठाया.
सरावगी ने कहा, "और वो जो मामला चल रहा है लखीसराय वाला, हम बार-बार उस मामले से जोड़कर इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सरकार निर्दोष लोगों को पकड़ रही है और दोषी लोगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. "
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बीते महीने लखीसराय में कई लोगों को निषेधाज्ञा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था. रिपोर्टों के मुताबिक स्पीकर सिन्हा ने इस मामले में नाखुशी जाहिर की थी. आरोप लगे कि कई लोगों को ग़लत तरह से गिरफ़्तार किया गया है. इस मामले में सदन की एक समिति ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वो लखीसराय में एक डिप्टी एसपी और एसएचओ की ओर से स्पीकर से किए गए कथित दुर्व्यवहार की जांच कराएं.
विधानसभा में बिहार सरकार के मंत्री बिजेंद्र यादव ने बताया, "महोदय लगातार पुलिस कार्रवाई कर रही है."
विधायक सरावगी ने दोबारा सवाल उठाया और स्पीकर से कहा, "आप हमारे कस्टोडियन हैं. आप ख़ुद जान रहे हैं कि निर्दोष को पकड़ लिया गया है. इसलिए सरकार को समयबद्ध बताना चाहिए."
इसके बाद स्पीकर सिन्हा ने मंत्री से कहा, "इस मामले को लेकर सदन में कई बार हंगामा हुआ है. परसों इस पर पूरी डिटेल जानकारी लेकर के रिपोर्ट दीजिए."
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नीतीश कुमार ने क्या कहा?
कुछ देर बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पीकर के निर्देश को लेकर प्रतिक्रिया दी. उनका अंदाज़ बेहद तल्ख था.
नीतीश कुमार ने कहा, "इसका (जवाब) परसों फिर दीजिए ये (कहना) बिल्कुल नियमों के प्रतिकूल है.ये (मंत्री) बता रहे हैं कि पूरी इन्क्वायरी हो रही है तो हो गया."
उन्होंने आगे कहा, "मुझको तो आश्चर्य होता है. हम इतने दिनों से हैं फिर इस तरह की बात होती है. सारे लोगों को एक बात जानना चाहिए, संविधान क्या कहता है?"
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "न हम किसी को फ़ंसाते हैं और न हम किसी को बचाते हैं ये काम नहीं है सरकार का. ये बात आप क्यों बार बार कर रहे हैं. मैं अपने सभी सदस्यों से भी कहूंगा कि (क्या) इस तरह से बार-बार आप इस सवाल को पूछिएगा? जब जवाब दे दिया गया कि इन्क्वायरी हो रही है. इन्क्वायरी की रिपोर्ट से आपको मतलब है या रिपोर्ट कोर्ट में जाएगी? (क्या) हाउस को अधिकार है? कॉन्स्टिट्यूशन निकालिए. आप इस तरह हाउस चलाइएगा. मुझे तकलीफ हुई है."
नीतीश कुमार ने ये भी कहा, "आपको मालूम है हमने क्या क्या कहा है. साठ दिन में पूरी इन्क्वायरी करो. डिपार्टमेंट के माध्यम से हम पूरी मुस्तैदी से लगे हैं. (अगर) कहीं भी कोई क्राइम करेगा, उसको किसी को बचाने नहीं देंगे हम लोग. अपने इलाके की किसी चीज को लेकर ये इंटरफिरेंस नहीं होना चाहिए.
ये बात किसी भी तरह से मंजूर नहीं है. "
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स्पीकर ने क्या कहा?
इस बीच स्पीकर सिन्हा ने कहा, " आसन की बात भी सुनी जाए. माननीय मुख्यमंत्री जी जब प्रश्नकर्ता ने कुर्की जब्ती की बात उठाई तो आपके माननीय मंत्री जी जवाब नहीं दे पाए."
जब मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सदन ऐसा नहीं चलेगा' तो स्पीकर बोले, "तो आप ही बता दें जैसे चलेगा."
स्पीकर सिन्हा ने कहा, "कृपया मेरी स्थिति को समझें. मामला प्रिवलेज कमेटी के पास जाने के बाद शुरुआत में मेरी कोशिश थी कि इस मामले में किसी बहस में न पड़ूं. लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य बार-बार मामला उठा रहे थे. मैं सदन का कस्टोडियन (संरक्षक) हूं. "
बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "सुन लीजिए. ये बात हुई है तो मैं आज भी पूछूंगा डिपार्टमेंट से कि क्या कोई दिक्कत हुई है?मैं इस केस के बारे में पूरी जांच करूंगा."
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घटनाक्रम पर प्रतिक्रियाएं
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी है और सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वीडियो शेयर किया जा रहा है.
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सदन की मर्यादा तार-तार हुई है. बिहार की मर्यादा तार-तार हुई है."
राष्ट्रीय जनता दल की बिहार इकाई ने ट्विटर पर लिखा है, "नीतीश कुमार जी ने बिहार विधानसभा को क्या समझ रखा है? इनकी खलबलाहट देखकर हँसी भी आती है और दया भी! "
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लोकजनशक्ति पार्टी नेता और सांसद चिराग पासवान ने भी ट्विटर पर नीतीश कुमार का वीडियो शेयर किया है.
चिराग पासवान ने लिखा है, "भारत की संसद हो या किसी राज्य की विधानसभा हो या विधान परिषद उसको सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी पूरे तरीके से भारतीय संविधान के अनुसार कुर्सी पर बैठे हुए अध्यक्ष की होती है. लेकिन आज जिस तरीके से बिहार विधानसभा में मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के द्वारा अध्यक्ष को नहीं बल्कि उस कुर्सी को अपमानित किया गया. यह अत्यंत निंदनीय है"
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ट्विटर पर कई लोग मुख्यमंत्री के अंदाज़ और उनके हाव भाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
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ट्विटर पर कुछ यूज़र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन भी कर रहे हैं.
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कई लोग इस मामले को बिहार में सरकार चला रहे गठबंधन की सेहत से जोड़कर भी देख रहे हैं. बिहार में बीजेपी और जनता दल यूनाइडेट का गठबंधन लंबे समय से है लेकिन किसी वक्त़ जेडीयू गठबंधन में बड़े पार्टनर के रूप में थी लेकिन अब ये हैसियत बदल गई है. हालांकि, जेडीयू की कम सीटें होने के बाद भी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं.
कई राजनीतिक विश्लेषक दावा करते हैं कि नीतीश कुमार इस स्थिति को लेकर लगातार दबाव में हैं और अपने लिए नई संभावनाएं भी देखते रहते हैं.
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