अरविंद केजरीवाल के नामांकन में छह घंटे से अधिक क्यों लगे- प्रेस रिव्यू
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सोमवार को चुनावी रैली में हुई देरी की वजह से अपना नामांकन दाख़िल करने में नाकाम रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोचा भी नहीं होगा कि मंगलवार को नामांकन के लिए उन्हें छह घंटे इंतज़ार करना होगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक,आम आदमी पार्टी का आरोप है कि चुनाव अधिकारी ने बीजेपी के इशारे पर ऐसा किया जबकि चुनाव अधिकारी ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है.
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एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नामांकन दाख़िल करने में आमतौर पर 30-35 मिनट लगते हैं और केजरीवाल से पहले क़तार में अन्य उम्मीदवार अपना नामांकन दाख़िल करने के लिए खड़े थे.
इस पर आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि केजरीवाल के आगे नामांकन दाख़िल करने वाले अधिकतर उम्मीदवारों के पास पूरे दस्तावेज़ तक नहीं थे और उन्हें जान-बूझकर क़तार में लगाया गया था.
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दिल्ली में आठ फ़रवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं जिसके लिए नामांकन दाख़िल करने की मंगलवार को आख़िरी तारीख थी.
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"जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होने वाला है"
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि विरोध के बावजूद नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) वापस नहीं लिया जाएगा. दिल्ली से प्रकाशित तमाम अख़बारों में ये ख़बर प्रमुखता से छपी है.
ख़बर के मुताबिक, मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक रैली में अमित शाह ने कहा, "मैं लखनऊ की भूमि से डंके की चोट पर कहता हूँ कि जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होने वाला है. वोट बैंक के लोभी, आँख के अंधे और कान के बहरे नेताओं को मैं कहूंगा कि आप शरणार्थियों के कैंप में जाइए और उनकी स्थिति देखिए."
उन्होंने कहा, "मेरे लाखों हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन भाई जो अपनी संपत्ति छोड़ शरणार्थी बनकर भारत आए, जिनके पास न खाना है, न घर है, वोट देने ले लिए नागरिकता नहीं है, न दवाई है न नौकरी है, इनको प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकता देकर सम्मान देने का काम किया है."
मोदी सरकार का दावा है कि नागरिकता संशोधन क़ानून किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता है, लेकिन कांग्रेस ने इसे झूठ बताया है.
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है, "संविधान में भारत की नागरिकता के 5 प्रावधान हैं, जिनमें कहीं भी धर्म का कोई ज़िक्र नहीं है. 1955 के नागरिकता क़ानून में भी यही प्रावधान हैं."
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मुझे अपने माता-पिता की जन्मतिथि नहीं पता: रामविलास पासवान
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) में माता-पिता से संबंधित सवालों को हटाने पर सरकार विचार कर सकती है.
उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि मेरे माता-पिता की जन्मतिथि क्या है, मैं वो दस्तावेज़ भूल गया जिनमें जन्मतिथि होती है."
एनपीआर में माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी, संबंधित दस्तावेज़ों की ज़रूरत पर मांग की जा रही है कि इससे संबंधित सवालों को हटा देना चाहिए.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार इस मांग पर विचार करेगी और सरकार ने ये बार-बार कहा है कि दस्तावेज़ दिखाना अनिवार्य नहीं होगा.
हालांकि इस बारे में गृह मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है.
कई राज्य सरकारों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि एनपीआर में माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान संबंधित सवाल हटा देने चाहिए क्योंकि ऐसे बहुत से लोग होंगे जो इनका जवाब नहीं दे पाएंगे.
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'रेलवे ई-टिकट बुकिंग में बड़ा फर्जीवाड़ा'
दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित एक ख़बर में दावा किया गया है कि रेल ई-टिकट बुकिंग में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है और इसके तार 'टेरर फंडिंग' यानी चरमपंथियों को मिलने वाली आर्थिक मदद से जुड़े हैं.
ख़बर के मुताबिक रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ़) के महानिदेशक अरुण कुमार ने जानकारी दी है कि बीते लगभग पांच साल से सक्रिय इस गिरोह ने क़रीब एक हज़ार करोड़ रुपये कमाए हैं.
गिरोह का सरगना झारखंड का रहने वाला बताया गया है जिसे दस दिन पहले भुवनेश्वर से गिरफ़्तार करने का दावा किया जा रहा है.
आरपीएफ़ के महानिदेशक के मुताबिक ई-टिकट बुकिंग के लिए फर्जी आधार कार्ड और नकली पैन कार्ड की मदद ली जाती थी. उनका दावा है कि गिरोह के तार दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेश तक फैले हैं.
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पवन वर्मा के ख़त में नीतीश की आशंकाएं?
जनता दल यूनाइटेड के महासचिव पवन वर्मा ने पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दिल्ली विधानसभा चुनाव में गठबंधन के संदर्भ में अपनी विचारधारा स्पष्ट करने के लिए कहा है.
पवन वर्मा ने नीतीश कुमार को एक पत्र में लिखा, "मैं आपकी उस स्वीकारोक्ति को याद कर रहा हूं कि बीजेपी के वर्तमान नेतृत्व ने किस तरह आपका अपमान किया था. आप ख़ुद कई बार कह चुके हैं कि बीजेपी देश को ख़तरनाक स्थिति में ले जा रही है."
पवन वर्मा ने नीतीश के नाम अपना ये पत्र सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इसमें उन्होंने नीतीश कुमार को उनके ही विचार याद दिलाए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि 'बीजेपी संस्थाओं को नष्ट कर रही है.'
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जनता दल यूनाइटेड को लड़ने के लिए तीन सीटें दी हैं. गठबंधन के दायरे पर पवन वर्मा ने चिंता जताई है.
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