हांगकांग में कंक्रीट का जंगल

इमेज स्रोत, Gerrit Schreurs

हांगकांग के रिहाइशी इलाकों के घने टॉवरों का जंगल वहां रिहाईश के संकट का प्रतीक है. यहां लाखों परिवार छोटे छोटे घरों में रहते हैं.

लेकिन फ़ोटोग्राफ़र माइकल वुल्फ़ ने इन घनी बिल्डिंगों में भी सुंदरता के पहलू ढूंढ निकाले, बिना इस बात को नज़रअंदाज़ किए कि इसमें रहने वालों की ज़िंदगी वाकई कितनी कठिन है.

बीते 24 अप्रैल को 64 साल की उम्र में वुल्फ़ की हॉग कॉग में मौत हो गई.

11 साल तक चले प्रोजेक्ट आर्किटेक्टर ऑफ़ डेंसिटी के लिए उन्हें जाना जाता है. इसके उन्होंने यहां के रिहाईशी ब्लॉक की तस्वीरें लीं और उनकी इस तरह काट छांट की कि वो बेहद घनी दिखती हैं.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, आर्किटेक्चर ऑफ़ डेंसिटी #39 (2005)

वुल्फ़ का पालन पोषण कनाडा, जर्मनी और अमरीका में हुआ. 1994 में मैग्ज़ीन स्टर्न में फ़ोटोग्राफ़र के तौर पर वो हॉग कॉग आ गए.

साल 2002 में नौकरी छोड़ने तक उन्होंने यहां 8 साल तक काम किया. एक साल बाद उन्होंने टॉवर ब्लॉक की तस्वीरें लेनी शुरू कर दीं.

यही आगे चलकर 'आर्किटेक्चर ऑफ़ डेंसिटी' के रूप में सामने आया.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, आर्किटेक्चर ऑफ़ डेंसिटी #75 (2006)

टॉवर ब्लॉक की ये तस्वीरें इतनी अमूर्त दिखती हैं कि किसी को भी इसकी वास्तविकता समझने में कुछ सेकेंड का वक़्त लग सकता है.

बहुत बारीक़ से नज़र डालने पर इसमें रहने वाले लोगों की ज़िंदगी के कुछ पहलू उभर कर सामने आते हैं. मसलन बालकनी में लटके तौलिए, अधखुली खिड़कियां या बाहर सूखने के लिए फैलाई गई टी शर्ट.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, आर्किटेक्चर ऑफ़ डेंसिटी #119 (2009)

साल 3014 में वुल्फ़ ने बीबीसी को बताया था, "एक फ़ोटो पत्रकार के रूप में मुझे अपनी तस्वीरों में कंपोजिशन से परिचित था और दर्शक को तस्वीरों में बांध लेने का काम करना मुझे बेहद पसंद था. जबतक सिर पर आसमान है आप वहां देखते हैं और कुछ तस्वीरें ज़ेहन में रह जाती हैं."

"आर्किटेक्चर के साथ भी ऐसा ही है. अगर आसमान और क्षितिज सामने है तो आप इसके आकार प्रकार के बारे में लगभग अनुमान लगा लेते हैं और कोई भ्रम नहीं रहता. इन तस्वीरों को इस तरह काट छांट मैं केवल इमारतों को नहीं दिखा रहा होता हूं, बल्कि मैं एक रूपक बना रहा होता हूं."

सिरीज़ 'माई फ़ेवराइट थिंग' जैसी अपनी कृतियों में सिटी लाइफ़ की बारीक़ चीजों पर वो फ़ोकस करते हैं.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, माई फ़ेवराइट थिंग (2003-2015)

'हॉग कॉग: फ़्रंट डोर/बैक डोर' जैसी अपनी कुछ कृतियों में वो थोड़ा पीछे जाते हैं और पूरे शहर का विहंगम जायजा लेते हैं.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, 'हॉग कॉग: फ़्रंट डोर/बैक डोर' की तस्वीर

हालांकि उनकी प्रेरणा का स्रोत केवल हॉग कॉग ही नहीं था.

साल 2014 में उन्होंने पेरिस की छतों की तस्वीरें लीं, जिनमें चिमनियां ही चिमनियां दिखती हैं.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

लेकिन उनकी कुछ तस्वीरें ज़िंदगी से बिल्कुल क़रीब भी हैं. 'टोक्यो कंप्रेशन' में उन्होंने इस घनी आबादी वाले जापानी शहर की अंतरंग ज़िंदगी को दिखाया है, जिसमें लोगों के चेहरे ट्रेन की खिड़की से सटे दिखते हैं.

ट्रेन में इतनी भीड़ है कि निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता और अधिकांश लोग अपनी आंख बंद कर लेते हैं या अपने चेहरे पर हाथ रख लेते हैं.

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, टोक्यो कंप्रेशन #18 (2010)

उनकी मौत पर उनके परिवार ने कहा, "शहरी ज़िंदगी पर माइकल वुल्फ़ का काम, ऐसे माहौल में रहने वाले लोगों की ज़िंदगी के प्रति उनके गहरे सरोकार और मौजूदा भारी शहरीकरण का उन पर असर को दिखाता है."

इमेज स्रोत, Michael Wolf

इमेज कैप्शन, टोक्यो कंप्रेशन #75 (2011)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)