ईद के लिए गांव में हो रहा था शुजात बुखारी का इंतज़ार

इमेज स्रोत, @bukharishujaat

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए

"परिवार में हर कोई सदमे में है, यहां कौन बात करेगा." मुझे ये जवाब तब मिला जब मैंने किरी पहुंचकर शुजात बुखारी के चचेरे भाई सईद बशारत से घर के किसी सदस्य से बात कराने के लिए पूछा.

उत्तरी कश्मीर के किरी गांव में शुजात बुखारी के घर में हर आँख नम है और हर चेहरा उदास है. अपना ​और पराया हर एक निढाल है और शुजात बुखारी की मौत के मायने तलाश रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की गुरुवार को उनके दफ्तर के बाहर श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में कुछ हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस घटना में उनके दो सुरक्षाकर्मी भी मारे गए.

इमेज स्रोत, MAJID JAHANGIR

इमेज कैप्शन, विलाप करता शुजात बुखारी का परिवार

किरी में उनके घर के आंगन में लोगों कि काफ़ी भीड़ लगी थी. घर के बरामदे में कई महिलाएं बैठीं ज़ोर-ज़ोर से रो रही थीं. एक बुज़ुर्ग महिला चीख़-चीख़ कर पुकार रही थी, "मेरे अफ़सर तुम कहां गए."

आंगन में शुजात बुखारी का मृत शव कपड़े में लिपटा चारपाई पर रखा हुआ था. इस आख़िरी विदाई में शामिल होने के लिए कई रिश्तेदार और दोस्त आए थे.

शुजात बुखारी के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी और दो बेटे हैं.

इमेज स्रोत, MAJID JAHANGIR

गांव में हो रहा था इंतज़ार

शुजात बुखारी कश्मीर डेली अंग्रेज़ी अखबार 'राइजिंग कश्मीर' के संपादक भी थे. वह वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार होते थे. इस घटना पर कश्मीर के अलगाववादियों से लेकर भारत समर्थक राजनीतिक दलों ने निंदा की है.

शुक्रवार सुबह 11 बजे उनको किरी के क़ब्रिस्तान में दफनाया जाएगा. शुजात बुखारी के दो मंज़िला मकान में हर एक कमरा लोगों से भरा हुआ था और सभी गम में डूबे हुए थे.

इमेज स्रोत, MAJID JAHANGIR

सईद बशारत ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए कहा, "पूरा परिवार गहरे सदमे में है. हमारे पास इसे को बयां करने के लिए शब्द भी नहीं हैं. हमें नहीं पता कि किसने ऐसा किया. जिसने भी किया है उसने एक एक मंझे हुए पत्रकार, एक क़लमकार और एक दानिशवर का क़त्ल किया है. ये घिनौनी हत्या है. शुजात साहब हर एक मंच पर मज़लूमों की नुमाइन्दगी करते थे. जिन्होंने भी ये किया है उन्होंने रमजान के पाक महीने का भी लिहाज़ नहीं रखा है."

शुजात बुखारी कई सालों से श्रीनगर में रहते थे. उनके कई रिश्तेदार भी श्रीनगर में रहते हैं. ईद या किसी बड़े त्योहार पर सभी अपने गावों में इकट्ठा होते हैं.

बशारत कहते हैं, "हमारे जो भी रिश्तेदार श्रीनगर में रहते हैं, उम्मीद होती है कि वो सभी ईद जैसे मौक़ों पर गांव आएं. ज़ाहिर है कि उनका (शुजात बुखारी) का भी इंतज़ार हो रहा था," आह भरते हुए वह कहते हैं कि जो खुशियां थीं वो गम में तब्दील हो गईं."

इमेज स्रोत, MAJID JAHANGIR

इमेज कैप्शन, शुक्रवार सुबह 11 बजे शुजात बुखारी का शव दफनाया जाएगा.

''पत्रकार कहां सुरक्षित''

शुजात बुखारी के गांव के एक नौजवान आदिल कहते हैं, ''यहां बेगुनाहों की जान चली जाती है. ऐसी हत्या कि हर कोई निंदा करेगा. ये तो एक मासूम का क़त्ल है. आज तक उन्होंने यहां किसी के साथ ऊंची आवाज़ में बात भी नहीं की थी. जब भी हम उनसे मिलते या उनके पास जाते थे तो वह हमें बेटे की तरह समझते थे. "

उनके एक क़रीबी दोस्त तारिक़ अली मीर कहते हैं कि शुजात बुखारी की जिस तरह से हत्या की गई वो कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा, "कश्मीर की पत्रकारिता का एक चैप्टर खामोश कर दिया गया है. मुझे कोई बताए कि एक पत्रकार किस जगह सुरक्षित है. पत्रकार बिरादरी के लिए ये बहुत बड़ी घटना है."

इमेज स्रोत, BILAL BAHADUR

इमेज कैप्शन, शुजात बुखारी की इस कार पर हमला हुआ था.

कुछ साल पहले भी शुजात बुखारी को अगवा किया गया था पर तब वह बचकर निकल गए थे.

अपना अख़बार शुरू करने से पहले शुजात बुखारी द हिन्दू अख़बार के ब्यूरो चीफ़ थे.

अभी तक किसी भी संगठन या गुट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. जम्मू -कश्मीर ज़ोन पुलिस ने संदिग्ध हमलावरों की तस्वीर जारी की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)