श्रीनगर का डाउनटाउन जिसे कश्मीर का 'गज़ा' भी कहते हैं

इमेज स्रोत, FAROOQ KHAN/EPA

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

तंग गलियां, घनी आबादी, दुकानों में चहल-पहल,अलगाववादी राजनीति का केंद्र...

भारत विरोधी प्रदर्शनों में अक्सर शामिल रहने वाला ये श्रीनगर डाउनटाउन का नौहट्टा इलाका है. नौहट्टा श्रीनगर के लालचौक से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर है.

नौहट्टा में ऐतिहासिक जामा मस्जिद आबाद है और इसलिए इस इलाके का खासा महत्व बढ़ जाता है.

क्योंकि बीते कुछ सालों से कश्मीर के लोगों के लिए जामा मस्जिद मज़हब और अलगाववादी राजनीति का केंद्र रही है.

इमेज स्रोत, Majid Jahangir/BBC

डाउनटाउन का दिल

कुछ लोग नौहट्टा को डाउनटाउन का दिल भी कहते हैं.

यहां की जामा मस्जिद में हर जुमे को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (मीरवाइज़ गुट) के चेयरमैन मौलवी उमर फ़ारूक़ खुतबा (यानी जुमे की नमाज़ से पहले का भाषण) पढ़ते हैं.

नौहट्टा की जामा मस्जिद 624 साल पुराना है, इसे सुल्तान सिकंदर शाह कश्मीरी शाहमीरी ने 1394 ईस्वी में बनाया था.

हर जुमे को फ़ोटो पत्रकार जामा मस्जिद के बाहर नज़र आते हैं, ये इस बात का संकेत होता है कि जुमे की नमाज़ के बाद पत्थरबाज़ी की घटनाएं हो सकती हैं.

इमेज स्रोत, FAROOQ KHAN/EPA

सुरक्षाबल के जवान

जुमे की नमाज़ की अदायगी के साथ ही जामा मस्जिद के बाहर नौजवानों का एक बड़ा जत्था पत्थरबाज़ी और प्रदर्शनों के लिए तैयार नज़र आता है.

जामा मस्जिद के सामने युवाओं के बस खड़े होने की देरी है कि पुलिस और सुरक्षाबल के जवान भी इस जगह अपना मोर्चा संभाले पहुंच जाते हैं.

इसके बाद दोनों पक्षों का आमना-सामना होता है.

एक तरफ युवाओं के हाथों में पत्थर तो दूसरी तरफ सुरक्षाबलों के हाथों में बंदूकें, आंसू गैस के गोले, पेलेट गन और पावर शेल. ये संघर्ष घंटों चलता है.

इमेज स्रोत, FAROOQ KHAN/EPA

नमाज पढ़ने पर ही प्रतिबंध लगा देती है...

जामा मस्जिद के बाहर ये सिलसला बीते कई सालों से लगातार चल रहा है. कुछ लोग तो नौहट्टा को कश्मीर का 'ग़ज़ा' भी कहते हैं.

सरकार के लिए नौहट्टा में प्रदर्शनों को रोकना हमेशा से ही चिंता का विषय रहा है.

डाउनटाउन में एक नौजवान ने बताया कि पत्थरबाज़ी करने वाले युवा कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से यहां पहुंचते हैं.

कई बार ऐसा होता है कि सरकार जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने पर ही प्रतिबंध लगा देती है.

इमेज स्रोत, TAUSEEF MUSTAFA/AFP/Getty Images

हर जुमे को प्रदर्शन होते हैं...

प्रतिबंध की वजह से हालात बिगड़ने की आशंका होती है. कभी-कभी सरकार हफ़्तों तक जामा मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं देती.

जामा मस्जिद के बाहर अपनी दुकान चलाने वाले एक दुकानदार कहते हैं, "यहां हर जुमे को प्रदर्शन होते हैं."

"भले ही हुर्रियत के नेता इन प्रदर्शनों की अपील करें या न करें लेकिन प्रदर्शन तो होते ही हैं."

फोटो पत्रकारों के लिए नौहट्टा में काम करना काफी ज़्यादा मुश्किल होता है.

इमेज स्रोत, FAROOQ KHAN/EPA

एक फ़ोटो पत्रकार का अनुभव

बीते कई सालों से फोटो पत्रकार के तौर पर काम करने वाले बिलाल बहादुर बताते हैं कि उन्हें कई बार नौहट्टा में काम करने के दौरान मार भी खानी पड़ी.

वे कहते हैं, "मैं बीते 20 सालों से फोटो पत्रकारिता कर रहा हूं."

"पत्थरबाज़ी तो पूरी कश्मीर घाटी में होती है लेकिन जितनी खतरनाक पत्थरबाज़ी नौहट्टा के जामा मस्जिद इलाके में होती है वैसी और कहीं नहीं होती."

"फोटोग्राफर चाहे पुलिस की तरफ रहें या पत्थरबाजों की तरफ, दोनों ही तरफ खतरा बना रहता है."

"खासकर उन फोटोग्राफर्स के लिए जिनके पास बुलेट प्रूफ जैकेट, हेल्मेट या दूसरे सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं."

इमेज स्रोत, Majid Jahangir/BBC

जामा मस्जिद इलाके में...

बीते सालों का अपना अनुभव साझा करते हुए बिलाल बहादुर कहते हैं, "मैं साल 2009 में इसी नौहट्टा इलाके में पहले पत्थरबाज़ों से पिटा और फिर सुरक्षाबलों से."

"पहले तो सिर्फ जुमे के दिन जामा मस्जिद इलाके में पत्थरबाज़ी होती थी लेकिन अब तो किसी भी दिन हो जाती है."

"जब जुमे की नमाज़ अदा होती है तो लोग मस्जिद के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर देते हैं."

"इस दौरान वहां सुरक्षाबल भी रहते हैं और फिर देखते ही देखते पत्थरबाज़ी शुरू हो जाती है."

"अगर मस्जिद के पास पत्थरबाज़ी न हो तो फिर पत्थरबाज़ नौहट्टा थाने तक जाते हैं वहां से पत्थरबाज़ी शुरू कर देते हैं."

इमेज स्रोत, Majid Jahangir/BBC

भीड़ ने एक अधिकारी को मार डाला

बीते साल 'शब-ए-क़दर' (रमज़ान के महीने की वो रात जब मुसलमान मस्जिदों में इबादत करते हैं) के दौरान भीड़ ने एक पुलिस अधिकारी को पीट पीटकर मार डाला था.

मरने वाला अधिकारी जम्मू और कश्मीर पुलिस का एक डीएसपी था और ये घटना जामा मस्जिद के बाहर नौहट्टा में हुई थी.

एक पत्थरबाज़ का कहना था कि उन्होंने कई बार नौहट्टा इलाके में पत्थरबाज़ी की है. वे कहते हैं कि पुलिस उन पर बेवजह ज़ुल्म करती है.

उन्होंने कहा, "बाहर पत्थरबाज़ी हो रही थी. मैं घर के बाहर निकला तो पुलिस ने मुझे पकड़ लिया और दो महीने तक बंद रखा."

"ऐसा क्यों हुआ, कोई कुछ नहीं बताता, मैं आज भी पूछता हूं कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ."

इमेज स्रोत, Majid Jahangir/BBC

सरकारी पाबंदी

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने हाल ही में जुमे के दिन जामा मस्जिद में अपने खुतबे के दौरान कहा था कि जबसे कश्मीर के लोगों ने अपना आंदोलन शुरू किया है तब से ही जामा मस्जिद इस आंदोलन का प्रतीक है.

कश्मीर घाटी में जब भी कहीं कोई गड़बड़ होती है तो डाउनटाउन इलाके में सरकार सबसे पहले प्रतिबंध लगाती है. नौहट्टा इस फेहरिस्त में पहले नंबर पर होता है.

नौहट्टा के आसपास कई दरगाहें हैं जहां लोगों का काफ़ी आना जाना लगा रहता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)