कैराना: 'राम की हार और अल्लाह की जीत' वाली वायरल पोस्ट पर शिक़ायत दर्ज
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- Author, प्रशांत चाहल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
उत्तर प्रदेश पुलिस के पाँच लोगों का एक दल उस फ़र्ज़ी व्हाट्सऐप संदेश की जाँच कर रहा है, जिसमें कैराना लोकसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक दल की उम्मीदवार बेग़म तबस्सुम हसन की जीत को 'अल्लाह की जीत और राम की हार' बताया गया था.
गुरुवार, 31 मई को आए कैराना उप-चुनाव के नतीजों के बाद इस मैसेज को बेग़म तबस्सुम हसन के बयान के तौर पर इलाक़े में फैलाया गया और शनिवार दोपहर को नवनिर्वाचित सांसद तबस्सुम हसन ने शामली के पुलिस अधीक्षक से इसकी लिखित शिक़ायत की.
इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए सांसद तबस्सुम हसन ने कहा, "हम तीन पीढ़ी से राजनीति कर रहे हैं. ऐसा नादानी भरा बयान कैसे दे सकते हैं. ऐसा कोई बयान हमने नहीं दिया. हमें हमेशा हिंदू समाज का वोट मिला है. इस बार भी दलित और जाट समाज के लोग हमारे साथ खड़े थे. इसी भाईचारे को बिगाड़ने के लिए ऐसी बातें फ़ैलाई जा रही हैं."
एफ़आईआर दर्ज की गई
शामली के पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने बीबीसी को बताया, "हमें राष्ट्रीय लोक दल और सपा नेताओं ने शनिवार दोपहर एक लिखित शिकायत सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि सांसद तबस्सुम हसन के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया जा रहा है."
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"हमने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली है. पाँच लोगों की एक टीम बनाई गई है, इसमें मीडिया सेल के भी लोग हैं जो जल्द ही सर्विलांस सेल के साथ मिलकर एक रिपोर्ट सौंपेंगे."
पुलिस का दावा है कि वो इस बात का पता कर लेगी कि ये पोस्ट किसने डाली और इसे कैसे वायरल किया गया.
कुछ पोस्ट और भी
कांधला और कैराना में स्थानीय पत्रकार अमन मित्तल ने बताया कि ये इस तरह की अकेली पोस्ट नहीं है जिसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है.
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अमन ने बताया, "इलाक़े में उप-चुनाव के पहले से ही कई ग्रुप बने हुए हैं जिनमें ऐसे फ़र्ज़ी पोस्ट डाले जा रहे हैं. 'अल्लाह और राम वाली फ़र्ज़ी पोस्ट' की तरह एक और सोशल मीडिया पोस्ट है जिस पर लोग चर्चा कर रहे हैं. उसमें लिखा है कि कैरानावासियों आने वाले दिनों में क़ुरान पढ़ने के लिए तैयार हो जाओ. लोग इसे भी बयान समझकर शेयर कर रहे हैं."
आरोपों का जवाब
कैराना में एक स्थानीय चैनल को दिए इंटरव्यू में सांसद तबस्सुम हसन ने कहा, "अब वो (भाजपा) हार गए हैं तो 2019 की तैयारी में लग गए हैं. चाहे तरीक़ा सही हो या ग़लत."
इन आरोपों में कितनी सच्चाई है? इस बारे में बीबीसी ने कैराना उप-चुनाव में असफल रहीं भाजपा उम्मीदवार और दिवंगत भाजपा नेता हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह से बात की.
मृगांका सिंह ने कहा, "मुझे इस तरह के किसी मैसेज या इस तरह के किसी भी बयान की कोई जानकारी नहीं है. अगर ऐसे संदेश किसी ग़लत भावना से फ़ैलाये जा रहे हैं तो ये निसंदेह एक ख़राब हरकत है."
'भाजपा के इशारे पर…'
राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने ट्विटर पर लिखा है, "मैं ऐसी फ़र्ज़ी पोस्ट्स को भाजपा के इशारे पर किया गया हमला मानता हूं जो कैराना उप-चुनाव के नतीजों को हिंदू बनाम मुसलमान के तौर पर देख रहे हैं."
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पोस्ट X समाप्त
जयंत चौधरी ने अपने ट्वीट में उत्तर प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर के कैराना उप-चुनाव के नतीजों को लेकर आए एक बयान की भी आलोचना की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कैराना उप-चुनाव के नतीजों पर जेपीएस राठौर ने कहा था, "कैराना में विकास के ऊपर फतवा भारी पड़ गया."
बेग़म तबस्सुम हसन का परिचय
कैराना लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा के समर्थन से उप-चुनाव जीतने वाली राष्ट्रीय लोकदल की नेता बेग़म तबस्सुम हसन, इस लोकसभा में उत्तर प्रदेश से इकलौती मुस्लिम सांसद होंगी.
भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई कैराना सीट पर उन्होंने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को क़रीब 50 हज़ार वोटों से हराकर ये सीट अपने नाम की है.
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राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाली तबस्सुम हसन ने साल 2009 में भी कैराना सीट से बीएसपी उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी.
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे नाहिद हसन ने बतौर समाजवादी पार्टी उम्मीदवार भाजपा के हुकुम सिंह को चुनौती दी थी, लेकिन हुकुम सिंह से वो चुनाव हार गए थे.
तबस्सुम हसन के परिवार की राजनीतिक विरासत की बात करें तो अब उनकी तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में आ चुकी है.
तबस्सुम हसन के ससुर चौधरी अख़्तर हसन सांसद रह चुके हैं, जबकि पति मुनव्वर हसन कैराना से दो बार विधायक, दो बार सांसद, एक बार राज्यसभा और एक बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं.
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