अब व्हॉट्सएप से पाबंदी क्यों हटा रहा सऊदी अरब?

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सऊदी अरब में व्हॉट्सएप और स्काइप जैसी वॉइस और वीडियो कॉल एप्लीकेशन से पाबंदी हटा ली जाएगी. आर्थिक विकास और उत्पादकता को बढ़ावा देने के मक़सद से यह फ़ैसला लिया गया है.

संचार मंत्रालय ने कहा कि बुधवार से यूजर वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) का इस्तेमाल कर पाएंगे. अब तक सऊदी अरब में वीओआईपी पर प्रतिबंध था.

अभी कुछ ही दिन पहले सऊदी अरब में स्नैपचैट ने अपनी एप्लीकेशन से अल जज़ीरा को ब्लॉक कर दिया था. सऊदी के अधिकारियों ने क़तर के इस चैनल पर चरमपंथियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था.

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अल जज़ीरा ने इस आरोप को ग़लत बताया था. स्नैपचैट पर ब्लॉक किए जाने के बाद अल जज़ीरा ने कहा था कि यह दुनिया भर में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों और मीडियाकर्मियों पर सीधा हमला है.

मई में क़तर से राजनयिक संबंध तोड़ने के बाद सऊदी अरब ने देश में अल जज़ीरा वेबसाइट पर भी पाबंदी लगा दी थी. सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश मानते हैं कि क़तर ने क्षेत्र में चरमपंथ को बढ़ावा दिया है.

इंटरनेट पर कब चली कैंची?

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2011 की अरब क्रांति के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शनों और व्यापक आंदोलन के बाद सऊदी अरब ने इंटरनेट पर सेंसरशिप लगा दी थी. इस दौरान चार लाख वेबसाइटों तक लोगों की पहुंच रोक दी गई थी.

2013 में सऊदी संचार और सूचना प्रौद्योगिकी आयोग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों से कहा था कि उन्हें नियमों का पालन करना होगा.

आयोग ने यह नहीं बताया कि किस नियम की अनदेखी की गई, लेकिन यह ज़रूर कहा था कि समाज को नकारात्मकता के बचाने लिए ऐसा किया जा रहा है, जिससे जनहित प्रभावित हो सकता था.

हालांकि अब संचार मंत्रालय का कहना है कि पाबंदी हटाए जाने के बाद डिजिटल उद्यमों का विकास होगा और इससे ऑपरेशनल ख़र्च भी कम हो जाएंगे.

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