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10वीं में दो मौक़े और 12वीं की कॉपियां डिजिटल चेक: इस साल सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं क्यों हैं अलग
- Author, शुभ राणा
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 17 फ़रवरी से शुरू हो चुकी हैं.
इस बार 46 लाख से अधिक स्टूडेंट्स इन बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं.
10वीं कक्षा की परीक्षा की शुरुआत गणित के पेपर से हुई. यह वो विषय है जिससे कई स्टूडेंट्स घबराते भी हैं.
हालांकि इस बार 10वीं के स्टूडेंट्स के लिए एक अहम बदलाव किया गया है. अगर कोई स्टूडेंट अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है, तो उसे दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा - लेकिन कुछ शर्तों के साथ.
तो वहीं, 12वीं कक्षा की आंसर शीट्स को इस बार डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के ज़रिए चेक किया जाएगा.
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ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लाए गए हैं, जिनका मक़सद परीक्षा के दबाव को कम करना, मूल्यांकन को पारदर्शी और तेज़ बनाना है.
ऐसे में सवाल उठता है कि यह डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम क्या है और10वीं की परीक्षा दो बार देने का क्या मतलब है. इसके लिए योग्य कौन है. इन सभी सवालों के जवाब आपको इस स्टोरी में मिलेंगे.
बोर्ड परीक्षाओं में क्या बदलाव होंगे?
2026 की परीक्षाओं के संचालन और डिजिटल मूल्यांकन को लेकर आयोजित एक वेबिनार में सीबीएसई के चेयरपर्सन राहुल सिंह बताते हैं कि इस बार बोर्ड परीक्षाओं में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं.
पहला- 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो बार होंगी यानी स्टूडेंट्स को परीक्षा में सुधार का एक और अवसर दिया जाएगा.
दूसरा- 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग लागू की गई है, जिसके तहत सभी आंसर शीट्स को पहले स्कैन कर केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम पर अपलोड किया जाएगा.
ऑन स्क्रीन मार्किंग करने का उद्देश्य दो आम ग़लतियों को कम करना है. पहली, टोटलिंग यानी अंकों में जोड़ में कोई ख़ामी. दूसरी, किसी प्रश्न का मूल्यांकन छूट जाना.
राहुल सिंह आगे कहते हैं कि टीचर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी और मूल्यांकन केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी.
क्या सभी स्टूडेंट्स दूसरी परीक्षा दे सकते हैं?
सीबीएसई बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर संयम भारद्वाज के मुताबिक़, पहली परीक्षा में शामिल होना सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य होगा.
दूसरी परीक्षा केवल उन स्टूडेंट्स के लिए होगी जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं.
सीबीएसई ने नोटिफिकेशन जारी कर ज़ोर दिया कि सभी स्टूडेंट्स के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में उपस्थित होना अनिवार्य है.
जो छात्र-छात्राएं पास और पात्र हैं, वे विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा में से किसी भी तीन विषयों में अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं.
अगर कोई स्टूडेंट पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ऐसे छात्र-छात्राओं को 'एसेंशियल रिपीट' श्रेणी में रखा जाएगा और वे केवल अगले साल फ़रवरी में होने वाली मुख्य परीक्षा में ही शामिल हो सकेंगे.
जिन स्टूडेंट्स का परिणाम पहली परीक्षा में 'कंपार्टमेंट' आता है, उन्हें 'कंपार्टमेंट' श्रेणी के अंतर्गत दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी.
कक्षा 10 उत्तीर्ण करने के बाद अतिरिक्त विषय या स्टैंड-अलोन विषय लेने की अनुमति नहीं होगी.
10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा कैसे दे सकते हैं?
डॉक्टर संयम भारद्वाज के अनुसार, 10 मार्च को पहली परीक्षा समाप्त होने के बाद, 11 से 12 मार्च के बीच एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स) खोली जाएगी.
अगर किसी स्टूडेंट को ऐसा लगता है कि पहली परीक्षा में उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और उसके नंबर कम आ सकते हैं, तो एलओसी के माध्यम से वो अपनी जानकारी दर्ज कर सकता है.
पहली परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स को लगभग 15 से 20 दिनों का समय दिया जाएगा. उसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे.
परिणाम के बाद एलओसी दोबारा खोली जाएगी. अगर परिणाम के बाद सुधार के लिए कोई स्टूडेंट अपना नाम जोड़ना चाहे, तो वह आवेदन कर सकता है. इस चरण में आवेदन करने के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा.
12वीं की कॉपियां डिजिटल चेक कैसे होंगी?
डॉक्टर संयम भारद्वाज कहते हैं, "इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं का उद्देश्य- 'स्मार्ट परीक्षाएं, बेहतर मूल्यांकन: नए भारत की पहचान' है."
उनके मुताबिक़, साल 2026 की बोर्ड परीक्षा से पहले जहां टीचर्स के हाथ में पेन होता था, वहीं टीचर्स के हाथ में अब माउस होगा. हालांकि 10वीं की कॉपियां फ़िज़िकल मोड में ही चेक होंगी.
सीबीएसई के अनुसार, इस साल 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 18.5 लाख से अधिक स्टूडेंट्स शामिल होंगे. 120 विषयों में आयोजित होने वाली इन परीक्षाओं में आंसर शीट की संख्या एक करोड़ से अधिक होने का अनुमान है.
डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग के तहत आंसर शीट्स को स्कैन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जहां टीचर्स स्क्रीन पर बैठकर मूल्यांकन करेंगे.
दिल्ली के राजकीय स्कूल शिक्षक संघ के महासचिव अजय वीर यादव कहते हैं, "यह डिजिटल युग है और डिजिटल मूल्यांकन भी उसी का हिस्सा है. लेकिन मेरा मानना है कि इसे अगले सत्र से लागू किया जाना चाहिए था, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त समय और बेहतर प्रशिक्षण मिल पाता. इसमें कुछ ग़लतियों की संभावना भी हो सकती है."
उन्होंने कहा कि अगले सत्र तक स्टूडेंट्स भी मानसिक रूप से तैयार हो जाते और राइटिंग और स्किल सुधारने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिल जाता.
सोसायटी फ़ॉर टीचर्स कॉज़ के सचिव विनोद शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "सीबीएसई की ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से टीचर्स और स्टूडेंट्स को कई परेशानियां हो सकती हैं. शिक्षकों को लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आँखों में दर्द और थकान हो सकती है, साथ ही तकनीकी दिक्कतें भी आती हैं."
विनोद शर्मा आगे कहते हैं, "स्टूडेंट्स को डर है कि कहीं मूल्यांकन में ग़लती न हो जाए. शिक्षकों को सही प्रशिक्षण दिया जाए और बेहतर तकनीकी सुविधा मिले."
वहीं बोर्ड का कहना है कि प्रैक्टिस सत्र भी होगा और इसमें शामिल होने के लिए ओएसिस आईडी, स्कूल कोड और जन्मतिथि की मदद से लॉग-इन करना होगा.
बोर्ड टीचर्स की लॉग-इन और अभ्यास गतिविधियों पर नज़र रखेगा.
बोर्ड के मुताबिक़, टीचर्स को असीमित अभ्यास की सुविधा दी जाएगी, ताकि वास्तविक मूल्यांकन के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न हो.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.