असम में विपक्ष को क्यों लग रहा है कि मुस्लिम बहुल सीटें कम हो जाएंगी- प्रेस रिव्यू
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असम में विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य में मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या में कमी आएगी.
एआईयूडीएफ़ और कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग ने अपने प्रस्तावित मसौदे में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 29 से घटाकर 22 तक सीमित कर दी है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि परिसीमन का प्रस्तावित मसौदा वो काम करेगा, जो 1985 का असम समझौता और एनआरसी नहीं कर पाया.
असम में परिसीमन के इस प्रस्तावित मसौदे से राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़कर 19 और अनुसूचित जाति की आरक्षित सीटों की संख्या 8 से बढ़ाकर 9 करने की बात है.
हालांकि इस प्रस्ताव में असम में लोकसभा की कुल सीटें 14 और विधानसभा सीटें 126 ही हैं.
इस प्रस्ताव में विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाओं को कम करने, कुछ को ख़त्म करने और कुछ नई बनाने की भी बात है.
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प्रस्ताव में मुस्लिम बहुल सीटों पर क्या है?
एआईयूडीएफ के मुताबिक़, इस मसौदे में मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों को 29 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव है.
90 विधानसभा सीटों पर असमिया लोग बहुमत में रहेंगे जबकि 10 से 12 सीटों पर बंगाली लोगों का दबदबा रहेगा.
एआईयूडीएफ के विधायक करीमुद्दीन बरभुया ने ट्वीट किया, ''चुनाव आयोग ने परिसीमन का मसौदा ऐसे तैयार किया है ताकि विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को कम किया जा सके.
चुनाव आयोग का कहना है कि रीप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1950 का इस्तेमाल करते हुए परिसीमन का मसौदा तैयार करने का काम किया गया, जिसमें तहत विधानसभा में सीटों का इजाफ़ा नहीं करने की बात कही गई है.
यहां ये भी अहम है कि परिसीमन के लिए जिस आंकड़े का इस्तेमाल किया गया है वो 2001 की जनगणना का है न कि 2011 जनगणना का.
इससे फ़र्क़ ये पड़ेगा कि 2001 से 2011 तक एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों में अल्पसंख्यकों की आबादी में हुए इजाफे को ध्यान में नहीं रखा जाएगा.
चुनाव आयोग ने दिसंबर 2022 में परिसीमन का एलान किया था. इस एलान के चार दिन बाद 31 दिसंबर को असम कैबिनेट ने चार ज़िलों को पहले से मौजूद ज़िलों में मिलाने का एलान किया. कैबिनेट ने 14 जगहों की सीमाएं भी फिर से तय की.
कैबिनेट के इस फ़ैसले से ज़िलों की संख्या 35 से घटकर 31 पहुंच गई.
बजली, बिस्वनाथ और होजई ऐसे तीन मुस्लिम बहुल आबादी वाले ज़िले रहे, जिनको दूसरे ज़िले में मिलाया गया.
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ज़िलों को मिलाने से क्या बदला?
ज़िले ख़त्म या कम किए जाने से नए ज़िलों की मुस्लिम आबादी कम हो गई.
नेताओं का कहना है कि ये सब मुस्लिम वोट को तितर बितर करने की कोशिश है.
कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरडोलोई ने द हिंदू को बताया, ''बहुत मनमाने ढंग से वैसे काम किया गया जैसे बँटवारे के वक़्त रेडक्लिफ लाइन खींचते वक़्त किया गया था.''
चुनाव आयोग ने इस मसौदे पर 11 जुलाई 2023 तक सुझाव मांगे हैं.
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पुलिस प्रोटेक्शन चाहने वाले धमकी के बदले देते हैं पैसा: लॉरेंस बिश्नोई
गैंगस्टेर लॉरेंस बिश्नोई इन दिनों जेल में हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, लॉरेंस बिश्नोई ने जांचकर्ताओं से बताया है कि नेता और कारोबारी धमकी दिए जाने के बदले में पैसे देते हैं.
बिश्नोई का दावा है कि वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि वो पुलिस प्रोटेक्शन मांग सकें.
बिश्नोई अप्रैल से एनआईए की हिरासत में हैं. एनआईए बिश्नोई से खालिस्तानी संगठनों से ताल्लुक रखने के मामले में पूछताछ कर रही है.
बिश्नोई पर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का आरोप भी है. अखबार लिखता है कि एनआईए ने बिश्नोई से हुई पूछताछ के बारे में गृह मंत्रालय को भी जानकारी दी है.
सूत्र के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस लिखता है- ''बिश्नोई ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह शराब डीलरों, कॉल सेंटर्स के मालिकों, दवाई के सप्लायर्स और रियल स्टेट के कारोबारियों से हर महीने ढाई करोड़ रुपये की उगाही कर रहा है.
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पीएम मोदी ने 10 मिनट में लिया था स्ट्राइक का फ़ैसला- राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पीएम मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक का फ़ैसला 10 मिनट के अंदर लिया गया था.
द हिंदू, दैनिक भास्कर समेत कई अख़बारों ने राजनाथ सिंह के बयान को पहले पन्ने पर जगह दी है.
दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक़, राजनाथ सिंह ने कहा, ''भारत अब ताकतवर बनता दा रहा है. भारत सीमा के इस पार भी मार सकता है और ज़रूरत पड़ी तो सीमा के उस पार भी मार सकता है.''
राजनाथ सिंह बोले, ''जब उरी और पुलवामा की घटना हुई थी, उस वक़्त मैं ही गृह मंत्री था. जब मैं अपने शहीद जवानों का शव कंधे पर लेकर आगे बढ़ा तो जो हमारी स्थिति थी उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. इस घटना के बाद पीएम मोदी के साथ बैठक हुई. मैं पीएम मोदी की इच्छाशक्ति की सराहना करना चाहूंगा कि उन्होंने 10 मिनट के भीतर फैसला कर लिया.''
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रिटायरमेंट के आख़िरी दिन जज ने सुनाए 65 फैसले
दिल्ली हाईकोर्ट की एक जज ने बतौर जज अपने अंतिम दिन रिकॉर्ड 65 मामलों में फ़ैसले सुनाए.
इन जज का नाम जस्टिस मुकुता गुप्ता है. जिन मामलों में गुप्ता ने फै़सले सुनाए, वो मर्डर से लेकर रेप के मामले थे.
द टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है.
जस्टिस गुप्ता बीते 14 सालों से हाईकोर्ट में जज थीं.
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