असम: मंदिर में जाने से रोका तो धरने पर बैठे राहुल गांधी, क्यों हो रहा है सियासी टकराव?

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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

असम से गुजर रही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की "भारत जोड़ो न्याय यात्रा" बीते दो दिनों से राजनीतिक टकराव में घिर गई है.

दरअसल राहुल गांधी का सोमवार नगांव ज़िले के बटाद्रवा स्थित श्री श्री शंकर देव सत्र (मठ) मंदिर जाने का कार्यक्रम था लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें करीब 17 किलोमीटर पहले ही हैबोरगांव में रोक लिया.

असमिया समाज में प्रतिष्ठित वैष्णव संत श्रीमंत शंकर देव की जन्म स्थली बटाद्रवा सत्र मंदिर में जाने से रोकने से नाराज़ कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने कार्यकर्ताओं के साथ हैबरगांव में ही धरने पर बैठ गए.

इससे पहले एक वीडियो में राहुल गांधी गाड़ी से उतर कर पुलिसकर्मियों से रोकने की वजह पूछते देखे गए.

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इमेज कैप्शन, असमिया समाज में प्रतिष्ठित वैष्णव संत श्रीमंत शंकर देव की जन्म स्थली बटाद्रवा सत्र मंदिर

धरने पर बैठने से पहले राहुल गांधी ने अधिकारियों की आलोचना करते हुए मीडिया के समक्ष कहा, “ऐसा लगता है जैसे आज केवल एक व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश की अनुमति है. क्या पीएम मोदी तय करेंगे कि मंदिरों में कौन जाता है?''

उन्होंने आगे कहा, "11 जनवरी को शंकरदेव के जन्मस्थान का दौरा करने का निमंत्रण मिला था, लेकिन रविवार को हमें बताया गया कि कानून-व्यवस्था के संकट की स्थिति है. कानून और व्यवस्था संकट के दौरान गौरव गोगोई और सभी लोग वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान पर जा सकते हैं, लेकिन केवल राहुल गांधी नहीं जा सकते."

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राहुल गांधी जिस जगह धरने पर बैठे है वहां उनके समर्थक "रघुपति राघव राजाराम,पतित पावन सीताराम" भजन गाते दिख रहे थे.

वहीं कांग्रेस समर्थक शंकर देव के कीर्तन भी गाते दिखे.

बाद में स्थानीय सांसद और कांग्रेस नेता गौरव गोगोई मंदिर में गए और प्रार्थना की.

उन्होंने बाहर आकर बताया कि उन्हें राहुल गांधी की जगह श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान पर जाने का अवसर मिला.

गौरव गोगोई ने एक तस्वीर साझा करते हुए बताया,"श्री श्री शंकर देव थान बिल्कुल खाली था. कोई भीड़ नहीं थी. झूठी अफवाह फैलाई गई कि कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. मुख्यमंत्री ने बटाद्रवा थाना और श्री शंकरदेव की विरासत के लिए एक काला दिन लाया है."

श्रीमंत शंकर देव का असम में महत्व

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जब से कांग्रेस ने बताया कि 22 जनवरी की सुबह राहुल गांधी बटाद्रवा श्री श्री शंकर देव सत्र जाएंगे तभी से कांग्रेस और सत्ताधारी बीजेपी में टकराव और बयानबाजी शुरू हो गई.

असम में दो दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे समीर के पुरकायस्थ कहते है कि 15वीं-16वीं शताब्दी के संत-विद्वान और सामाजिक-धार्मिक सुधारक श्रीमंत शंकरदेव असम के समावेशी संस्कृति के प्रतीक माने जाते है.

लिहाजा इस समय देश में चल रही हिंदुत्ववादी राजनीति में राहुल गांधी का बटाद्रवा पहुंचना कई मायनों में महत्वपूर्ण है.

पुरकायस्थ कहते हैं, "अगर आसान भाषा में कहें तो राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में राहुल गांधी के नहीं जाने से बीजेपी आगे जिस तरह उनको राजनीतिक तौर पर घेरती, तो श्रीमंत शंकरदेव के यहां पहुंचना उसी का जवाब था."

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

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इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 22 जनवरी को बटाद्रवा में श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान का दौरा करने से बचने की सलाह दी थी.

मुख्यमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम राहुल गांधी से अनुरोध करेंगे कि वह सोमवार को राम मंदिर के अभिषेक समारोह के दौरान बटाद्रवा न जाएं क्योंकि इससे असम की गलत छवि बनेगी."

उन्होंने कहा था कि भगवान राम और राज्य में एक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित मध्ययुगीन युग के वैष्णव संत के बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती है.

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि सोमवार के लिए कांग्रेस ने मोरीगांव, जगीरोड़ और नेल्ली के "संवेदनशील क्षेत्रों" से होकर जाने वाला रास्ता चुना है, जिसे टाला जा सकता था.

उन्होंने कहा, ''ये क्षेत्र संवेदनशील हैं और मैं किसी भी कानून एवं व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने से इनकार नहीं कर सकता और इसलिए 22 जनवरी को राहुल गांधी की यात्रा के दौरान अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के संवेदनशील मार्गों पर कमांडो तैनात किए गए है.''

कांग्रेस में लंबे समय रहे हिमंत बिस्वा सरमा 2015 में बीजेपी में शामिल होने के बाद से राहुल गांधी की आलोचना करते रहे है.

राहुल गांधी और हिमंता के बीच बयानबाज़ी

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14 जनवरी को मणिपुर से शुरू हुई भारत जोड़ोों न्याय यात्रा जब पिछले गुरुवार को असम पहुंची तभी से राहुल गांधी और हिमंत बिस्वा सरमा के बीच बयानबाज़ी चल रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी एक सभा में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया था और यह भी कहा था कि वो अन्य बीजेपी मुख्यमंत्रियों को "भ्रष्टाचार सिखा सकते हैं.”

इसके जवाब में सरमा ने गांधी परिवार को देश का सबसे भ्रष्ट परिवार बताया.

इसके बाद जब राहुल गांधी की यात्रा जोरहाट शहर से गुजरी तो प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग का उल्लंघन करने के आरोप में यात्रा आयोजक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

इस दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नॉर्थ लखीमपुर में कांग्रेस के कई गाड़ियों पर पथराव किया गया और क्षेत्र में लगाए गए पार्टी के पोस्टर बैनर फाड़ दिए गए.

इस संदर्भ में कांग्रेस ने लखीमपुर में एक मामला भी दर्ज कराया. इसके बाद रविवार को जब यात्रा अरुणाचल प्रदेश से वापस असम लौट रही थी उस दौरान असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा पर बीजेपी समर्थकों ने कथित तौर पर हमला कर दिया जिससे उन्हें चोटें आई.

हालांकि इस हमले के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने पुलिस महानिदेशक को एक मामला दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है.

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