भारतीय झंडे वाले जहाज़ों पर फ़ायरिंग के बारे में अब तक क्या-क्या पता है, ट्रंप से भी पूछा गया सवाल
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भारत ने होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से दो भारतीय जहाज़ों पर फ़ायरिंग को लेकर गंभीर चिंता जताई है, जिसके कारण जहाज़ों को अपना रास्ता बदलना पड़ा था.
भारत के विदेश मंत्रालय ने शनिवार शाम को भारत में ईरानी राजदूत मोहम्मद फ़थाली को बुलाया और घटना पर 'गहरी चिंता' ज़ाहिर की.
शनिवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में प्रेस वार्ता के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरानी गनबोट्स की ओर से दो जहाज़ों पर फ़ायरिंग की ख़बरों पर बीबीसी के सहयोगी सीबीएस न्यूज़ ने सवाल किया लेकिन उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया.
उनसे पूछा गया था कि दो जहाज़ों पर फ़ायरिंग हुई है. इसके जवाब में ट्रंप ने 'थैंक्यू' बोला और प्रेस कॉन्फ़्रेंस ख़त्म कर दी. हालांकि ये सवाल सबसे अंत में पूछा गया था.
उधर, शनिवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने घटना पर 'गहरी चिंता' जताई और ईरानी राजदूत से बैठक के दौरान समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि पहले ईरान भारत से आने वाले जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में सहयोग करता रहा है.
भारत ने ईरान से अपील की है कि भारत की ओर आने वाले जहाज़ों के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट में सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही बहाल की जाए.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, ईरानी राजदूत ने भरोसा दिलाया है कि वह भारत का पक्ष तेहरान तक पहुंचाएंगे.
भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "ईरान और भारत का रिश्ता बहुत मज़बूत है और मुझे इस घटना के बारे में जानकारी नहीं है. हम उम्मीद करते हैं कि सब ठीक होगा और यह मामला सुलझ जाएगा."
भारतीय झंडे लगे दोनों जहाज़ों की अभी क्या स्थिति है?
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बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, टैंकरों की आवाजाही पर नज़र रखने वाली वेबसाइट 'टैंकर ट्रैकर्स' ने शनिवार को बताया था, "चैनल 16 की ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर, आईआरजीसी नौसेना ने होर्मुज़ स्ट्रेट के पश्चिम में सफ़र के दौरान दो भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से पीछे हटने के लिए मजबूर किया था. इस दौरान 'गोलीबारी' भी हुई."
बीबीसी वेरीफ़ाई ने जानकारी दी कि जब स्ट्रेट को दोबारा खोला जा रहा था तो उसी दौरान भारतीय झंडे वाले दो जहाज़, कार्गो शिप जग अर्नव और तेल टैंकर सनमार हेराल्ड को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अपने तय मार्ग से हटने के आदेश दिए.
पहले यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक़, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज़ स्ट्रेट में एक टैंकर पर फ़ायरिंग की.
यूके एमटीओ के अनुसार, यह घटना ओमान के उत्तर-पूर्व में 20 नॉटिकल मील की दूरी पर हुई. हालांकि, टैंकर और उसका चालक दल सुरक्षित बताया गया है.
मैरीटाइम ट्रैफ़िक की वेबसाइट के अनुसार, रविवार भारतीय समयानुसार 9.30 बजे के क़रीब कार्गो शिप जग अर्नव होर्मुज़ स्ट्रेट से पीछे हटकर फ़ारस की खाड़ी में यूएई की ओर है.
जग अर्नव भारतीय शिप है और इस पर भारतीय सदस्य हैं जबकि कच्चे तेल का टैंकर सनमार हेराल्ड भी फ़ारस की खाड़ी में उसी तरफ़ है. इस जहाज़ का डेस्टिनेशन भी भारत है.
इससे पहले टैंकर ट्रैफ़िक ने एक्स पर एक ऑडियो पोस्ट किया था जिसके बारे में उसका दावा है कि यह सनमार हेराल्ड से जुड़ा है. इस ऑडियो में जहाज़ के एक सदस्य को ये कहते हुए साफ़ सुनाई देता है कि जहाज़ को जाने की मंज़ूरी मिल गई थी.
इस ऑडियो में कहा जा रहा है, "सेपा नेवी, सेपा नेवी, यह सनमार हेराल्ड है. आपने मुझे जाने की क्लीयरेंस दी थी. सेपा नेवी, यह सनमार हेराल्ड है. आपने मुझे अनुमति दी थी. मेरा नाम आपकी लिस्ट में दूसरे नंबर पर है. अब आप फ़ायरिंग कर रहे हैं. कृपया हमें वापस जाने का मौका दें."
आईआरजीसी के नेवी विंग को सेपा नेवी के नाम से भी जाना जाता है.
घर लौटने की उम्मीद में भारतीय जहाज़ी
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भारत के कैप्टन रमन कपूर जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट के पास एक कच्चे तेल के टैंकर पर अपने 23 सदस्यीय दल के साथ फंसे हुए हैं.
उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के वीकेंड कार्यक्रम को बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उनके दल में असमंजस की स्थिति है. उन्होंने कहा कि हाल के हफ़्तों में उन्होंने अपने जहाज़ के पास कई मिसाइलें और एक धमाका देखा है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह धैर्य और पेशेवर तरीक़े से इंतज़ार कर रहे हैं, "हमें उम्मीद है कि हम अपने घर लौट सकेंगे."
होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफ़िक कम हुआ
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एक दिन पहले ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा था कि होर्मुज़ स्ट्रेट खुला है, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इसका स्वागत किया था.
लेकिन इसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि वे स्ट्रेट पर फिर से पाबंदियां लगाएंगे.
ईरानी नेवी ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिकी नाकाबंदी ख़त्म नहीं होती, पास आने वाले जहाज़ों को निशाना बनाया जाएगा.
आईआरजीसी का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट आज शाम (शनिवार) से बंद कर दिया गया है और यह तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटाता.
बयान के अनुसार, "फ़ारस की खाड़ी या ओमान सागर में अपनी मौजूदा स्थिति से कोई भी जहाज़ आगे न बढ़े."
उनके मुताबिक़, बीती रात से कुछ जहाज़ उनकी निगरानी में इस स्ट्रेट से गुज़रे थे, लेकिन अब यह जलमार्ग फिर से बंद रहेगा जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी ख़त्म नहीं करता.
बयान में यह भी कहा गया कि "होर्मुज़ स्ट्रेट के पास आना दुश्मन के साथ सहयोग माना जाएगा और नियम तोड़ने वाले जहाज़ को निशाना बनाया जाएगा. ट्रंप के बयान की कोई वैधता नहीं है, अमेरिकी नाकाबंदी युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन है."
ईरानी नौसेना का कहना है कि ईरानी बंदरगाहों की मौजूदा अमेरिकी नाकाबंदी 'युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन' है.
ग़ौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ़्ते का सशर्त युद्धविराम हुआ था, जिसके दौरान होर्मुज़ स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही की अनुमति थी.
इससे पहले ट्रंप ने ओवल ऑफ़िस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि ईरानी नेता इस स्ट्रेट को बंद करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका उन्हें 'ब्लैकमेल' नहीं करने देगा.
ग़ालिबाफ़ ने कहा- होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान के नियंत्रण में
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ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में 'प्रगति' हुई है, लेकिन अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है.
कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में हुई वार्ता में शामिल ग़ालिबाफ़ ने कहा, "हम अभी अंतिम समझौते से काफ़ी दूर हैं."
उन्होंने ईरानी टेलीविज़न को दिए इंटरव्यू में कहा, "बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी कई ख़ामियां हैं और कुछ बुनियादी मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाना बाक़ी है."
ग़ालिबाफ़ ने कहा कि इस्लामाबाद वार्ता के दौरान, जो 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की बातचीत थी, हमने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें 'अमेरिका पर भरोसा नहीं है.'
उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका को ईरानी जनता का भरोसा जीतने का फ़ैसला करना होगा और उन पर अपनी शर्तें थोपने का तरीक़ा छोड़ना होगा."
ग़ालिबाफ़ ने कहा, "अगर हमने युद्धविराम स्वीकार किया, तो इसलिए क्योंकि उन्होंने हमारी मांगें मानीं. क्योंकि हम ज़मीन पर जीते."
उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी को "ग़लत और अविवेकपूर्ण फ़ैसला" बताया है.
ईरानी सरकारी टीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो होर्मुज़ स्ट्रेट से आवाजाही निश्चित रूप से सीमित कर दी जाएगी."
साथ ही उन्होंने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट अब "ईरान के नियंत्रण में है."
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ने स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें हटाने की कोशिश की, तो ईरान ने "निर्णायक तरीके से विरोध किया."
ग़ालिबाफ़ ने कहा, "हमने इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना और कहा कि अगर ऐसा किया गया, तो हम हमला करेंगे."
'अमेरिका से सीधी बातचीत के लिए ईरान नहीं तैयार'
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ईरान के उप विदेश मंत्री सईद ख़ातिबज़ादेह ने कहा है कि ईरान अब तक अमेरिका के साथ नई सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं है.
ख़ातिबज़ादेह ने बताया कि अमेरिका अपनी सख़्त शर्तों को छोड़ने को तैयार नहीं है.
ख़ातिबज़ादेह ने न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को नहीं देगा.
ख़ातिबज़ादेह ने समझाया कि दोनों पक्षों के बीच संपर्क हुआ है, लेकिन ईरान चाहता है कि आमने-सामने की बातचीत से पहले एक "फ़्रेमवर्क समझौता" तय हो.
उन्होंने कहा, "अमेरिका को हमारी अहम चिंताओं को समझना और हल करना होगा, जिसमें ईरान पर लगे प्रतिबंध भी शामिल हैं."
इससे पहले शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बहुत अच्छी बातचीत चल रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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