वो सुरंग जिसका सपना नेपोलियन ने देखा था
इमेज स्रोत, Alamy
- Author, क्रिस बैरनिअक
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
इंसान के इतिहास में सुरंगों की अपनी अहमियत है. सुरंगों का ज़िक्र इतिहास में भी मिलता है. अक्सर ये सुरंगें छुपकर निकलने या किसी और ख़ुफ़िया काम के लिए बनाई जाती थीं. मगर आज के दौर में बनने वाली सुरंगें तरक़्क़ी की मिसाल हैं. वो इंजीनियरिंग का कमाल हैं. जैसे कि ब्रिटेन और फ्रांस को जोड़ने वाली चैनल टनल.
ये समंदर के भीतर बनाई गई दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है. इसकी लंबाई क़रीब पचास किलोमीटर है. ये इंग्लिश चैनल के अंदर से होकर गुज़रती है. समंदर के भीतर की इस सुरंग से होकर हर साल क़रीब एक करोड़ लोग गुज़रते हैं. इस सुरंग में चलने वाली रेलगाड़ी के ज़रिए हर साल क़रीब 16 लाख गाड़ियां ब्रिटेन और फ्रांस के बीच आती-जाती हैं.
इमेज स्रोत, JEAN MEUNIER/AFP/Getty Images
आयरलैंड और ब्रिटेन
इंग्लिश चैनल के नीचे की इस सुरंग को यूरोटनल नाम की कंपनी ने बनाया था. जिस वक़्त ये ठेका यूरो टनल को दिया गया था, उसी वक़्त कंपनी को कहा गया था कि वो एक और चैनल टनल बनाए. कंपनी ने दूसरा प्लान भी साल 2000 में दे दिया था, मगर उस पर अमल का काम आज तक नहीं शुरू हो सका है.
पानी के अंदर बनने वाली ये कोई अकेली ऐसी सुरंग नहीं, जिसका काम आज तक अधूरा है. बल्कि ब्रिटिश द्वीप समूहों के अलग-अलग इलाक़ों को जोड़ने के लिए ऐसी कई सुरंगें बनाने की योजनाएं बनाई गईं. जैसे कि आयरलैंड और ब्रिटेन के वेल्श सूबे के बीच समुद्र के भीतर सुरंग बनाने का प्लान.
इमेज स्रोत, JEAN MEUNIER/AFP/Getty Images
जब सुरंग तैयार हुई...
या फिर उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड को जोड़ने के लिए समुद्र के भीतर सुरंग बनाने की योजना. इनमें सबसे ख़ास है उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड को जोड़ने वाली सुरंग का प्लान. बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों से आज तक इन सुरंगों को बनाने की योजना पर काम नहीं हुआ है.
अब जैसे कि ब्रिटेन और फ्रांस को जोड़ने वाली यूरोटनल का पहला विचार क़रीब दो सौ साल पहले आया था. 1980 के दशक में जब ये सुरंग तैयार हुई, तो उस वक़्त की ब्रिटिश प्रधानमंत्री चाहती थीं कि ये सुरंग सड़क वाली हो. मगर आज इसमें रेल दौड़ती है.
इमेज स्रोत, Alamy
थैचर की ख्वाहिश
यूरोटनल के प्रवक्ता जॉन कीफ़ का कहना है कि मार्गरेट थैचर की पूरी कोशिश थी कि पानी के अंदर भी सुरंग बनाकर रास्ते बनाए जाएं. लेकिन उन्हें बताया गया कि ख़ुदा न करे, अगर सुरंग के पंद्रह मील भीतर कोई हादसा हो जाए, या जाम की वजह से लोग फंस जाएं. तो फिर उन्हें निकालना बहुत बड़ी चुनौती होगी.
सुरक्षा के हवाले से जब थैचर पर दबाव पड़ा तो उन्हें पीछे हटना पड़ा. लेकिन पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने उस वक़्त एक बात साफ़ कर दी कि, जब भी तकनीकी रूप से सक्षम होंगे, तो समुद्र के भीतर ऐसी सुरंगें बनाई जाएं, जिनसे होकर कारें और दूसरी गाड़ियां गुज़र सकें.
इमेज स्रोत, Alamy
1880 में शुरू हो गया था काम
तो ब्रिटेन में जितनी सुरंगों का तसव्वुर किया गया है, अगर उन पर काम शुरू हो जाता है, तो एक सबसे बड़ी समस्या ख़त्म हो जाएगी. वो है कारों से निकलने वाला नुकसानदेह धुआं. कार क्रैश होने या जाम लगने जैसी समस्या भी काफ़ी हद तक कम हो जाएगी. इन सुरंगों में ज़्यादातर गाड़ियां सेल्फ़ ड्राइविंग तकनीक की मदद से चलेंगी.
जॉन कीफ़ को पूरी उम्मीद है कि आने वाले दस से बीस सालों में इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा.आज के दौर में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच समुद्र के भीतर सुरंग बनाने का काम पहली बार उन्नीसवीं सदी में यानी 1880 में शुरू किया गया था. वहीं इंग्लिश चैनल के अंदर मौजूदा सुरंग पर काम 1988 में शुरू हुआ था.
इमेज स्रोत, Alamy
बड़ी-बड़ी चट्टानें
बहुत कम लोग जानते हैं कि फ़्रांस और इंग्लिश चैनल को समुद्र के रास्ते जोड़ने का हिमायती फ्रांस का तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट भी शामिल था. इसका काम 1880 में शुरू हुआ. उस दौर में लोग तकनीकी रूप से आज के मुक़ाबले पिछड़े हुए थे. मज़दूर हाथ के औज़ारों से ही बड़ी बड़ी चट्टानें तोड़ते थे.
पत्थरों को तोड़ने के लिए उनके पास एक बहुत ही साधारण सी मशीन होती थी. इंजीनियरिंग हिस्ट्री वेबसाइट के एडिटर और रेल इंजीनियर ग्रीम बिकरडिक का कहना है कि उस दौर में इस तरह की सुरंग के बारे में सोचना ही अपने आप में एक बड़ी बात थी. ये और बात है कि इस सुरंग को बनाने का काम पूरा नहीं हो पाया.
इमेज स्रोत, OLIVIER MORIN/AFP/Getty Images
आम बात हो जाएगी...
सुरंग के अधूरी रहने की कुछ सियासी वजह भी थीं. कुछ लोग इसके पक्ष में नहीं थे कि सुरंग के रास्ते ब्रिटेन का रिश्ता एक ऐसे देश से जुड़े जिसके साथ उसके अक्सर ही झगड़े रहते थे. सुरंग वाले रास्तों पर लंबे समय से चर्चा चल रही है. और ये चर्चा आज भी जारी है.
साल 2014 में चार्टर्ड इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट यानी सील्ट ने एक डॉक्यूमेंट्री में वेल्श-आयरिश लिंक को बनाने की बात एक बार फिर से छेड़ दी है. रिपोर्ट में कहा गया है फिलहाल इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम करने की बात भले ही ठंडे बस्ते में चली गई हो लेकिन साल 2035 तक इस तरह के विषय आम बात हो जाएगी.
इमेज स्रोत, Alamy
रेल प्रोजेक्ट
जो सुरंग समुद्र के भीतर आज की तारीख़ में बनाना सबसे आसान लग रहा है, वो है स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड को जोड़ने का. इन दोनों के बीच दूरी पंद्रह से बीस किलोमीटर की है. आज दुनिया में ऐसे कई पुल हैं जो इससे भी लंबे हैं. लेकिन सोचने वालों को तो सुरंग ही लुभाती है.
ब्रिटेन में वैसे कई सुरंगें हैं, जो दो इलाक़ों को जोड़ती हैं. जैसे ससेक्स और केंट को जोड़ने वाली सुरंग. इसके अलावा भी कई छोटी सुरंगो के रेल प्रोजेक्ट पर काम जारी है. इसमें सबसे अहम है लंदन का क्रॉसरेल प्रोजेक्ट. ये पूरे यूरोप में सिविल कंस्ट्रक्शन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. इसके अलावा टेम्स नदी के अंदर बनने वाली सुरंग भी काफ़ी अहम है.
इमेज स्रोत, BORIS HORVAT/AFP/Getty Images
नई तकनीक पर काम
फ़ेहमार्न बेल्ट फिक्स्ड लिंक के प्रोजेक्ट पर भी ब्रिटेन के इंजीनियर काम कर रहे हैं. ये लाइन डेनिश द्वीप लोलैंड को जर्मनी के द्वीप फ़ेहमार्न को जोड़ेगी. इसकी लंबाई 18 किलो मीटर होगी और इसका ज़्यादर हिस्सा पानी के अंदर से होकर गुज़रेगा. उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट पर साल 2017 के अंत तक काम शुरू हो जाएगा.
इंजीनियर रिचर्ड मिलर का कहना है कि इस सुरंग को बनाकर फिर समुद्र के भीतर उतारा जाएगा. इसलिए गीली मिट्टी को हटाकर काम करने की ज़रूरत नहीं होगी. इसके बरअक्स चैनल टनल और क्रॉसरेल की टनल बनाने में बेलनाकार टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया था.
इमेज स्रोत, Alamy
मोटी रकम का खर्च
फ़ेहमार्न बेल्ट फिक्स्ड लिंक को बनाकर समुद्र तल में उतारा जाएगा. इस तकनीक को इमर्स ट्यूब और आईएमटी के नाम से जाना जाता है. ये तकनीक अपने आप में बहुत नई नहीं है. ऑस्ट्रेलिया में सिडनी हार्बर सुरंग बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा चुका है.
जिस तरह की सुरंगें बनाने की चर्चाएं चल रही हैं उन्हें बनाने में काफ़ी मोटी रक़म ख़र्च होगी. चैनल टनल के बनाने में 11 अरब डॉलर का ख़र्च आया. जबकि फ़ेहमार्न बेल्ट फिक्स्ड लिंक बनाने में 8 अरब डॉलर से ज़्यादा का ख़र्च आएगा. सभी जानते हैं कि इस तरह के प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने में मोटी रक़म ख़र्च होगी.
इमेज स्रोत, BORIS HORVAT/AFP/Getty Images
पानी के रास्ते
फिर भी सुरंगों को लेकर ख़याली पुलाव पकाए जा रहे हैं. यातायात के साधनों को बहुत तेज़ बनाने के नुक़्ते-नज़र से और भी कई प्रोजेक्ट पेश किए जा रहे हैं. अटलांटिक महासागर में बड़ी-बड़ी ट्यूब उतारे जाने की बात कही जा रही है. अगर ऐसा होता है तो यूरोप और अमरीका पानी के रास्ते एक दूसरे से जुड़ जाएंगे.
हालांकि ये सब बातें सुनने में दूर की कौड़ी लगती हैं लेकिन जिस तरह से चर्चाएं गर्म हैं, हो सकता है ये बातें सच भी साबित हो जाएं. जॉन कीफ़ कहते हैं कि दो सौ साल पहले नेपोलियन के इंजीनयरों ने जिस टनल का सपना देख काम शुरू किया था, वो उस समय उनके लिए भी एक सपना ही थी.
इमेज स्रोत, Hulton Archive/Getty Images
लेकिन 200 साल बाद वो सपना कुछ हद तक सच हुआ. लिहाज़ा हो सकता है आने वाले समय में अटलांटिक महासागर में यातायात के लिए सुरंग बनाने का सपना भी साकार हो जाए.
(बीबीसी फ़्यूचर पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी फ़्यूचर कोफ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
टॉप स्टोरी
ज़रूर पढ़ें
सबसे अधिक लोकप्रिय
सामग्री् उपलब्ध नहीं है