कैसे बना था इसराइल यहूदियों का मुल्क

इसराइल को एक देश बने 70 साल हो गए हैं. इन 70 सालों में घटी सात बड़ी घटनाएं -

हिब्रू कैलेंडर के मुताबिक़ इसराइल की आज़ादी घोषणा के 70 साल पूरे हो रहे हैं. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक़ 14 मई 1948, वो दिन था जब दुनिया भर में यहूदी लोगों ने आज़ादी का जश्न मनाया था. ये मौक़ा दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के तीन साल बाद आया था. पड़ोसी अरब देशों ने इसराइल की आज़ादी स्वीकर नहीं की थी और दूसरे ही दिन पांच देशों की सेनाओं ने नए बने देश पर हमला कर दिया था.

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, 14 मई 1948 को तेल अवीव में युवा यहूदी इसराइल को नया देश बनाने की घोषणा का जश्न मना रहे हैं.

इसराइल के बनने के बाद लाखों की संख्या में फ़लस्तीनी अरबों को लड़ाई के दौरान पलायन करना पड़ा था. यहीं से फ़लस्तीनी शरणार्थी समस्या की शुरुआत हुई थी जो आज तक जारी है. अरब देशों के क़रीब छह लाख यहूदी शरणार्थी और विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में जीवित बचे ढाई लाख लोग इसराइल की स्थापना के कुछ सालों में वहां जाकर बसे. इससे इसराइल में यहूदी लोगों की संख्या दोगुनी से ज़्यादा हो गई.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, साल 1949 में इसराइली भूक्षेत्र में मौजूद फ़लस्तीनी बच्चे संयुक्त राष्ट्र की उस योजना का इंतज़ार कर रहे हैं जिसके तहत उनका भविष्य तय होना था.

साल 1961 में शीर्ष यहूदियों के नरसंहार के सूत्रधारों में एक माने जानेवाले एडॉल्फ़ इचमैन यरूशलम में मुकदमे के दौरान. इसराइल के एजेंटों ने उन्हें अर्जेंटीना में पकड़ा था. कई हफ़्तों तक अदालत में इचमैन के सामने जब नरसंहार के गवाहों को पेश किया गया था तो उनके दिए ख़ौफ़नाक ब्योरे से इसराइली लोग जड़ से हो गए थे. इचमैन को दोषी पाया गया और साल 1962 में उन्हें फांसी दे दी गई.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रियाई नाज़ी युद्ध अपराधी कार्ल एडॉल्फ़ इचमैन (1906 - 1962) यरूशलम में मुकदमे के दौरान

1967 की छह दिन की लड़ाई ने मध्य-पूर्व का नक्शा बदल दिया. इसराइल ने मिस्र पर हमला किया जिसके नेता ने यहूदी देश को मिटा देने की धमकी दी थी. उसके बाद मिस्र, जॉर्डन और सीरिया के साथ हुए संघर्ष का अंत इसराइल द्वारा सिनाई प्रायद्वीप, ग़ज़ा, पूर्वी यरूशलम, पश्चिमी तट और गोलान पहाड़ी पर कब्ज़े के रूप में हुआ था. इसके बाद 2000 साल में पहली बार प्राचीन यरूशलम का धार्मिक रूप से बेहद पवित्र समझी जानेवाली वेस्टर्न वॉल यहूदियों के कब्ज़े में आई थी.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 1967 में छह दिन की लड़ाई के बाद यरूशलम पर कब्ज़े के बाद इसराइली पैराट्रूपर्स

इसराइल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना 1976 में हुई जब इसराइली कमांडो ने यूगांडा के एंतेबे एयरपोर्ट पर रेड कर सौ से ज़्यादा बंधकों को मुक्त कराया था. इन्हें फ़लस्तीनी और फ़लस्तीन समर्थक अपहरणकर्ताओं ने बंधक बनाया था. इनमें से ज़्यादातर इसराइली या यहूदी थे. मुक्त कराए जाने के बाद बंधकों को इसराइल ले जाया गया था. इस ऑपरेशन में कमांडो फ़ोर्स के प्रमुख योनी नेतन्याहू ( मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के भाई) की मौत हो गई थी.

इमेज स्रोत, Getty Images

दो धुर विरोधियों के बीच ऐतिहासक हैंडशेक - इसराइली प्रधानमंत्री यित्ज़ाक राबिन और फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासिर अराफ़ात ने इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष का अंत कर उम्मीद के एक नए युग की शुरुआत की थी. सितंबर 1993 में कई हफ़्तों तक चली गुप्त बातचीत के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मौजूदगी में व्हाइट हाउस के प्रांगण में अंतरिम शांति समझौते पर दस्तख़त किया गया था.

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासिर अराफ़ात और तत्कालीन इसराइली प्रधानमंत्री यित्ज़ाक राबिन के साथ अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन

दो साल बाद यित्ज़ाक राबिन की तेल अवीव में एक शांति मार्च के दौरान हत्या कर दी गई थी. ये हत्या एक राष्ट्रवादी यहूदी चरमपंथी ने की थी जो शांति समझौते के ख़िलाफ़ थे. इस हत्या से इसराइल और दुनियाभर में शोक की लहर दौड़ गई थी. उनके अंतिम संस्कार में दुनिया भर के नेता जुटे थे.

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, 1995 में प्रधानमंत्री यित्ज़ाक राबिन की हत्या कर दी गई थी