मुसलमानों का 'दुश्मन' राष्ट्रपति जिसने देश बांटा
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चेक रिपब्लिक के 73 बरस के राष्ट्रपति मिलोश ज़ेमन की लोकप्रियता राजनीतिक मैदान में कसौटी पर हैं.
सप्ताहांत में हो रहे राष्ट्रपति चुनावों के पहले दौर को ज़ेमन के लिए जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है.
ज़ेमन अर्से से तमाम 'विवादित बयानों' की वजह से चर्चा में रहे हैं. उनकी राजनीति ने देश को उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच बांट दिया है.
एक दफ़ा उन्होंने कहा था कि वो "तमाम शाकाहारियों और शराब से दूर रहने वालों की मौत चाहते हैं".
उन्होंने ख़बरनवीसों और पर्यावरण के लिए काम करने वाले समूहों के ख़िलाफ जंग का ऐलान करते हुए कहा था कि वो "उनके साथ मध्ययुगीन अंदाज़ में पेश आएंगे. उन्हें जलाएंगे, उन पर पेशाब करेंगे और उन पर नमक छिड़केंगे."
ज़ेमन अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशंसक हैं और एक वक़्त वो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का जोरदार तरीके से बचाव करते थे.
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आक्रामक बयान
ज़ेमन मार्च 2013 से सत्ता में हैं. वो साल 1990 से चेक सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं. अब वो शुक्रवार और शनिवार के पहले दौर के चुनाव में विजेता के तौर पर उभर रहे हैं.
ज़ेमन जिस धरातल पर खड़े हैं, वो प्रवासियों के ख़िलाफ आक्रामक बयानबाज़ी और अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों की उपेक्षा के जरिए तैयार हुआ है.
ज़ेमन अपने देश को लगातार आगाह करते रहे हैं कि वो जिहादी हमलों का शिकार हो सकते हैं.
चेक गणराज्य की कुल आबादी एक करोड़ पांच लाख है. इनमें से करीब 35 सौ मुसलमान हैं.
साल 2015 में उन्होंने साउथ मोराविया के लोगों को चेतावनी दी थी कि वो मुसलमान प्रवासियों के हमले के लिए तैयार रहें.
उन्होंने कहा था, "हमारी महिलाओं की खूबसूरती छिन जाएगी क्योंकि उन्हें खुद को बुर्के में छिपा कर रखना होगा. हालांकि मैं सोचता हूं कि कुछ महिलाओं के लिए ये एक बेहतर स्थिति होगी."
मुस्लिम जगत से 'ख़तरा' राष्ट्रपति के तौर पर ज़ेमन के कार्यकाल का मुख्य आधार रहा है. जिन्हें वो 'सभ्यता विरोधी' बताते रहे हैं.
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कसौटी पर कूटनीति
चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में मौजूद बीबीसी संवाददाता रॉब कैमरून कहते हैं कि ये चुनाव न सिर्फ ज़ेमन को लेकर जनमत संग्रह हैं बल्कि इनसे तय होगा कि चेक गणराज्य किस दिशा में बढ़ेगा.
वो कहते हैं, "ज़ेमन को चुनौती दे रहे ज्यादातर उम्मीदवारों के एजेंडे में एक प्रमुख मुद्दा पश्चिमी देशों के प्रति चेक गणराज्य की सोच में बदलाव है."
चेक गणराज्य के राष्ट्रपति रूस के ख़िलाफ यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधों के सबसे मुखर विरोधी रहे हैं. देश के नए प्रधानमंत्री और उनके राजनीतिक सहयोगी आंद्रे बाबिश राष्ट्रपति ज़ेमन के नजरिए का समर्थन करते हैं.
ज़ेमन ने चीन के साथ रिश्ते सुधारने को अपनी प्राथमिकता बताया है. चीन के राष्ट्रपति चेक गणराज्य का दौरा कर चुके हैं
कैमरुन कहते हैं, "इस देश में हर कोई इन रिश्तों को फायदेमंद नहीं मानता है. राष्ट्रपति ज़ेमन ने चेक गणराज्य को अभूतपूर्व तरीके से बांट दिया है."
संगीत प्रोड्यूसर, कारोबारी और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिखेल होरात्चेक ने बीबीसी से कहा, "मैं नहीं चाहता कि चेक गणराज्य, रूस और चीन के लिए ट्रोजन हॉर्स बन जाए. मैं चाहता हूं कि प्राग कैसल (राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास) इस देश के लिए पारदर्शिता के उजले प्रकाश का शोकेस बने."
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'साख को चोट'
ज़ेमन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी चेक एकेडमी ऑफ सांइसेज़ के पूर्व प्रमुख जिरी द्राहोस भी बयानबाज़ी के मोर्चे पर कम नहीं हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, " हमारे यहां कहावत है कि मछली में सिर से सडांध आती है और राष्ट्रपति ज़ेमन के कार्यकाल का भी यही सरमाया है."
वो कहते हैं, "ज़ेमन ने हमारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर प्रमुख साझेदारों को अलग-थलग कर दिया है. उन्होंने अतिवादियों को आनंद की अनुभूति कराई है."
पत्रकारों से तल्खी
ज़ेमन अपने समर्थकों के लिए एक स्पष्टवादी इंसान हैं. वो पुरानी तरह के राजनेता हैं. सिगरेट और शराब का जमकर सेवन करते हैं. वो एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो चेक गणराज्य के आम लोगों के डर और उम्मीदों की बात करते हैं.
हालांकि उनकी टिप्पणियां विवादों और 'शर्म' की वजह बनी हैं.
बीते साल अक्टूबर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज़ेमन ने पत्रकारों के ख़िलाफ तल्खी खुलकर दिखाई. वो एक राइफल की प्रतिक़ति थामे थे जिस पर लिखा था 'पत्रकारों की ओर'
उन्हें ये खिलौना राइफल देश के पश्चिमी हिस्से के दौरे के दौरान मिली थी. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्कुराते हुए कहा, 'जो लिखा है, उसे देखिए'
जीत का अनुमान
पहली बार वोट देने जा रहीं कालरा कहती हैं कि वो अपने देश की दिशा में बदलाव देखना चाहती हैं
वो कहती हैं, "मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ज़ेमन को जिस तरह देश का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, वो वैसे नहीं कर रहे हैं. कई बार वो ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे वो राष्ट्रपति न हों."
राष्ट्रपति ज़ेमन की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चर्चा है. वो टाइप 2 डायबटीज़ से पीड़ित हैं. इसकी वजह से उन्हें चलने में भी दिक्कत होती है.
हालांकि अगर ओपिनियन पोल सही बैठते हैं तो मतदान उन्हें दोबारा चुनने जा रहे हैं.
लेकिन अगर कोई अन्य उम्मीदवार जीत हासिल करता है तो ये चेक गणराज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा.
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