उत्तराखंड में अब तक आगज़नी की 1100 घटनाएं

उत्तराखंड आग

इमेज स्रोत, spokespersonmod

उत्तराखंड के जंगलों में फैली आग को देखते हुए राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है.

संवेदनशील स्थानों पर सेना की मदद ली जा रही है और राष्ट्रीय आपदा रिस्पॉन्स फ़ोर्स यानी एनडीआरएफ़ की तीन टुकड़ियों को मदद के लिए बुला लिया गया है.

ख़बरें है कि राज्य सरकार आग बुझाने में वायुसेना के हेलिकॉप्टरों की मदद भी ले रही है.

आज से वायुसेना के दो एमआई-17 हेलिकॉप्टर आग बुझाने के लिए जंगलों के ऊपर उड़ान भरेंगे. इसमें 11 सदस्यीय दल शामिल है.

उत्तराखंड

इमेज स्रोत, SpokespersonMoD

इन हेलिकॉप्टरो में क़रीब चार हज़ार लीटर की पानी की टंकी है और ये प्रभावित क्षेत्रों में पानी का छिड़काव करते हुए उड़ान भरेंगे.

एक हेलिकॉप्टर गढ़वाल के श्रीनगर में है और दूसरा नैनीताल के भवाली में है.

राज्य में सभी वनकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.

उत्तराखंड में एक महीने से भड़की आग की हज़ार से ज़्यादा घटनाओं में अब तक 1900 हेक्टेयर से ज़्यादा वनक्षेत्र तबाह हो चुका है.

इमेज स्रोत, Shiv Joshi

उत्तराखंड के वन्यजीव दोहरे संकट में फंसे हैं. आग के अलावा पानी की कमी ने उनका जीना मुहाल कर दिया है.

राज्यपाल ने ज़िलाधिकारियों को हर संसाधन को चाकचौंबद रखने के निर्देश दिए हैं. कोई व्यक्ति आग लगाता दिखता है तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्ऱवाई के लिए भी कहा गया है.

क़रीब 10 पशु मारे गए हैं, लोगों के खेत जल गए हैं. सात लोगों की जानें चली गई हैं और 14 लोग अब तक आग की घटनाओं में झुलस चुके हैं.

केंद्र सरकार भी इस आग के बाद हरकत में आ गई है.

उत्तराखंड फ़ायर

इमेज स्रोत, Shiv Joshi

देहरादून में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के दीक्षांत समारोह में आए भारत के वन महानिदेशक एसएस नेगी ने माना कि इस बार यह मामला गंभीर है.

उन्होंने कहा, ''इस बार आग कुछ ज़्यादा गंभीर है क्योंकि यह एक चक्र में होता है. पिछले दो साल में आग की घटनाएं ज़्यादा नहीं थी, लेकिन 2012 में ऐसी ही घटनाएं हुई थीं.''

राज्य के सभी 13 ज़िले आग से प्रभावित हुए. वैसे आग का सबसे ज़्यादा असर गढ़वाल मंडल में है. दूसरे ज़्यादा प्रभावित ज़िले हैं चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी.

उधर, कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल ज़िले आग से ज़्यादा प्रभावित हैं.

उत्तराखंड फ़ायर

इमेज स्रोत, Shiv Joshi

संरक्षित वन क्षेत्रों, राष्ट्रीय पार्कों और वन्यजीव अभ्यारण्यों में भी आग फैली हुई है. उत्तराखंड में कुल 12 पार्क और अभ्यारण्य हैं.

राज्य के मुख्य वन संरक्षक राजेंद्र कुमार के मुताबिक़, ''आग वहां भी बुझाई जा रही है. जानवरों को वहां दो तरह की मुश्किलें हैं. पानी के स्रोत सूख रहे हैं और आग से सामना करना पड़ रहा है. अभी टैंकरों से वॉटर होल्स में पानी पहुंचाया जा रहा है.''

कुल मिलाकर इस समय आग की क़रीब 1100 घटनाएं पूरे राज्य में दर्ज की गई हैं. जिसमें 603 घटनाएं गढ़वाल मंडल के जंगलों में, 318 कुमाऊं मंडल के जंगलों में और 161 वन्य जीव क्षेत्रों की है.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi/" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)