त्रिपुरा पुलिस पर एलजीबीटी समुदाय के लोगों के उत्पीड़न का आरोप
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- Author, पिनाकी दास
- पदनाम, अगरतला से, बीबीसी हिंदी के लिए
एलजीबीटी समुदाय के चार सदस्यों के साथ त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर उत्पीड़न का एक मामला सामने आया है.
आरोप है कि एलजीबीटी समुदाय के लोगों से महिला पुलिस स्टेशन में जेंडर पहचान ज़ाहिर करने के लिए सार्वजनिक तौर पर कपड़े उतरवाए गए और उसके बाद अधनंगी हालात में उन्हें नज़दीक के पुरुष पुलिस स्टेशन ले जाया गया जहां पुलिस ने उन्हें सर्दी की ठिठुरती रात में सारी रात थाने में रखा.
ये आरोप भी है कि इस दौरान इन लोगों को ना तो अपने परिवार और ना ही किसी मित्र से संपर्क करने की अनुमति दी गई.
यह घटना शनिवार की है. लेकिन सोमवार को पीड़ित सहित एलजीबीटी समुदाय के सदस्यों ने अगरतला प्रेस क्लब में एक प्रेस कांफ़्रेंस करके पुलिस थाने में इस कथित उत्पीड़न के बारे में लोगों को जानकारी दी, इसके बाद स्थानीय मीडिया में इस घटना के कुछ वीडियो क्लिप पब्लिश हुए जो वायरल हो गए.
आरोप लगाने वाले समूह की एक सदस्य मोहिनी ने बताया , ''यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब शनिवार की रात एक बार में एक शख़्स ने उनके साथ छेड़छाड़ शुरू की. ख़ुद को प्रेस रिपोर्टर बताने वाले ये शख़्स बिना उनकी सहमति के उनके साथ ज़ोर ज़बर्दस्ती कर रहा था.''
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मोहिनी ने कहा, ''जब हम लोग घर लौट रही थीं तब वह रिपोर्टर पुलिस के साथ आया और कहने लगा कि ये लोग लड़के हैं और लड़कियों की तरह कपड़े पहनकर बार डांसर के तौर पर काम कर रहे हैं. हमलोगों ने इससे इनकार किया.''
'पुलिस ने उतरवाए कपड़े'
मोहिनी के दावे के मुताबिक़, पुलिस बिना किसी स्पष्टीकरण के उन्हें थाने ले गई और रिपोर्टर के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, पुलिसकर्मी इस दौरान अभद्र तरीके से पेश आते रहे, कपड़े उतरवाए और अधनंगी हालात में वेस्ट अगरतला वीमेन पुलिस स्टेशन से वेस्ट अगरतला पुलिस स्टेशन तक ले गए.
मोहिनी का कहना है कि वे लोग बार में पार्टी करने के लिए गई थीं, लेकिन घर वापसी के दौरान उन्हें यह सब झेलना पड़ा.
मोहिनी ने यह भी बताया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फ़ोन भी ले लिए और इस वजह से वो अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से संपर्क नहीं कर पाईं.
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राज्य में एलजीबीटी समुदाय के क़ानूनी मामलों को देखने वाली वकील नीलांजना राय का कहना है कि किसी भी क़ानून में किसी दूसरे जेंडर के कपड़े पहनना अपराध नहीं है.
नीलांजना ने कहा, ''एलजीबीटी समुदाय को लेकर ज़ागरुकता का नितांत अभाव है, ऐसे में मैं मीडिया प्रकाशनों से इस मुद्दे को प्रमुखता से जगह देने की अपील करती हूं ताकि एलजीबीटी समुदाय के लोगों को इस तरह के उत्पीड़न से बचाया जा सके.
एलजीबीटीक्यूआईए प्लस अधिकारों की कार्यकर्ता स्नेहा गुप्ता राय ने समुदाय के दूसरे सदस्यों के साथ प्रेस कांफ़्रेंस का आयोजन किया था.
उन्होंने कहा, ''ऐसे मामले का सामने आना राज्य के लोगों के लिए शर्मनाक स्थिति है, एलजीबीटीक्यू समुदाय अभी भी समाज के लिए टैबू बना हुआ है. जेंडर आइडेंटिटी किसी की निजी पसंद का मामला है और वीमेनहुड शारीरिक ना होकर मानसिक सोच की प्रक्रिया है.''
इस मामले में मोहिनी ने अपने साथियों के साथ उसी वेस्ट अगरतला पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है जहां उन्हें पूरी रात प्रताड़ना में बितानी पड़ी थी.
सीएम से की न्याय की मांग
एलजीबीटी समुदाय के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब से मामले के दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है. देब फ़िलहाल राज्य के गृह मंत्री भी हैं. इन लोगों ने अपील की है कि पीड़ितों को न्याय और सम्मान देकर ही भविष्य में समुदाय को उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा.
हालांकि वेस्ट अगरतला पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन आरोपों का खंडन किया है. उन्होंने कहा कि शनिवार को पुलिस को कुछ पुरुषों के ख़ास इलाके में महिला ड्रेस में होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद संदेह के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया था.
पुलिस अधिकारी के मुताबिक़, जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेजा गया और अगली सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन इस दौरान किसी भी सदस्य ने पुलिसकर्मियों को यह नहीं बताया कि वे लोग एलजीबीटी समुदाय के सदस्य हैं.
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