कोरोना: राज्यों के पास कमी, तो प्राइवेट अस्पतालों में कैसे मिल रहीं वैक्सीन?

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- Author, शुभम किशोर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में रहने वाले प्रशांत कुमार पिछले कई दिनों से अपने और अपने परिवार के लिए वैक्सीन का स्लॉट बुक करने की कोशिश कर रहे थे. सरकारी अस्पतालों और टीकाकरण केंद्रों में उन्हें स्लॉट नहीं मिला, तो उन्होंने प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लेने का फ़ैसला किया.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "ये हैरानी की बात है कि प्राइवेट अस्पतालों में उसी दिन के स्लॉट मिल जा रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अगले कई दिनों के स्लॉट भरे हुए हैं."
प्रशांत कहते हैं कि उन्हें पैसे देकर वैक्सीन लेने में भी कोई परेशानी नहीं है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल जायज़ पैसे नहीं ले रहे हैं.
वो कहते हैं, "हर अस्पताल का अपना रेट है. एक डोज़ के एक हज़ार रुपए तक लग रहे हैं. परिवार में दो लोग दो डोज़ लेंगे, तो चार हज़ार रुपए देने होंगे, जबकि वैक्सीन इतनी महंगी नहीं है."
बीबीसी ने कोविन ऐप पर नोएडा के अस्पतालों में स्लॉट खोजने की कोशिश की तो पाया कि प्रशांत का दावा सही है. हमने पाया कि सरकारी अस्पतालों में अगले कई दिनों के स्लॉट बुक हैं जबकि प्राइवेट अस्पतालों में आसानी से वैक्सीन मिल रही है, ख़ासतौर पर 18 से 44 साल के लोगों के लिए. वैक्सीन के रेट 250 रुपए से 1000 रुपए तक हैं.

दिल्ली सरकार ने उठाए सवाल
दिल्ली में भी प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन आसानी से मिल रही है. कोविन ऐप में एक ओर जहाँ ज़्यादातर सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं है, प्राइवेट अस्पतालों में 600 रुपए से लेकर 1000 रुपए की क़ीमत चुका कर वैक्सीन ली जा सकती है.
दिल्ली सरकार ने इसके लिए केंद्र की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी ने दिल्ली के कोविन ऐप की एक तस्वीर ट्वीट कर लिखा, "भारत शायद दुनिया का इकलौता देश है, जहाँ राज्य सरकार जो मुफ़्त में वैक्सीन दे रही है, उसके पास सप्लाई नहीं है और प्राइवेट अस्पतालों के पास बढ़े हुए रेट में देने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है."
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पोस्ट X समाप्त, 1
हालाँकि बीजेपी ने आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा है कि दिल्ली ने समय रहते वैक्सीन नहीं ख़रीदी, और राज्य से ज़्यादा वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों ने ख़रीद ली.
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केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने 11 मुख्यमंत्रियों की चिट्ठी लिख कहा है कि केंद्र सरकार वैक्सीन देने की अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रही है.
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महाराष्ट्र में भी प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध वैक्सीन
लेकिन ये हाल सिर्फ़ दिल्ली और नोएडा का नहीं है. महाराष्ट्र में राज्य सरकार को 18 से 44 साल के लोगों के टीकाकरण को रोकना पड़ा था. सरकार के मुताबिक़ के जल्द ही फिर से टीकाकरण शुरू किया जाएगा.
लेकिन कोविन ऐप पर महाराष्ट्र के पुणे, नासिक, मुंबई समेत कई शहरों में 18-44 ग्रुप के लिए वैक्सीन के स्लॉट प्राइवेट अस्पतालों में बुक किए जा सकते हैं.
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अंग्रेज़ी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ मुंबई के प्राइवेट अस्पताल 40 से 50 फ़ीसदी वैक्सीन कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को देने के लिए रिज़र्व कर रहे हैं. इसके लिए 16 से 66 फ़ीसदी अधिक क़ीमत चुकानी होगी.
कई दूसरे शहरों में भी प्राइवेट अस्पताल दफ़्तरों और कॉलनियों में कैंप लगा रहे हैं और बढ़े हुए दाम पर वैक्सीन दे रहे हैं. हालाँकि देश के कई शहरों में प्राइवेट और सरकारी दोनों जगह वैक्सीन के स्लॉट ख़ाली हैं. कुछ शहरों में वैक्सीन कहीं भी उपलब्ध नहीं है.
लेकिन सरकार के पास वैक्सीन नहीं, तो प्राइवेट हाथों में वैक्सीन कैसे पहुँच रही है.

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सरकार की नीतियों पर सवाल
1 मई को लागू की गई सरकार की नीति के मुताबिक़:
- वैक्सीन निर्माता 50 प्रतिशत तक वैक्सीन राज्य सरकारों को या खुले बाज़ार में पहले से तय दाम पर बेच सकते हैं.
- 18 साल से अधिक के लोगों को वैक्सीन देने के लिए राज्य सरकारें सीधे निर्माता से वैक्सीन ख़रीद सकती हैं.
- भारत सरकार पहले की तरह फ़्रंटलाइन वर्कर, 45 से अधिक उम्र के लोगों या दूसरे ज़रूरतमंद लोगों को वैक्सीन मुफ़्त में देती रहेगी.
जानकारों का कहना है कि इसी नीति के कारण ये समस्या आ गई है कि वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों के पास है, लेकिन राज्य सरकारों के पास नहीं.
बीबीसी से बात करते हुए पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, "अगर वैक्सीन की सप्लाई पूरी होती, तो ये बात समझ आती थी, लेकिन जब 45 से ऊपर से लोगों को और कोमॉर्बिडिटी वाले लोगों को ही वैक्सीन नहीं मिली है, तो प्राइवेट सेक्टर को अभी वरीयता देना सही नहीं है."

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ये भी मुमकिन है कि प्राइवेट अस्पताल राज्य सरकारों के मुक़ाबले अधिक पैसे देकर वैक्सीन ख़रीद सकते हैं.
रेड्डी कहते हैं, "जब प्राइवेट प्लेयर निर्माता से सीधे ख़रीद रहे हैं, तो मुमकिन है कि निर्माता प्राइवेट अस्पताल को महंगे दाम में वैक्सीन बेचें, क्योंकि वो राज्य सरकार से अधिक पैसे देने को तैयार हो सकते हैं."
ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट
पूर्ण टीकाकरण वाले लोगों का प्रतिशत
| विश्व |
61
|
12,12,05,24,547 |
| चीन |
87
|
3,40,36,43,000 |
| भारत |
66
|
1,97,89,18,170 |
| अमरीका |
67
|
59,62,33,489 |
| ब्राजील |
79
|
45,69,03,089 |
| इंडोनेशिया |
61
|
41,75,22,347 |
| जापान |
81
|
28,57,56,540 |
| बांग्लादेश |
72
|
27,87,85,812 |
| पाकिस्तान |
57
|
27,33,65,003 |
| वियतनाम |
83
|
23,35,34,502 |
| मैक्सिको |
61
|
20,91,79,257 |
| जर्मनी |
76
|
18,29,26,984 |
| रसियन फेडरेशन |
51
|
16,89,92,435 |
| फिलीपिंस |
64
|
15,38,52,751 |
| ईरान |
68
|
14,99,57,751 |
| ब्रिटेन |
73
|
14,93,97,250 |
| तुर्की |
62
|
14,78,39,557 |
| फ्रांस |
78
|
14,61,97,822 |
| थाईलैंड |
76
|
13,90,99,244 |
| इटली |
79
|
13,83,19,018 |
| दक्षिण कोरिया |
87
|
12,60,15,059 |
| अर्जेंटीना |
82
|
10,60,75,760 |
| स्पेन |
87
|
9,51,53,556 |
| मिस्र |
36
|
9,14,47,330 |
| कनाडा |
83
|
8,62,56,122 |
| कोलंबिया |
71
|
8,57,67,160 |
| पेरू |
83
|
7,78,92,776 |
| मलेशिया |
83
|
7,12,72,417 |
| सऊदी अरब |
71
|
6,67,00,629 |
| बर्मा |
49
|
6,22,59,560 |
| चिली |
92
|
5,96,05,701 |
| चाइनीज ताइपे |
82
|
5,82,15,158 |
| ऑस्ट्रेलिया |
84
|
5,79,27,802 |
| उजबेकिस्तान |
46
|
5,57,82,994 |
| मोरक्को |
63
|
5,48,46,507 |
| पोलैंड |
60
|
5,46,05,119 |
| नाइजीरिया |
10
|
5,06,19,238 |
| इथियोपिया |
32
|
4,96,87,694 |
| नेपाल |
69
|
4,68,88,075 |
| कंबोडिया |
85
|
4,09,56,960 |
| श्रीलंका |
68
|
3,95,86,599 |
| क्यूबा |
88
|
3,87,25,766 |
| वेनेजुएला |
50
|
3,78,60,994 |
| दक्षिण अफ्रीका |
32
|
3,68,61,626 |
| इक्वेडोर |
78
|
3,58,27,364 |
| नीदरलैंड्स |
70
|
3,33,26,378 |
| यूक्रेन |
35
|
3,16,68,577 |
| मोजाम्बिक |
44
|
3,16,16,078 |
| बेल्जियम |
79
|
2,56,72,563 |
| संयुक्त अरब अमीरात |
98
|
2,49,22,054 |
| पुर्तगाल |
87
|
2,46,16,852 |
| रवांडा |
65
|
2,27,15,578 |
| स्वीडन |
75
|
2,26,74,504 |
| यूगांडा |
24
|
2,17,56,456 |
| ग्रीस |
74
|
2,11,11,318 |
| कजाखस्तान |
49
|
2,09,18,681 |
| अंगोला |
21
|
2,03,97,115 |
| घाना |
23
|
1,86,43,437 |
| इराक |
18
|
1,86,36,865 |
| कीनिया |
17
|
1,85,35,975 |
| ऑस्ट्रिया |
73
|
1,84,18,001 |
| इसराइल |
66
|
1,81,90,799 |
| ग्वाटेमाला |
35
|
1,79,57,760 |
| हांगकांग |
86
|
1,77,31,631 |
| चेक गणराज्य |
64
|
1,76,76,269 |
| रोमानिया |
42
|
1,68,27,486 |
| हंगरी |
64
|
1,65,30,488 |
| डोमिनिकन रिपब्लिक |
55
|
1,57,84,815 |
| स्विट्जरलैंड |
69
|
1,57,59,752 |
| अल्जीरिया |
15
|
1,52,05,854 |
| होंडूरास |
53
|
1,44,44,316 |
| सिंगापुर |
92
|
1,42,25,122 |
| बोलिविया |
51
|
1,38,92,966 |
| ताजकिस्तान |
52
|
1,37,82,905 |
| अजरबैजान |
47
|
1,37,72,531 |
| डेनमार्क |
82
|
1,32,27,724 |
| बेलारूस |
67
|
1,32,06,203 |
| ट्यूनीशिया |
53
|
1,31,92,714 |
| आइवरी कोस्ट |
20
|
1,27,53,769 |
| फिनलैंड |
78
|
1,21,68,388 |
| जिम्बाब्वे |
31
|
1,20,06,503 |
| निकारागुआ |
82
|
1,14,41,278 |
| नॉर्वे |
74
|
1,14,13,904 |
| न्यूजीलैंड |
80
|
1,11,65,408 |
| कोस्टा रिका |
81
|
1,10,17,624 |
| आयरलैंड |
81
|
1,09,84,032 |
| अल सल्वाडोर |
66
|
1,09,58,940 |
| लाओ पीपुल्स डेम रिपब्लिक |
69
|
1,08,94,482 |
| जॉर्डन |
44
|
1,00,07,983 |
| पराग्वे |
48
|
89,52,310 |
| तंजानिया |
7
|
88,37,371 |
| उरुग्वे |
83
|
86,82,129 |
| सर्बिया |
48
|
85,34,688 |
| पनामा |
71
|
83,66,229 |
| सूडान |
10
|
81,79,010 |
| कुवैत |
77
|
81,20,613 |
| जाम्बिया |
24
|
71,99,179 |
| तुर्केमेनिस्तान |
48
|
71,40,000 |
| स्लोवाकिया |
51
|
70,76,057 |
| ओमान |
58
|
70,68,002 |
| कतर |
90
|
69,81,756 |
| अफ़ग़ानिस्तान |
13
|
64,45,359 |
| गिनी |
20
|
63,29,141 |
| लेबनान |
35
|
56,73,326 |
| मंगोलिया |
65
|
54,92,919 |
| क्रोएशिया |
55
|
52,58,768 |
| लिथुआनिया |
70
|
44,89,177 |
| बुल्गारिया |
30
|
44,13,874 |
| सीरिया |
10
|
42,32,490 |
| फलस्तीन |
34
|
37,34,270 |
| बेनिन |
22
|
36,81,560 |
| लीबिया |
17
|
35,79,762 |
| नीजेर |
10
|
35,30,154 |
| डीआर कांगो |
2
|
35,14,480 |
| सियरा लियोन |
23
|
34,93,386 |
| बहरीन |
70
|
34,55,214 |
| टोगो |
18
|
32,90,821 |
| किर्गिजस्तान |
20
|
31,54,348 |
| सोमालिया |
10
|
31,43,630 |
| स्लोवेनिया |
59
|
29,96,484 |
| बुर्किना फासो |
7
|
29,47,625 |
| अल्बानिया |
43
|
29,06,126 |
| जॉर्जिया |
32
|
29,02,085 |
| लातविया |
70
|
28,93,861 |
| मौरिटानिया |
28
|
28,72,677 |
| बोत्सवाना |
63
|
27,30,607 |
| लाइबेरिया |
41
|
27,16,330 |
| मॉरीशस |
74
|
25,59,789 |
| सेनेगल |
6
|
25,23,856 |
| माली |
6
|
24,06,986 |
| मेडागास्कर |
4
|
23,69,775 |
| चैड |
12
|
23,56,138 |
| मलावी |
8
|
21,66,402 |
| मोल्डोवा |
26
|
21,65,600 |
| अर्मीनिया |
33
|
21,50,112 |
| एस्टोनिया |
64
|
19,93,944 |
| बोस्निया और हर्जेगोविना |
26
|
19,24,950 |
| भूटान |
86
|
19,10,077 |
| एफवाईआर मेसिडोनिया |
40
|
18,50,145 |
| कमारू |
4
|
18,38,907 |
| कोसोवो |
46
|
18,30,809 |
| साइप्रस |
72
|
17,88,761 |
| टिमूर-लेस्टे |
52
|
16,38,158 |
| फिजी |
70
|
16,09,748 |
| त्रिनिडाड एंड टोबैगो |
51
|
15,74,574 |
| जमैका |
24
|
14,59,394 |
| मकाऊ |
89
|
14,41,062 |
| माल्टा |
91
|
13,17,628 |
| लक्जेमबर्ग |
73
|
13,04,777 |
| दक्षिण सूडान |
10
|
12,26,772 |
| सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक |
22
|
12,17,399 |
| ब्रुनई दारुसलाम |
97
|
11,73,118 |
| गुयाना |
58
|
10,11,150 |
| मालदीव |
71
|
9,45,036 |
| लेसोथो |
34
|
9,33,825 |
| यमन |
1
|
8,64,544 |
| कांगो |
12
|
8,31,318 |
| नामीबिया |
16
|
8,25,518 |
| गाम्बिया |
14
|
8,12,811 |
| आइसलैंड |
79
|
8,05,469 |
| केप वर्डे |
55
|
7,73,810 |
| मॉन्टेनिग्रो |
45
|
6,75,285 |
| कोमोरोस |
34
|
6,42,320 |
| पापुआ न्यू गिनी |
3
|
6,15,156 |
| गिनी-बिसाऊ |
17
|
5,72,954 |
| गैबन |
11
|
5,67,575 |
| स्वाजीलैंड |
29
|
5,35,393 |
| सूरीनाम |
40
|
5,05,699 |
| समोआ |
99
|
4,94,684 |
| बेलिज |
53
|
4,89,508 |
| इक्वेटोरियल गिनी |
14
|
4,84,554 |
| सोलोमन आइलैंड |
25
|
4,63,637 |
| हेटी |
1
|
3,42,724 |
| बहामा |
40
|
3,40,866 |
| बारबाडोस |
53
|
3,16,212 |
| वनुआतू |
40
|
3,09,433 |
| टोंगा |
91
|
2,42,634 |
| जर्सी |
80
|
2,36,026 |
| जिबूटी |
16
|
2,22,387 |
| सेलेल्स |
82
|
2,21,597 |
| साओ टोम एंड प्रिंसिप |
44
|
2,18,850 |
| आइल ऑफ़ मैन |
79
|
1,89,994 |
| गर्नज़ी |
81
|
1,57,161 |
| अंडौरा |
69
|
1,53,383 |
| किरिबाटी |
50
|
1,47,497 |
| केमैन आइलैंड्स |
90
|
1,45,906 |
| बरमूडा |
77
|
1,31,612 |
| एंटिगा एंड बरबूडा |
63
|
1,26,122 |
| सेंट लूसिया |
29
|
1,21,513 |
| जिब्राल्टर |
123
|
1,19,855 |
| फरोर आइलैंड्स |
83
|
1,03,894 |
| ग्रेनाडा |
34
|
89,147 |
| ग्रीनलैंड |
68
|
79,745 |
| सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडिन्स |
28
|
71,501 |
| लिचटेन्सटाइन |
69
|
70,780 |
| टर्क एंड कैकस आइलैंड्स |
76
|
69,803 |
| सैन मरीनो |
69
|
69,338 |
| डोमोनिका |
42
|
66,992 |
| मोनैको |
65
|
65,140 |
| सेंट किट्स एंड नेविस |
49
|
60,467 |
| ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स |
59
|
41,198 |
| कुक आइलैंड्स |
84
|
39,780 |
| एंग्विला |
67
|
23,926 |
| नौरू |
79
|
22,976 |
| बुरुंडी |
0.12
|
17,139 |
| तुवालू |
52
|
12,528 |
| सेंट हेलेना |
58
|
7,892 |
| मॉन्टसेराट |
38
|
4,422 |
| फॉकलैंड |
50
|
4,407 |
| नियू |
88
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4,161 |
| टोकेलाउ |
71
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1,936 |
| पिटकेयर्न |
100
|
94 |
| इरिट्रिया |
0
|
0 |
| उत्तर कोरिया |
0
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0 |
| दक्षिण जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड |
0
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| ब्रितानी हिंद महासागर क्षेत्र |
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यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है लेकिन प्रत्येक स्थान के लिए निर्धारित ताज़ा टीकों की संख्या को नहीं दर्शाती है. कुल टीकाकरण से तात्पर्य दी गई खुराक़ की संख्या से है और इसमें पूर्ण टीकाकरण के लिए आवश्यक खुराक़ के अलावा बूस्टर खुराक़ शामिल हो सकते हैं. पूर्ण टीकाकरण की परिभाषा देश और टीके के प्रकार से अलग अलग हो सकती है. समय के साथ इसमें बदलाव संभव है.
स्रोत: अवर वर्ल्ड इन डेटा
आखिरी अपडेट: 5 जुलाई 2022, 5:58 pm IST
"वैक्सीन हमेशा से ही केंद्र सरकार ख़रीदती रही है और वो ही इसका वितरण करती है. इस तरह की विकेंद्रित सप्लाई शायद ही ऐसे किसी दूसरे बड़े देश में होती है."

रेड्डी कहते हैं कि अभी हालात ऐसे नहीं है कि वैक्सीन को मार्केट के भरोसे छोड़ा जाए, ये सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है कि जिन लोगों को वैक्सीन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, ये पहले उन तक पहुँचे.
"गाँव या छोटे शहरों की बात करें, तो वहाँ प्राइवेट अस्पताल नहीं है, वहाँ वैक्सीन सरकारों को पहुँचानी होगी. तो राज्य सरकार और प्राइवेट सेक्टर को एक तरह का महत्व नहीं दे सकते. ऐसा कर आप ग़रीबों के साथ और छोटे शहरों और गाँव में रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव कर रहे हैं."
रेड्डी का कहना है कि प्राइवेट अस्पतालों का इस्तेमाल वैक्सीनेशन के लिए करना चाहिए, लेकिन ये किसे मिले इसका फ़ैसला सरकार को करना चाहिए.
"प्राइवेट अस्पतालों को इस तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए कि आर्थिक भार ग़रीब व्यक्ति पर न पड़े."

इमेज स्रोत, Getty Images
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से वैक्सीन के अलग-अलग रेट को लेकर सवाल पूछे.
जस्टिस डीवाई चंद्रृचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि वैक्सीन के एक दाम होने चाहिए.
कोर्ट ने कहा, "केंद्र का कहना है कि उन्हें कम क़ीमत में वैक्सीन मिल रही है, क्योंकि वो ज़्यादा मात्रा में ख़रीदते रहते हैं तो फिर राज्यों को अधिक क़ीमत में क्यों मिल रही है. पूरे देश वैक्सीन की एक क़ीमत होनी चाहिए."
"अगर वैक्सीन ख़रीदना मक़सद है, तो केंद्र सरकार सिर्फ़ 45 से ऊपर वालों तक के लिए ख़ुद को क्यों सीमित रख रही है. और 45 से कम वालों को राज्यों के भरोसे क्यों छोड़ रही है. इसके अलावा हम ग़रीब और पिछड़े वर्गों को कैसे देख रहे हैं?"

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सरकार का पक्ष
वैक्सीन को लेकर सरकार अपनी नीतियों का बचाव करती रही है.
नीति आयोग की तरफ से 27 मई को एक प्रेस रिलीज़ जारी की गई, जिसमें कहा गया, "स्वास्थ्य राज्य का विषय है और लिब्रलाइज़्ड वैक्सीन पॉलिसी राज्यों द्वारा अधिक शक्ति देने के लिए किए जा रहे लगातार अनुरोध के बाद लाई गई है."
इस प्रेस रिलीज़ से मुताबिक, "केंद्र सरकार को दी जाने वाली वैक्सीन के अलावा 25 प्रतिशत वैक्सीन राज्यों को और 25 प्रतिशत प्राइवेट अस्पतालों को मिल रही है. लेकिन इन्हें लगाए जाने की प्रक्रिया में आने वाली मुश्किलों के कारण कई लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है."

प्राइवेट अस्पताल कैसे ख़रीद रहे वैक्सीन?
सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या प्राइवेट अस्पताल वैक्सीन को लेकर पारदर्शिता बरत रहे हैं?
दिल्ली के एक अस्पताल के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके पास अगले 20 दिनों के लिए पर्याप्त वैक्सीन है. हालाँकि ये संख्या कितनी है इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी.
ये पूछने पर क्या उन्हें वैक्सीन उसी रेट पर मिल रही है जिसपर राज्य सरकारें ख़रीद रही हैं, उन्होंने कहा, "राज्य सरकारों को किस रेट पर वैक्सीन मिल रही है हमें नहीं पता, हर कंपनी के साथ दवाइयों को लेकर मोलभाव होता है, और जो रेट तय होता है उस पर ही वैक्सीन ली जाती है."

उन्होंने कहा कि वैक्सीन लोगों को सरकार के तय रेट के मुताबिक़ ही दी जा रही है.
कोविन ऐप पर देश के कई हिस्सों मे अपोलो के अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध दिखी. हमने अपोलो से रविवार को ईमेल और फ़ोन के ज़रिए पूछा कि वैक्सीन कितनी मात्रा में और किस रेट पर ख़रीदी गईं. अपोलो की तरफ़ से आश्वासन दिया गया कि हमारे सवालों का जवाब दिया जाएगा, लेकिन ख़बर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया.
अगर अस्पताल का जवाब आता है, तो इस ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा.
होटल में वैक्सीनेशन को लेकर विवाद
इस बीच कुछ होटलों के इश्तेहार सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें वैक्सीन पैकेज देने की बात कही गई.
रविवार को सरकार ने इसे तुरंत रोकने ने आदेश दिए.
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो उन संस्थाओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएँ, जो कोविड-19 के मद्देनज़र जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके कोरोना टीकाकरण का पैकेज दे रही हैं.
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इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोहर अगानी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र लिखा है.
पत्र में कहा गया है, "स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि होटलों के साथ मिल कर कुछ निजी अस्पताल कोविड वैक्सीनेशन पैकेज दे रहे हैं. ये राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन है."
अपने पत्र में मनोहर अगानी ने लिखा कि सरकारी और निजी अस्पताल के कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स के अलावा काम की जगहों और बड़े-बूढ़ों और अक्षम लोगों के लिए घरों में कोरोना टीकाकरण किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि इसके अलावा होटलों जैसी किसी और जगह पर टीकाकरण करना दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, इसे तुंरत बंद किया जाना चाहिए.
ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट
स्रोत: अवर वर्ल्ड इन डेटा
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