हाथरस केस: एसआईटी को सीएम योगी ने 10 दिन का समय और दिया
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हाथरस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने बताया है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के आदेश पर विशेष जाँच दल (एसआईटी) को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए 10 दिन का समय और दिया गया है.
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इससे पहले उम्मीद की जा रही थी कि विशेष जाँच दल बुधवार को अपनी जाँच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप सकता है. मंगलवार को विशेष जाँच दल ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की थी. साथ ही घटनास्थल समेत उस जगह का मुआयना किया था, जहाँ लड़की के शव को पुलिस ने जलाया था.
29 सितंबर को सीएम योगी ने गृह सचिव भगवान स्वरूप के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जाँच दल गठित कर, सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिये थे.
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हालांकि, पीड़ित परिवार इस मामले में उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच की माँग कर रहा है. शनिवार को सीएम योगी ने यह भी कहा था कि 'वे हाथरस मामले में गहन पड़ताल के लिए सीबीआई से इस मामले की विवेचना कराने की सिफ़ारिश कर रहे हैं.'
इस मामले में जाँच अभी जारी है और रोज़ नई चीज़ें सामने आ रही हैं. यूपी पुलिस ने कुछ वक़्त पहले इस मामले में गैंग-रेप की संभावना से इनकार किया था.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब पुलिस के सूत्रों का कहना है कि मृतक लड़की के भाई के मोबाइल नंबर से एक अभियुक्त के मोबाइल पर हाल तक बातचीत होती रही.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चला है कि मुख्य अभियुक्त और पीड़िता के भाई के नंबर पर पाँच महीने में 100 से ज़्यादा बार बात हुई. हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा है.
आधी रात शव जलाने को लेकर सवाल
इस बीच, हाथरस केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है. इस केस में भी अभियुक्तों की पैरवी वकील एपी सिंह करने वाले हैं. एपी सिंह निर्भया कांड में भी अभियुक्तों के वकील थे.
वकील एपी सिंह ने मंगलवार को प्रेस से बात करते हुए कहा कि 'हाथरस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है.' उन्होंने आरोप लगाया कि 'हाथरस में लड़की की हत्या उसके भाई ने ही की है.'
प्रेस से बातचीत में उन्होंने यह माना कि 'स्थानीय प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को उनकी बेटी का शव ना दिया जाना, मानवाधिकारों का उल्लंघन है.' उन्होंने कहा कि 'पीड़ित परिवार को उनकी बेटी का शव दिया जाना चाहिए था जिसके लिए यूपी सरकार ने संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की है. लेकिन रेप के आरोप में कई झोल दिखाई देते हैं.'
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हाथरस की लड़की ने दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में अपना दम तोड़ा था, जिसके बाद शव को पिछले मंगलवार हाथरस स्थित उनके गाँव ले जाया गया था, जहाँ यूपी पुलिस ने शव को परिजनों को सौंपने की जगह, सीधे उसे आग दे दी थी.
ऐसा क्यों किया गया? जब यह सवाल सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, तो उन्होंने कहा कि "उसे ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि अगर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए सुबह तक इंतज़ार किया गया, तो बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती है."
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