ममता बनर्जीः मोदी जी, माफ़ करें, मैं नहीं आ सकती

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी.

तीस मई को दिल्ली में शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया होगा और इसमें शामिल होने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी न्योता भेजा गया है.

कथित रूप से बीजेपी ने उन लोगों के परिजनों को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है जो पश्चिम बंगाल में कथित रूप से राजनीतिक हिंसा में मारे गए.

बीजेपी ने दावा किया है कि राजनीतिक हिंसा में उसके 54 कार्यकर्ता मारे गए. ममता बनर्जी ने इसका खंडन किया है.

ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि शपथ ग्रहण समारोह लोकतंत्र के उत्सव मनाने वाला महत्वपूर्ण मौक़ा होता है, न कि किसी राजनीतिक दल द्वारा इसकी गरिमा घटाने वाला.

अपने बयान को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है, "बधाई, नए प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी जी. मेरी योजना संवैधानिक न्योते को स्वीकार करने और शपथ ग्रहण समारोह में जाने की थी. हालांकि अंतिम क्षण में मैं देख रही हूं कि मीडिया में ऐसी ख़बरें आ रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि बीजेपी दावा कर रही है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा में 54 लोग मारे गए हैं. ये पूरी तरह झूठ है."

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पहले स्वीकारा था न्योता

ममता बनर्जी ने लिखा है, "बंगाल में कोई भी राजनीतिक हत्या नहीं हो रही है. ये मौतें हो सकता है कि निजी दुश्मनी, पारिवारिक झगड़े और अन्य विवादों में हुई हों. इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है."

उन्होंने लिखा है, "इसलिए, मुझे माफ़ करें, नरेंद्र मोदी जी, इस वजह से मैं समारोह में शामिल नहीं हो सकती."

उन्होंने कहा कि 'ये ऐसा मौका नहीं जिसे कोई राजनीतिक पार्टी अपने राजनीतिक हित के लिए मौक़े की तरह इस्तेमाल करे. कृपया मुझे माफ़ करें.'

हालांकि इससे पहले ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा था कि वो इस समारोह में जाएंगी.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, बैरकपुर से बीजेपी के नए सांसद अर्जुन सिंह ने तंज़ किया था कि ममता बनर्जी प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रही हैं. वो अपने भतीजे को बचाने की खातिर खुश करने के लिए जा रही हैं.

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एक दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक और 50 पार्षद बीजेपी में शामिल हुए, जिससे दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट और बढ़ी है.

चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और ममता के बीच भी काफ़ी कटु बयानबाज़ी हुई और एक रैली में मोदी ने यहां तक कहा था कि तृणमूल के कई विधायक उनके सम्पर्क में हैं जो चुनाव बाद तृणमूल छोड़ देंगे.

इस बयान पर ममता बनर्जी की ओर से काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया आई थी और तृणमूल ने इसे 'विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त की कोशिश' कहा था.

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