जींद उपचुनाव: राहुल के क़रीबी सुरजेवाला क्यों हार गए
इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हरियाणा की जींद विधानसभा सीट (उप-चुनाव में) भारतीय जनता पार्टी ने अपने खाते में कर ली है.
ये सीट अबतक चौधरी देवीलाल के राजनीतिक दल इंडियन नेशनल के पास थी और विधायक हरिचंद मिड्ढा की मौत की वजह से ही वहां उप चुनाव करवाया गया था.
उप-चुनाव में कांग्रेस की तरफ़ से राहुल गांधी के क़रीबी समझे जानेवाले रणदीप सिंह सुरजेवाला और देवीलाल के पड़पोते जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से दिग्विजय चौटाला के मैदान में उतरने से बहुत कुछ दांव पर लग गया था.
इमेज स्रोत, Getty Images
जाट वोट बँटा
स्थानीय पत्रकार सत सिंह कहते हैं कि चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में मुद्दा विकास का रहा क्योंकि हरियाणा के सबसे पुराने ज़िलों में से एक होने के बावजूद जींद मूलभूत सुविधाओं के मामले में पिछड़ा रहा है. लेकिन जैसे-जैसे मतदान का दिन पास आता गया मामला फिर जातियों के ईर्द-गिर्द घूमने लगा और अंत तक जाट बनाम अन्य बन गया.
इस चुनाव में मौजूद तीन मुख्य दलों के उम्मीदवार जाट थे- कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला, जेजेपी के दिग्विजय चौटाला और आईएनएलडी से उम्मेद सिंह रेडू.
इमेज स्रोत, Getty Images
जींद की स्थिति
बीजेपी के उम्मीदवार कृष्ण मिड्ढा पंजाबी खत्री समुदाय से संबंध रखते हैं. उसी समुदाय से जिससे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का संबंध है.
1966 में हरियाणा के बनने के बाद प्रदेश के अधिकांश मुख्यमंत्री जाट समुदाय से रहे हैं.
प्रदेश में बनी पहली बीजेपी सरकार में एक ग़ैर-जाट के मुख्यमंत्री बनने से जहां जाटों में रोष था, वहीं दूसरे समुदायों में इसका मैसेज दूसरे तरीक़े से गया है.
बीजेपी के लिए कृष्ण मिड्ढा (जो पूर्व विधायक हरिचंद मिड्ढा के बेटे हैं) को टिकट देना भी फ़ायदे का सौदा साबित हुआ. सेना से रिटायर्ड डॉक्टर हरिचंद मिड्ढा लंबे समय तक अपने अस्पताल के माध्यम से स्थानीय लोगों की सेवा करते रहे थे.
इमेज स्रोत, Getty Images
कांग्रेस क्यों पिटी
कृष्ण मिड्ढा पिता की मौत के कुछ माह बाद ही बीजेपी में शामिल हो गए थे.
जेजेपी के मीडिया सलाहकार दीपकमल सहारन कहते हैं, "उस समय चौटाला परिवार ख़ुद में उलझा हुआ था तो पार्टी में हो रही इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाया".
परिवार में कलह के बाद अजय सिंह चौटाला और उनके बेटों ने अपनी एक अलग जननायक जनता पार्टी बना ली थी.
हालांकि कांग्रेस ने अपने मुख्य मीडिया प्रभारी और अध्यक्ष राहुल गांधी के क़रीबी रणदीप सिंह सुरजेवाला को जींद से मैदान में उतारा था लेकिन चुनाव से जुड़े एक कार्यकर्ता के मुताबिक़ 'पार्टी नाम की ही यूनाइटेड रही.'
दस सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुडा चुनाव प्रचार में बहुत समय नहीं दे पाए. इस बीच उनके घर पर सीबीआई का छापा भी पड़ गया और वो उधर उलझ गए.
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि अभी तक प्रदेश में किसी तरह के बड़े घोटाले का मामला सामने नहीं आया है, जिसका असर कहीं न कहीं वोटरों के मानस पर है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
टॉप स्टोरी
ज़रूर पढ़ें
सबसे अधिक लोकप्रिय
सामग्री् उपलब्ध नहीं है