इंदिरा गांधी की योजना, 80 फ़ीसदी काम पूरा पर नरेंद्र मोदी करेंगे शिलान्यास
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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 5 जनवरी को प्रस्तावित पलामू यात्रा विवादों में है.
वे यहां उस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने आ रहे हैं, जिसका कथित तौर पर उद्घाटन भी हो चुका है. उन्हें यहां उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) का शिलान्यास करना है.
इस परियोजना की स्वीकृति इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में साल 1970 में मिली थी. साल 1971 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने इसका शिलान्यास किया था.
इस प्रोजेक्ट का करीब 80 फ़ीसदी काम हो जाने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका फिर से शिलान्यास कर रहे हैं. इसके लिए झारखंड सरकार ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं. यह कार्यक्रम डाल्टनगंज (पलामू) के चियांकी एयरपोर्ट पर होना है.
प्रधानमंत्री मंडल डैम का ऑनलाइन शिलान्यास करेंगे. उन्हें कुछ और परियोजनाओं की आधारशिला रखनी है. वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे.
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पलामू के उपायुक्त डॉक्टर शांतनु अग्रहरि ने बताया प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान 70 से 80 हज़ार लोगों के जुटने की उम्मीद है.
लिहाजा, उनकी सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं के मद्देनजर 2000 पुलिसकर्मियों समेत करीब 3000 अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रतिनियुक्तियां की गई हैं. झारखंड पुलिस ने अपना वह आदेश भी वापस ले लिया है, जिसके तहत कार्यक्रम स्थल पर काले रंग को प्रतिबंधित किया गया था.
सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना के बाद पलामू के एसपी इंद्रजीत महथा ने कहा कि वह आदेश नहीं, एडवाइज़री थी. उन्होंने कहा, "मैं इसके लिए खेद प्रकट करता हूं. मैंने वह एडवाइजरी निरस्त कर दी है."
क्या करेंगे प्रधानमंत्री
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने दावा किया कि मंडल डैम के बन जाने से झारखंड के किसानों को फ़ायदा होगा और पलामू में सूखे की समस्या नहीं रहेगी.
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वे शुक्रवार की दोपहर डाल्टनगंज पहुंचे और शाम में मीडिया से बातचीत की. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मंडल डैम समेत झारखंड की छह सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा, "मंडल डैम का काम 1972 से ही बंद पड़ा था. अब 47 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी इसकी आधारशिला रखकर झारखंड के किसानों की समृद्धि के द्वार खोल रहे हैं. इसे पूरा करने में 2500 करोड़ रुपये की लागत आएगी."
इसके साथ ही वे 1,138 करोड़ की लागत वाली कनहर-सोन पाइपलाइन परियोजना और नहरों की लाइनिंग का भी शिलान्यास करेंगे. इससे पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी.
उठ रहे हैं सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मंडल डैम परियोजना दरअसल बिहार के किसानों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी.
मरांडी ने कहा कि इसीलिए उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मैंने इसकी समीक्षा कराने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था.
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बाबूलाल मरांडी ने बीबीसी से कहा, "प्रधानमंत्री का यह दौरा झारखंडवासियों को उजाड़ने की कोशिश है. इसके बनने से 15 गांव पूरी तरह उजड़ जाएंगे और 1600 परिवार विस्थापित होंगे. प्रोजेक्ट प्लान के मुताबिक इसके बन जाने से कुल 1 लाख 11 हजार 800 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी. इसमें झारखंड का हिस्सा सिर्फ 17 फीसदी है. मतलब, डैम चालू होने के बाद बिहार की 91,917 हेक्टेयर और झारखंड की सिर्फ 19,917 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी. जबकि डैम का पूरा निर्माण हमारी जमीन पर हो रहा है. यह हमारे साथ अन्याय है."
वहीं झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व आइपीएस अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री का दौरा दरअसल एक धोखा है.
उन्होंने कहा, "मंडल डैम की योजना इंदिरा गांधी ने 70 के दशक में बनाई थी. 80 के दशक में उसका काम भी शुरू हो गया. साल 1983 में बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री डा जगन्नाथ मिश्र ने इसका उद्घाटन भी कर दिया. अब प्रधानमंत्री उसका शिलान्यास करने आ रहे हैं. ऐसा काम भाजपा और उसके नेता ही कर सकते हैं. यह शर्मनाक स्थिति है. जनता इसका जवाब देगी."
इस बीच मंडल डैम से प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल तक 58 किलोमीटर की पदयात्रा निकालने पहुंचे पूर्व कांग्रेसी मंत्री के एन. त्रिपाठी को पुलिस ने उनके समर्थकों के साथ डैम से 16 किलोमीटर पहले ही बभंडी गांव में गिरफ्तार कर लिया. इस कारण उनकी पदयात्रा नहीं निकल सकी.
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पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी ने बीबीसी से कहा, "हमलोग मंडल डैम के विरोध में नहीं हैं. हम चाहते हैं कि इसके विस्थापितों को भूमि अधिग्रहण कनून के प्रावधानों के तहद मुआवजा मिले और सिंचाई क्षेत्र पर पुनर्विचार हो. ताकि झारखंड के किसानों को फ़ायदा हो सके. हमने इस बारे में प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन देने की योजना बनाई थी लेकिन मुझे सरकार के निर्देश पर गिरफ्तार कर लिया गया है."
मंडल डैम की हक़ीक़त
मंडल डैम दरअसल कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई परियोजना है. साल 1967-68 के दौरान इसके सर्वे के बाद भवनाथपुर के तत्कालीन विधायक हेमेंद्र प्रताप देहाती ने साल 1969 में बिहार विधानसभा के समक्ष धरना देकर इस प्रोजेक्ट का विरोध किया था क्योंकि इससे पलामू के किसानों को फायदा नहीं हो रहा था.
तब बिहार सरकार ने एक कमेटी बनाकर उसे अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा. उस वक्त पलामू अविभाजित बिहार का हिस्सा हुआ करता था.
तब इसके गवाह रहे माकपा के राज्य सचिव के डी सिंह ने बताया कि तत्कालीन बिहार सरकार ने कमेटी से अपने मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार करवा ली. इसके बाद मंडल डैम परियोजना को स्वीकृति मिल गई और तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने 1971 में मोहम्मदगंज गांव में इसका शिलान्यास कर दिया.
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साल 1993 में इसका काम बंद होने तक डैम निर्माण का काम क़रीब-क़रीब पूरा कर लिया गया. अब सिर्फ डैम का गेट (फाटक) बनना है.
डी.के. सिंह ने बीबीसी से कहा, "दरअसल, इसका जीर्णोद्धार होना है लेकिन सरकार कह रही है कि प्रधानमंत्री मंडल डैम का शिलान्यास करेंगे."
"अब जिस डैम का सालों पहले उद्घाटन हो चुका हो और जिससे निकली नहर से बिहार के औरंगाबाद, गया और जहानाबाद ज़िलों की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन सिंचित हो रही हो, उसका प्रधानमंत्री शिलान्यास कैसे कर सकते हैं. यह सोचने वाली बात है."
कई कमेटियां बनी
पूर्व सांसद जोरावर राम ने बीबीसी को बताया कि मंडल डैम को लेकर विभिन्न सरकारों ने कई कमेटियां बनायीं.
उन्होंने कहा, "मैं भी कई कमेटियों के साथ उनके सर्वे में शामिल रहा. तब कर्पूरी ठाकुर ने कई और सिंचाई परियोजनाओं की बात कही थी, लेकिन उसपर किसी सरकार ने अमल नहीं किया."
बाद में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव भी यहां आए थे और किसानों से बात की थी. लेकिन, इस परियोजना का विरोध कर रहे नक्सलियों ने साल 1993 में एक इंजीनियर बी एन मिश्रा की हत्या कर दी.
उसी दौरान पलामू टाइगर रिजर्व के कारण फारेस्ट क्लियरेंस का मामला अटका और इसका काम रोक दिया गया और लोगों ने पुलिस की मिलीभगत से यहां लगा लोहा बेचना शुरू कर दिया. तबसे यह उपेक्षित पड़ा हुआ है. सनद रहे कि पलामू टाइगर रिजर्व के कुछ गांव भी इस डैम के डूब क्षेत्र में आते हैं.
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पलामू, चतरा, गया और जहानाबाद के सांसदों ने इस डैम का बचा काम पूरा कराने के लिए प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा.
इसके बाद साल 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने इसका निर्माण फिर से शुरू कराने को स्वीकृति दी और फ़ॉरेस्ट क्लियरेंस के लिए आपत्तियों को न्यूनतम करने पर सहमति बनी. इसके बाद केंद्रीय जल संसाधन सचिव यू.पी. सिंह ने मंडल डैम का दौरा किया और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई.
झारखंड सरकार का दावा है कि मंडल डैम के विस्तार के काम से सिर्फ़ आठ गांवों के 780 परिवार विस्थापित होंगे. इनके लिए 15-15 लाख रुपये के एकमुश्त मुआवजे का प्रावधान किया गया है लेकिन मुआवज़े की रकम अधिकतर ग्रामीणों को नहीं मिल सकी है.
इस कारण भी ग्रामीण डैम निर्माण का विरोध कर रहे हैं.
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