अमृतसर हादसा: सिर कटी लाश का हुआ डीएनए टेस्ट तो नहीं आए दावेदार

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    • Author, रविंदर सिंह रॉबिन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

रावण दहन के दौरान 19 अक्तूबर को अमृतसर में हुए रेल हादसे के बाद मिली एक सिर कटी लाश का प्रशासन ने डीएनए टेस्ट करा लिया है जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाक़ी है.

35 वर्षीय एक पुरुष के शव के लिए जनरल रेलवे पुलिस (जीआरपी) में कई लोगों ने दावा किया था.

जीआरपी के एसएचओ बलबीर सिंह घुमन ने पुष्टि की है कि शव लेने के लिए दो परिवारों ने संपर्क किया है. हालांकि, उनसे कहा गया था कि उनके दावे की पुष्टि के लिए वे डीएनए टेस्ट के लिए तैयार रहें.

इस रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को पंजाब सरकार ने पांच लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है.

जोड़ा फाटक के नज़दीक धोबी घाट पर दशहरे के कार्यक्रम के दौरान हुए रेल हादसे में कम से कम 58 लोगों की मौत हुई थी.

एसएचओ घुमन के अनुसार, हादसे के दो दिन बाद 21 अक्तूबर को मध्य प्रदेश के प्रीतम ने दावा किया कि सिर कटी लाश उसके भाई सीता राम की है. प्रीतम का दावा था कि उसने लाश को अंडरगार्मेंट्स से पहचाना है.

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फिर नहीं आया कोई वापस

अगले दिन गोंडा ज़िले की महिला गीता ने जीआरपी से संपर्क किया और दावा किया कि वह शव उनके पति का है.

जीआरपी के जांच अधिकारी प्रकाश सिंह ने प्रीतम से कहा कि शव तभी उन्हें दिया जाएगा जब उनके डीएनए का शव के डीएनए से मिलान हो जाएगा.

वह कहते हैं, "मैंने उसे अगले दिन आने के लिए कहा लेकिन वह नहीं आया."

इसके बाद प्रकाश सिंह ने गीता से भी कहा कि वह अगले दिन आकर डीएनए टेस्ट कराएं लेकिन वह भी वापस नहीं आईं.

कुछ और लोगों ने भी किया दावा

उधर असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) शिवराज सिंह बल का कहना है कि कुछ और लोगों ने भी इस शव के लिए दावा किया था लेकिन वे इसका कोई संतोषजनक सबूत नहीं दे पाए इसीलिए असली रिश्तेदार को इस शव को सौंपने से पहले डीएनए टेस्ट कराने का फ़ैसला लिया गया.

इस बीच ज़िला प्रशासन ने आठ और परिवारों को सहायता राशि दी है. वहीं, सोमवार को 21 परिवारों को सहायता राशि के चेक दिए गए थे.

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कब क्या हुआ ?

अमृतसर रेलवे स्टेशन से क़रीब चार किलोमीटर दूर जोड़ा फाटक के पास दशहरा मेले का आयोजन किया गया था.

क़रीब सात हज़ार लोग रावण दहन के लिए मैदान में जमा हुए थे

इस मैदान की क्षमता दो से ढाई हज़ार लोगों की बताई जा रही है.

आम लोगों के लिए मैदान में जाने और आने का एक ही रास्ता था

मैदान के एक हिस्से में वीआईपी मेहमानों के लिए मंच बनाया गया था, जिसके पीछे से उनके आने-जाने की व्यवस्था थी

जिस समय हादसा हुआ उस समय पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी मौजूद थीं

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसे के बाद वो वहां से तुरंत निकल गईं

मैदान में ही एक दीवार है जो रेलवे लाइन और मैदान को अलग करती है. लोग दीवार और रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे

हादसा शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ लेकिन पुलिस और एंबुलेंस क़रीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची.

अमृतसर के गुरुनानक अस्पताल, गुरु रामदास अस्पताल, फोर्टिस अस्पताल और पार्वती देवी अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है.

इस हादसे में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत हो चुकी है.

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