अमृतसर रेल हादसा: रावण का किरदार करने वाला भी बना शिकार

इमेज कैप्शन, दलबीर सिंह कई वर्षों से धोबी घाट मैदान के रामलीला से जुड़े थे
    • Author, सरबजीत सिंह धालीवाल
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

अमृतसर रेल हादसे से कुछ ही देर पहले दलबीर सिंह वहां की रामलीला में रावण का अभिनय कर रहे थे. अभी रावण का पुतला जल ही रहा था कि वो भी इस हादसे का शिकार हो गए. शुक्रवार की रात हुई इस दुर्घटना में अब तक 59 लोगों की जान जा चुकी है.

दलबीर सिंह रामलीला में हर साल राम का किरदार करते थे, लेकिन दोस्तों के आग्रह पर वो इस बार रावण की भूमिका निभा रहे थे.

दलबीर सिंह के भाई बलबीर उन कई लोगों में से थे जो इस दुर्घटना में लापता अपने रिश्तेदारों की तलाश में सुबह-सुबह दुर्घटना स्थल पर पहुंचे थे.

दलबीर के भाई ने बीबीसी पंजाबी को बताया कि लोग मोबाइल फ़ोन का टॉर्च जला कर रेलवे ट्रैक और इसके आसपास की झाड़ियों में अपने परिजनों को ढूंढ रहे थे.

एक अधेड़ उम्र की महिला उषा अपने भतीजे आशीष की तलाश कर रही थीं. वो अस्पताल भी गई थीं, लेकिन वहां उनका भतीजा नहीं मिला. इसलिए वो अब इन झाड़ियों में उसे ढूंढ रही थीं.

वीडियो कैप्शन, अचानक से ट्रेन आई, भगदड़ मची और लाशें बिछ गईं

मनजीत सिंह इस दुर्घटना में बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके चाचा ट्रेन की चपेटे में आ गए. रावण दहन देखने के दौरान ही वो रेलवे की पटरी को पार कर वापस आने लगे थे. तभी ट्रेन आ गई.

मनजीत ने आती हुई ट्रेन को देख लिया और कूद कर अपनी जान बचाई, लेकिन उनके चाचा ऐसा नहीं कर सके और जान गंवा बैठे.

अपने एक दोस्त की मदद से चाचा अजित सिंह को मनजीत अपनी बाइक पर गुरु नानक अस्पताल ले गए, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

बलबीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि उनका भाई पतंग बनाया करता था और उसे अभिनय का बहुत शौक था, इसलिए रामलीला में भाग लिया करता था.

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बलबीर ने बीबीसी को बताया कि मंच पर आख़िरी बार रावण का किरदार करने के बाद दलबीर सिंह घनुष उठा कर भीड़ में लोगों के बीच रावण दहन के लिए गया था.

मंच और रेलवे ट्रैक के बीच क़रीब 25 मीटर का फ़ासला है. दलबीर सिंह की एक बेटी है. रावण की मौत का किरदार करने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि आज रामलीला में उनका किरदार ख़त्म हो जाएगा, लेकिन मंच पर और वास्तविक जीवन में उनकी मौत के बीच का फासला इतना कम होगा यह किसी ने नहीं सोचा था.

'मैं पटरी के बाहर कूद पड़ा'

बलबीर सिंह के साथ कई और लोग शोक में हैं. पटरी पर इस डरावनी ख़ामोशी के बीच लोगों को अब भी उम्मीद थी और उनकी तलाश जारी थी, लेकिन उनके मोबाइल की बैटरियों ने दम तोड़ना शुरू कर दिया था.

मनजीत सिंह बताते हैं कि उनके चाचा ने उन्हें दशहरा में बुलाया था. वो ख़ुद हॉल बाज़ार में एक दुकानदार हैं. उनके चाचा वेल्डिंग का काम करते थे.

इमेज स्रोत, Google Earth

इमेज कैप्शन, जोड़ा फाटक के पास हुआ हादसा

वो इस दुर्घटना से पहले पटरी पर खड़े थे क्योंकि वहां से रावण दहन को साफ़ देखा जा सकता था.

मनजीत कहते हैं, "हमें पटाखे की आवाज़ और लोगों के कोलाहल के आगे और कुछ सुनाई नहीं दिया. वहां मौजूद लोग जश्न के माहौल में थे. लोग पटरी पर खड़े हैं. यह बात उनके जेहन में ही नहीं रही. मुझे जैसे ही ट्रेन का आभास हुआ तो मैं पटरी के बाहर कूद पड़ा."

इमेज कैप्शन, उषा अपने 17 वर्षीय भतीजे की तलाश में सुबह सुबह पटरी पर आई हैं

मनजीत कहते हैं, "कई लोग ऐसा नहीं कर सके और कुछ ही पल में वो जगह जहां त्योहार मनाया जा रहा था बेहद डराने वाले घटनास्थल में बदल गया. चारो ओर ख़ून बहती क्षत-विक्षत लाशें बिखरी पड़ी थीं."

पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने बीबीसी से कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि इस दशहरा उत्सव के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति ली गई थी या नहीं.

इमेज कैप्शन, बलबीर के मुताबिक उसने अपने भाई को ट्रैक पर खड़े देखा था

वो पांच ख़ामियां जो पहली नज़र में दिखीं

इस तमाम बातों के बीच दुर्घटनास्थल पर कई चौंकाने वाली बातें दिखीं.

  • दशहरा मैदान के दो गेट हैं, जिनमें से एक अस्थायी मंच के कारण बंद था. दूसरा गेट छोटा था और यह पटरी की ओर खुलता है.
  • प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि पटरी की तरफ़ घुमाकर वहां एक एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई थी. ट्रैक मंच की पीछे की ओर है लेकिन एलईडी स्क्रीन लगाने से दर्शकों के लिए पटरी सबसे उपयुक्त जगह थी, देखने के लिए.
  • आयोजकों और प्रशासन की तरफ़ से सुरक्षा की व्यवस्था दुरुस्त नहीं थी.
  • स्थानीय लोगों ने बीबीसी से बताया कि दुर्घटनास्थल पर रौशनी की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी. जब दुर्घटना हो गई उसके बाद ही लाइट्स की व्यवस्था की गई.
  • क्या रेलवे विभाग को दशहरा के इस समारोह की जानकारी थी?

इमेज स्रोत, BBC/Ravinder Singh Robin

इमेज कैप्शन, घटनास्थल की तस्वीर

अमृतसर में रेलवे के हेल्पलाइन नंबर:

  • 0183-2223171
  • 0183-2564485
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