नज़रिया: 'परिवार की जाधव की मुलाक़ात पाकिस्तान का अपमानित करने का तरीक़ा है'
इमेज स्रोत, PUNIT PARANJPE/AFP/Getty Images
- Author, ज्योति मल्होत्रा
- पदनाम, कंसल्टिंग एडिटर, इंडियन एक्सप्रेस
कुलभूषण जाधव से उनकी मां और पत्नी की मुलाक़ात को पाकिस्तान अपनी दरियादिली के तौर पर पेश कर रहा है.
ये कहना फिलहाल मुश्किल है कि भारत के पास यहां से क्या रास्ते खुलते हैं.
इस बात का इंतज़ार किया जा रहा है कि भारत के अंदर और अंतरराष्ट्रीय जगत में इस पर किस किस्म की प्रतिक्रिया होती है.
आने वाले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव के केस में फिर से सुनवाई शुरू होने वाली है.
पाकिस्तान भले ही इसे अपने मानवीय चेहरे के तौर पर पेश करे लेकिन हमें ये देखना होगा कि ये कैसी इंसानियत है जिसमें कुलभूषण जाधव अपनी मां और पत्नी को बस देख पा रहे हैं, उनसे मिल नहीं पा रहे हैं.
इमेज स्रोत, PUNIT PARANJPE/AFP/Getty Images
'ह्यूमन जेस्चर'
एक तरफ पाकिस्तान इसे 'ह्यूमन जेस्चर' बता रहा है तो दूसरी तरफ़ कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी को ये लग रहा होगा कि उनका बेटा और पति कभी वापस घर नहीं आ पाएंगे.
दिलों में उम्मीद तो जगाई जा रही है लेकिन ऐसे माहौल में इसे कैसे 'ह्यूमन जेस्चर' माना जाए?
पाकिस्तान जिसे 'ह्यूमन जेस्चर' बता रहा है, वो दरअसल अपमानित करने का तरीका है.
हालांकि पाकिस्तान ने ये भी कहा है कि कुलभूषण जाधव की अपने घर वालों से आख़िरी मुलाकात नहीं है, ऐसी भेंट फिर हो सकती है.
अगर ऐसा होता होता है तो इसे अच्छा कदम कहा जाएगा.
किसकी कूटनीतिक कामयाबी?
जहां तक भारत की तरफ़ से इस मुलाकात को कूटनीतिक जीत के तौर पर देखने का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि भारत इसे अपने कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर पेश कर सकता है.
इसमें किसी की कूटनीतिक जीत नहीं है, न ही पाकिस्तान और न ही भारत की.
पाकिस्तान इसे कैसे अपना मानवीय चेहरा बता सकता है, उसने एक शीशे की दीवार कुलभूषण जाधव और उनके घरवालों के बीच खड़ी कर दी. इसमें मानवता जैसा क्या है.
जहां तक भारत का सवाल है, वो अपना मुकदमा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लड़ेगा. भारत की तरफ़ से जो चुप्पी छाई है, मेरे ख्याल से ये नकारात्मक किस्म की प्रतिक्रिया है.
एक सवाल ये भी है कि इस मुलाकात का कुलभूषण जाधव के मुकदमे पर क्या असर पड़ेगा.
आम क़ैदी नहीं!
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू होने के पहले पाकिस्तान इसे दुनिया के सामने इसे बताएगा.
वो दुनिया से ये कहेगा कि देखो हमने भारत के कहने पर पाकिस्तान पर हमला कर रहे जासूस को उसके घर वालों से मिलाया.
पाकिस्तान ज़रूर पूरी दुनिया को ये बताएगा कि कुलभूषण जाधव आम क़ैदी नहीं हैं और उन्हें भी उनके परिवार वालों से मिलने का मौका दिया गया.
इस लिहाज से देखें तो ये पाकिस्तान की जीत ही कही जाएगी.
लेकिन गहराई से देखें तो दुनिया की आंखें इतनी कमजोर नहीं है कि वो ये न देख पाए कि पाकिस्तान क्या करने की कोशिश कर रहा है.
जहां तक भारत पाकिस्तान का सवाल है, चीज़ें काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगी कि दोनों देशों की सरकारें अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर क्या कदम उठाती हैं.
(वरिष्ठ पत्रकार ज्योति मल्होत्रा से बीबीसी संवाददाता विभुराज की बातचीत पर आधारित.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
टॉप स्टोरी
ज़रूर पढ़ें
सबसे अधिक लोकप्रिय
सामग्री् उपलब्ध नहीं है