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योगी के ख़िलाफ़ नारे और हंगामे से शुरू हुआ सत्र
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश की 17वीं विधान सभा का पहला सत्र सोमवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ.
राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था के मुद्दे को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर नारेबाज़ी की.
कुछ विपक्षी सदस्य कागज़ की गेंदें बनाकर राज्यपाल राम नाइक की तरफ फेंकते देखे गए.
हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाकर सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में मदद की अपील की थी.
लेकिन राजनीतिक दलों की हुई बैठक में जो तेवर दिखे, उसे देखते हुए ये साफ हो गया था कि सोमवार को सदन में कितनी 'शांति' रहने वाली है.
पिछले पांच साल से अखिलेश सरकार को क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने वाली भारतीय जनता पार्टी इस समय प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में है.
लेकिन डेढ़ महीने में क़ानून व्यवस्था की जो स्थिति है, उसे लेकर विरोधी दल, ख़ासकर समाजवादी पार्टी सरकार पर हमलावर दिख रही है.
राज्यपाल का अभिभाषण
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "पचास दिन में ही प्रदेश के हालात ख़राब हो गए हैं. चारों तरफ अराजकता का माहौल है. भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार से जुड़े लोग क़ानून अपने हाथ में ले रहे हैं. ज़िम्मेदार पार्टी होने के नाते हम इस मुद्दे पर सरकार को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह घेरेंगे."
इससे पहले रविवार को विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के नेता पहुंचे.
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सभी दलों से अनुरोध किया गया है कि सत्र को शांतिपूर्वक चलने में मदद करें क्योंकि सदन को चलने देना सभी दलों की जिम्मेदारी है.
वहीं, समाजवादी पार्टी की विधानमंडल दल की बैठक भी हुई जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पहुंचे थे.
नई विधानसभा
बैठक में तय किया गया कि सरकार को पिछले 50 दिन में हुई सांप्रदायिक घटनाओं, महिलाओं के साथ बढ़ती हिंसा जैसी घटनाओं की ओर सरकार का ध्यान खींचा जाएगा.
वहीं कांग्रेस पार्टी किसानों की कर्ज़ माफ़ी को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है जबकि बीएसपी के लिए भी क़ानून व्यवस्था ही बड़ा मुद्दा है जिस पर सदन के भीतर सरकार को घेरने की तैयारी है.
नई विधानसभा में कई नई और दिलचस्प चीजें भी देखने को मिलेंगी.
लंबे समय बाद समाजवादी पार्टी में यादव परिवार के बाहर का कोई व्यक्ति सदन में पार्टी का नेता होगा.
पिछले दिनों अखिलेश यादव ने रामगोविंद चौधरी को विधायक दल का नेता बनाया था जबकि अखिलेश ख़ुद विधान परिषद के सदस्य हैं.
विधायक और मंत्री
जहां बीजेपी के तमाम विधायक और मंत्री पहली बार सदन में दिख रहे हैं वहीं दूसरे दलों से बीजेपी में आए कई नेता विधायक और मंत्री के रूप में नज़र आ रहे हैं.
इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, रीता बहुगुणा जोशी और ब्रजेश पाठक प्रमुख हैं.
पिछली विधान सभा में स्वामी प्रसाद मौर्य बीएसपी में थे और रीता जोशी कांग्रेस में थीं.
विधानसभा सचिवालय के मुताबिक पहले सत्र में छह बैठकें होंगी.
मंगलवार से गुरुवार तक राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी जो अगले सोमवार को भी जारी रहेगी.
बताया जा रहा है कि सरकार इसी सत्र में जीएसटी विधेयक भी करेगी.
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