बिहार चुनाव नतीजे: आरजेडी को इतना बड़ा नुक़सान कैसे हुआ, कहां खोई सबसे ज़्यादा सीटें?
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- Author, जैस्मिन निहलानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
शुक्रवार को 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, इनमें नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने बड़ी जीत दर्ज की.
सत्ताधारी गठबंधन ने कुल 202 सीटों पर जीत हासिल की और उनका वोट शेयर 46.5 फ़ीसदी रहा.
प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज अपना खाता खोलने में भी कामयाब नहीं हो सकी. पार्टी को कुल 3.3 फ़ीसदी वोट मिले.
वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी और तीन वामपंथी दलों वाली महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिली और वो दूसरे नंबर पर रही. उसका वोट शेयर 37.6 फ़ीसदी रहा.
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राज्य में कई सीटों पर मुक़ाबला बेहद कड़ा था और जीत का मार्जिन बेहद कम था. कम से कम 62 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत का मार्जिन पांच फ़ीसदी या उससे कम था.
एनडीए के खाते में आई 40 सीटें ऐसी थीं जहाँ जीत का मार्जिन कम था, वहीं महागठबंधन को बेहद कम फ़र्क से 21 सीटों पर जीत मिली.
पार्टियों की बात की जाए तो तेजस्वी यादव की आरजेडी को सबसे अधिक वोट शेयर मिला. उसे 23 फ़ीसदी पॉपुलर वोट मिले. इस मामले में पार्टी को साल 2020 के लगभग बराबर ही वोट मिला. लेकिन ये आंकड़ा सीटों में तब्दील नहीं हो सका.
आरजेडी ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन केवल उसे 25 सीटों पर जीत मिली. पार्टी का स्ट्राइक रेड 17.5 फ़ीसदी रहा. 2025 चुनाव का नतीजा पार्टी के लिए साल 2010 के नतीजे की तरह था, जब उसने 22 सीटें अपने नाम की थीं.
आरजेडी को कितना नुक़सान हुआ
जिन सीटों पर इस बार आरजेडी ने चुनाव लड़ा था उनमें से 73 सीटें ऐसी थीं जिन पर पार्टी ने साल 2020 में जीत हासिल की थी.
लेकिन आरजेडी के हाथों से 2020 में जीती सीटों में से 57 सीटें फिसल गईं. पार्टी पहले की जीती हुई केवल 16 सीटों को अपने पास बनाए रखने में कामयाब हो सकी.
जो सीटें आरजेडी के हाथों से निकलीं, उनमें से 31 जनता दल (यूनाइटेड) के खाते में गईं, जबकि 10 सीटों को बीजेपी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने नाम कर लिया.
साल 2020 में आरजेडी ने जिन सीटों पर जीत हासिल की थी उन सीटों में वोट शेयर में आए बदलाव की बात की जाए तो सबसे अधिक गिरावट गोविंदपुर सीट पर दर्ज की गई है. यहां उसका वोट शेयर साल 2020 में 49.21 फ़ीसदी था जो 2025 में कम होकर 27.46 फ़ीसदी रह गया है.
इसके बाद मोकामा में पार्टी के वोट शेयर में बड़ी गिरावट दिखी. यह साल 2020 में 52.99 फ़ीसदी की तुलना में कम होकर 34.18 फ़ीसदी रह गया है.
क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि आरजेडी को सबसे बड़ा झटका भोजपुर, सारण, तिरहुत और मगध में मिला.
भोजपुर में पार्टी ने साल 2020 में 11 सीटें जीती थीं, लेकिन 2025 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ एक रह गया.
तिरहुत में उसकी सीटें 10 से घटकर सिर्फ दो रह गईं. वहीं मगध में उसके पास पहले 15 सीटें थीं, यहां उसकी सीटें घटकर केवल छह रह गई हैं.
बिहार में आरजेडी की 10 मज़बूत सीटें भी थीं. इस रिपोर्ट में विश्लेषण के लिए उन सीटों को मजबूत सीटें कहा गया है जहां से किसी पार्टी ने लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की हो.
इनमें से आरजेडी सिर्फ पांच मज़बूत सीटें ही जीत सकी. इनमें से चार सीटें- दरभंगा ग्रामीण, समस्तीपुर, जगदीशपुर और बेलागंज उसके हाथों से जेडीयू ने झटक लीं, जबकि बनियापुर बीजेपी के खाते में चली गई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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