ट्रंप ने फिर बातचीत की कही बात, ईरान ने पाकिस्तान की भूमिका पर भी दिया जवाब
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ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग से इतर क्या ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत भी हो रही है? इस सवाल का अब तक पूरी तरह जवाब नहीं मिल पाया है.
एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ईरान के "ज़्यादा समझदार शासन के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है."
वहीं ईरान ने कहा है कि उसकी अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है. इसके साथ ही ईरान ने साफ़ कर दिया है पाकिस्तान की किसी भी पहल में वो शामिल नहीं है.
मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष के मुद्दे पर रविवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चार देशों (पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी.
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने का प्रस्ताव भी दिया है.
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ट्रंप ने बातचीत पर अब क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार शाम अपने ट्रुथ सोशल हैंडल से पोस्ट किया कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई ख़त्म करने के लिए ईरान के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है.
ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका, ईरान में अपना सैन्य अभियान ख़त्म करने के लिए ईरान के नए प्रशासन के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है. इसमें काफ़ी प्रगति हुई है."
"लेकिन अगर किसी वजह से जल्द कोई समझौता नहीं होता और अगर होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत व्यापार के लिए नहीं खोला जाता है, तो हम ईरान में अपने इस अभियान को ऐसे समाप्त करेंगे कि उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्र, तेल के कुएँ और ख़ार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर देंगे, जिन्हें हमने जानबूझकर अभी तक नहीं छुआ है."
वहीं हाल ही में ट्रंप ने ब्रितानी अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स से इंटरव्यू में कहा है कि वह "ईरान का तेल अपने कब्ज़े में लेना" चाहते हैं और खार्ग द्वीप पर भी नियंत्रण कर सकते हैं.
हालाँकि, बाद में ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ समझौता 'बहुत जल्द' हो सकता है.
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है और इसमें प्रगति हो रही है.
ईरान ने किया इनकार
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हालांकि ईरान ने साफ़ कहा है कि उसकी और अमेरिका के साथ सीधी कोई बातचीत नहीं हो रही है.
मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक्स पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई का बयान पोस्ट किया है.
इस बयान में बताया गया है कि ईरान के साथ 'अमेरिका की कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है, सिर्फ़ बिचौलियों के ज़रिए बहुत ज़्यादा बेमतलब की मांगें आ रही हैं.'
ईरान ने कहा है कि 'अमेरिकी कूटनीति लगातार बदल रही है लेकिन हमारा रुख़ साफ़ है.'
पाकिस्तान को लेकर किए गए ट्रंप के दावों पर भी ईरान ने कहा है कि "पाकिस्तान का मंच उसका ख़ुद का है और हम उसमें भागीदारी नहीं कर रहे हैं. युद्ध ख़त्म करने के क्षेत्रीय आह्वान का स्वागत है लेकिन ये याद रखना चाहिए कि ये शुरू किसने किया था."
इस्लामाबाद में क्या हुआ था?
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बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के आने की वजह से रविवार को पाकिस्तान की राजधानी डिप्लोमैटिक एक्टिविटी और मीटिंग का हब बनी रही. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के संदर्भ में इस्लामाबाद में हो रही मीटिंग को अहम माना जा रहा है.
रविवार को तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक़ डार की अगुवाई में चार देशों की मीटिंग में हिस्सा लिया, जिसके बाद तीनों विदेश मंत्री रविवार देर रात रवाना हो गए.
मीटिंग के बाद जारी एक बयान में पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि 'पाकिस्तान को आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत होस्ट करने पर गर्व होगा, ताकि इस झगड़े का एक पक्का और स्थायी हल निकाला जा सके.'
इसहाक़ डार ने आगे कहा कि उन्हें यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि 'अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान द्वारा कराई जा रही बातचीत पर भरोसा जताया है.'
उन्होंने कहा कि मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने इस झगड़े को सुलझाने के लिए पाकिस्तान की कोशिशों को अपना पूरा सपोर्ट देने का भरोसा दिया है.
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इसहाक़ डार ने कहा कि इस्लामाबाद में चार विदेश मंत्रियों की कंसल्टेटिव मीटिंग, 19 मार्च को रियाद में हुई अपनी तरह की पहली कंसल्टेटिव मीटिंग का दूसरा हिस्सा थी.
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने तीनों देशों के विदेश मंत्रियों को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत के बारे में बताया है, जिन्होंने इस मामले में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है.
इसहाक़ डार ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी चीनी विदेश मंत्री वांग यी से डिटेल में टेलीफोन पर बातचीत हुई है.
"चीन ईरान-अमेरिका बातचीत होस्ट करने की पाकिस्तान की पहल का पूरा सपोर्ट करता है."
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल से भी फ़ोन पर बात की है. इसहाक़ डार ने कहा कि सेक्रेटरी-जनरल ने भी पाकिस्तान की शांति पहल के लिए पूरा सपोर्ट जताया है.
इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री और सूचना मंत्री ने दावा किया था कि इस्लामाबाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इस बारे में बातचीत के लिए इस्लामाबाद में तैयारियां भी की जा रही हैं.
मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के स्पेशल दूत, स्टीव विटकॉफ़ ने भी पुष्टि की थी कि पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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