किम जोंग उनः उत्तर कोरिया के नेता क्या वाक़ई जंग छेड़ना चाह रहे हैं?

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- Author, फ़्रांसिस माओ
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
पिछले हफ़्ते दो प्रतिष्ठित विश्लेषकों ने यह कह कर तहलका मचा दिया कि उत्तर कोरिया के शासक जंग की तैयारी कर रहे हैं.
उनका कहना है कि किम जोंग उन ने समझौते और दक्षिण कोरिया के साथ एकीकरण के विचार को त्याग दिया है. इसकी बजाय वो उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को युद्धरत दो स्वतंत्र देश के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं.
एक पूर्व सीआईए विश्लेषक रॉबर्ट एल कार्लिन और कई बार उत्तर कोरिया जा चुके परमाणु वैज्ञानिक सीगफ्राइड एस हेकर ने 38 नॉर्थ वेबसाइट पर एक लेख में लिखा है, “हमारा मानना है कि 1950 में अपने पिता की तरह, किम जोंग उन ने युद्ध में जाने के लिए रणनीतिक फैसला ले लिया है.”
इस घोषणा ने वॉशिंगटन और सीओल में हड़कंप मचा दिया है लेकिन अधिकांश विश्लेषक इस बात से सहमत नहीं हैं.
इसे लेकर बीबीसी ने एशिया, यूरोप और उत्तर अमेरिका के सात एक्सपर्ट से बात की और उसमें किसी ने भी इस अनुमान का समर्थन नहीं किया.
कोरिया पर नज़र रखने वाले नीदरलैंड्स में क्राइसिस ग्रुप के क्रिस्टोफर ग्रीन का कहना है, “संभावित विनाशकारी संघर्ष में अपने पूरे शासन को ख़तरे में डालना उत्तर कोरियाई लोगों के लिए उचित नहीं है.”
उनका और अन्य विश्लेषकों को कहना है कि उत्तर कोरिया पश्चिम शक्तियों को वार्ता की मेज पर लाना और देश के अंदर राजनीतिक दबाव पैदा करना चाहता है.
लेकिन वे मानते हैं कि किम जोंग उन की आक्रामकता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और उनकी सरकार अधिक ख़तरनाक़ हो गई है.
आक्रामकता का क्या है कारण?

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किम जोंग उन पर नज़र रखने वालों के लिए उनकी परमाणु धमकी नई नहीं है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि प्योंगयांग का ताज़ा संदेश अलग प्रकृति का है.
नए साल पर उन्होंने ऐलान किया था कि कोरियाई प्रायद्वी पर कभी भी जंग छिड़ सकती है. इसके छह दिन बाद ही उनकी सेना ने सीमा पर कई गोले दागे.
उत्तर कोरिया ने एक नए ठोस ईंधन वाली मिसाइल का परीक्षण करने और पानी के अंदर हमलावर ड्रोन के टेस्ट का दावा किया था, जो परमाणु हथियार ले जा सकता है.
दो साल से क़रीब हर महीने ही वे मिसाइल लांच करते हैं और हथियार के विकास का कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं, जोकि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन है.
उत्तर कोरिया के बनने के बाद से ही एकीकरण उसकी विचारधारा का अभिन्न अंग रहा है.
सियोल में कूकमिन यूनिवर्सिटी में सीनियर रिसर्चर पीटर वार्ड के अनुसार, “यह बहुत बड़ा बदलाव है. यह इस सरकार के बुनियादी वैचारिक आधार को उलट देता है.”
किम जोंग उन विरासत को अब त्याग रहे हैं. कूटनीतिक चैनलों और सीमा पार रेडियो प्रसारण को बंद करने के साथ ही उन्होंने प्योंगयांग के बाहर नौ मंजिले एकीकरण स्मारक को ध्वस्त करने का ऐलान किया.
यह स्मारक 2001 में एकीकरण के लक्ष्य को पाने के लिए उनके पिता और दादा द्वारा किए गए कार्यों को समर्पित करने के लिए बनाया गया था.
मंगलवार को प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यह स्मारक ध्वस्त किया जा चुका है, हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
किम द्वितीय सुंग ने ही 1950 में जंग शुरू की थी लेकिन उन्होंने ये विचार भी रखा था कि किसी दिन दोनों कोरियाई देशों का एकीकरण होगा.
सीमित हमले का विकल्प
जंग में दक्षिण कोरिया के बहुत से लोगों की जान जा सकती है लेकिन किम जोंग उन और उनकी सरकार के लिए यह अंत साबित होगा.
कार्लिन और हेकर ने इन चीजों को जंग छेड़ने की तैयारी का संकेत माना है, हालांकि अधिकांश विश्लेषक इससे सहमत नहीं हैं.
जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश फाउंडेनशन फ़ॉर यूएस-चाइना रिलेशंस के सीयोंग-हायोन लीन का कहना है कि देश अगले महीने से विदेशी पर्यटकों के लिए अपनी सीमा खोलने जा रही है और रूस को इसने गोला बारूद बेचा है. ऐसे में नहीं लगता कि वे जंग छेड़ने जा रहा है.
कूकमिन यूनिवर्सिटी के मिस्टर वार्ड का कहना है, “जंग में दक्षिण कोरिया के बहुत से लोगों की जान जा सकती है लेकिन किम जोंग उन और उनकी सरकार के लिए यह अंत साबित होगा.”
इसकी बजाय कुछ लोगों का मत है कि वो सीमित कार्रवाई का सहारा लें.
कार्नेगी एंडॉवमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस के विश्लेषक अंकित पांडा के अनुसार, “मेरी चिंता दक्षिण कोरिया पर सीमित हमले को लेकर अधिक है. यह हमला दक्षिण कोरिया के इलाके या सेना को निशाने पर ले सकती है लेकिन यह सीमित ही होगा.”
हो सकता है कि यह गोलीबारी या कोरियाई प्रायद्वीप के पश्चिम में विवादित द्वीपों पर कब्जे तक सीमित हो.
2010 में उत्तर कोरिया ने यीओनप्योंग द्वीप पर हमला किया था जिसमें दक्षिण कोरिया के चार सैनिक मारे गए थे.
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया जानने के लिए हो सकता है कि इसी तरह का कोई उकसाउ कदम उठाया जाए क्योंकि दक्षिण कोरिया के मौजूदा राष्ट्रपति यू सुक यिओल कई बार कह चुके हैं कि उत्तर कोरिया के किसी भी कदम का करारा जवाब दिया जाएगा.
पांडा का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो यह संघर्ष जंग की शक्ल ले लेगा.

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उत्तर कोरिया का पुराना तरीक़ा
सियोंग-हायोन ली का कहना है, “उत्तर कोरिया का इतिहास देखें तो इसने समझौता वार्ता में बढ़त हासिल करने के लिए अन्य देशों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उसने ऐसे उकसावे वाले तरीके अपनाए हैं.”
देश आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा है और 2024 में उसके दुश्मनों के लिए चुनावी साल है, अमेरिका में राष्ट्रपित और दक्षिण कोरिया में विधायिका के चुनाव.
डॉ. ली का का कहना है कि ‘किम जोंग उन के लिए उकसावे के लिए यह अच्छा मौका है.’
जो बाइडेन के नेतृत्व में मौजूदा अमेरिका प्रशासन यूक्रेन और ग़ज़ा में फंसा हुआ है और उत्तर कोरिया पर उसका ध्यान नहीं है जबकि प्योंगयांग का अधिकतर साबका रिपब्लिकन प्रशासन से हुआ था.
परमाणु निःशस्त्रीकरण में अवरोध आने से पहले 2019 में डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच चर्चित मुलाक़ात हुई थी. हो सकता है कि किम ट्रंप की वापसी का इंतज़ार कर रहे हों.
विश्लेषकों का मानना है कि रूस के साथ क़रीबी दोस्ती और पिछले साल चीन से मिल रही आर्थिक मदद ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया होगा.
अपने जासूसी सैटेलाइट को लॉंच करने में रूस से उसे तकनीकी मदद मिली है और दोनों देशों में क़रीबी बढ़ी है.

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घरेलू लक्ष्य
कई विश्लेषकों का कहना है कि किम जोंग उन अपनी सत्ता की पकड़ को स्थिर करना चाह रहे हैं.
सियोल में एवहा यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर लीफ़-एरिक एसले का मानना है कि ‘सत्ता को बचए रखने का यह वैचारिक तालमेल दिखाई देता है. उत्तर कोरियाई लोगों को लगातार लग रहा है कि दक्षिण के मुकाबले उनका कम्युनिस्ट देश असफल हो रहा है.’
वो कहते हैं कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि पूरे देश में भुखमरी के हालात हैं. ऐसे मुश्किल समय में किम के मिसाइल खर्च को सही ठहराने के लिए दुश्मन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
वार्ड का कहना है “पहले दक्षिण कोरिया एक बुरा राज्य था, जिसका एक भ्रष्ट संस्कृति के साथ एकीकरण किया जाना था, और लोगों को उनकी बुरी सरकार से मुक्त करने की ज़रूरत पर बल था.”
“अब देश और इसकी संस्कृति को बुरा घोषित कर दक्षिण कोरियाई संस्कृति पर दमन को जारी रखने को सही ठहराया जा सकता है.”
पिछले हफ़्ते बीबीसी ने एक दुर्लभ फ़ुटेज को जारी किया था जिसमें के-ड्रामा देखने वाले 12 साल के दो उत्तर कोरियाई किशोरों को सश्रम सज़ा दी गई थी.
उत्तर कोरियाई रेफ़्यूज़ी की मदद करने वाली एक एनजीओ लिबर्टी इन नॉर्थ कोरिया के सोकीन पार्क का कहना है, “वो असल में जंग नहीं चाहते. यह एक ऐसा दांव होगा जहां उन्हें सबकुछ गंवाने के सिवा कुछ मिलने वाला नहीं.”
उनके अनुसार, किम जोंग उन की धमकियों का मकसद, उत्तर और दक्षिण की नीति को मज़बूत करना और देश में अपनी सत्ता को पुख़्ता करना है.
विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और सहयोगियों को सबसे बुरे हालात के बारे में तैयार रहना चाहिए लेकिन उत्तर कोरिया के अंदरूनी हालात और व्यापक भूराजनीति पर भी नज़र रखने की ज़रूरत है.
डॉ. ली का कहना है कि उत्तर कोरिया के दिमाग में क्या चल रहा है, इसका पता लगाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि उन्हें बातचीत में शामिल किया जाए.
केली एनजी की अतिरिक्त रिपोर्टिंग
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